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Arshad ke man se........

जन्म दिवस की शुभकामनाओं से दिन की शुरुआत हुई अपने पराये लगे पराये अपने लगे ......बात मतलब की यही रही की एक बसंत और गया ....ग़मज़दा रहूँ या जश्न मना लूँ यही सोंच रहा हूँ ......वक़्त तो मुट्ठी से फिसलता हुआ रेत है .....जाने कितना वक़्त हाथ से निकल गया और कितना बाकी है निकल जाने को ......इसी उधेड़...
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  September 7, 2014, 2:32 pm
गली मोहल्ले से एक  कहानी को गुज़रते देखा हर किरदार को किसी और में  ठहरते  देखा कोई मुझमे था एहसास हुआ मुझको भी मैंने उसे देख आईने को सवरते देखा एक शोर में दब जाया करतें थे  उसके लफ्ज़ बेवजह उन  आवाज़ को अपने अंदर हीं टहलते देखा चलो दिया से बाती क...
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  July 10, 2014, 7:51 am
कुछ लफ्ज़ मेरे लब कोनेकी-बदी ने दीएक तमाचा मेरे गुरुर परमेरी ख़ुदी ने दीएक अश्क मेरे शक्ल काइस ज़िन्दगी ने दीसब छूटने का ग़ममेरी बेखुदी ने दीएक ख़त जला औरगुजरा हुआ वक़्त दिख गयाएक अँधेरा मेरी ज़िन्दगी कोइस रौशनी ने दीसब लफ्ज़ इन हवाओं मेंमहफूज़ अब भी हैमौत मेरी ज़िन्दगी कोइसी ज़...
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  July 1, 2014, 3:19 pm
रात जगा तो जगी रही सभी भावनाएं, कई बार शोर में जगा तो कई बार ख़ामोशी ने  नींद में खलल डाली।  जागना अच्छा था, सो जाता तो क्या पाता  ....?आखिर नींद उचट क्यों जाती  है? उम्र होने पर ऐसा होता तो चलो कोई बात भी हो मगर ये गुमान भी तो नहीं पाल सकता। इसी क्रम में टेलीविज़न पर ...
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  March 18, 2014, 2:41 pm

गाड़ी सड़क पर दौड़ते हुए निकल जायेगी …………… अरशद अलीगाड़ी सड़क पर दौड़ते हुए निकल जायेगीसड़क नेह लगा लेगा उस गाड़ी सेसड़क को नाज़ रहेगा अपने ऊपर से  गुजरे गाड़ी परगाड़ी शर्मिंदा रहेगी  सड़क परउसने कई सड़कों से गुज़ारा है खुद को और तुलनात्मक अध्ययन मेंसड़क कि कई खामियां दिख जा...
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  March 14, 2014, 5:30 pm
कल एक बुढिया कोचटाई बुनते देखातब लगा चटाईयां बुनी जाती हैंपेड़ पर नहीं उगतीपैसों के जोर परवो खुशियाँ खरीदने निकल जाता हैउसे ज्ञान नहींखुशियाँ बाज़ार में नहीं मिलतीसतह पर टिकने के लिएकुछ प्रयास सतही हो सकते हैंपर ग्रुत्वाकर्षण के सिद्धांत के बगैरकोई चीज सतह पर नही...
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Tag :बस यूं हीं (जो कुछ मै सोंच पता हूँ )
  May 20, 2013, 7:48 pm
गाँव के अन्य लड़कों के साथमंदिर निर्माण के लिए चन्दा लेते " मोहम्मद अली "भावुक हो जाते  थे   पूछने पर  यही कहते  थे   "भगवान  का घर बन रहा है "सादिक इसका बिरोध करते थे ।श्रीकांत सिंह हमेशा अपना  पानी लेकर चलते थे  किसी अन्य के हाथों से जल ...
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Tag :बस यूं हीं (जो कुछ मै सोंच पता हूँ )
  May 18, 2013, 1:11 pm
गाँव के अन्य लड़कों के साथमंदिर निर्माण के लिए चन्दा लेते " मोहम्मद अली "भावुक हो जाते  थे   पूछने पर  यही कहते  थे   "भगवान  का घर बन रहा है "सादिक इसका बिरोध करते थे ।श्रीकांत सिंह हमेशा अपना  पानी लेकर चलते थे  किसी अन्य के हाथों से जल तक ग्रहण नहीं करते थे सूर्यक...
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Tag :एक सच्चाई
  May 18, 2013, 1:11 pm
दूरियां कितनी भी बना लोयादें चली जाती हैं ......ऐसा क्यों ?जो चीज प्यारी होती हैवही टूट जाती है ......ऐसा क्यों ?जीवन से प्यार होता हैज़िन्दगी रूठ जाती है ......ऐसा क्यों ?मौन रहना चाहता हूँ कुछ क्षणअंतः कलह शब्द फोड़ जाती है ......ऐसा क्यों ?आत्मबल बढ़ता हूँ बहुत देर तक दुनिया मनोबल ...
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  February 2, 2013, 1:17 pm
बचपन में एक फिल्म देखा था मिस्टर इंडिया .....जितनी समझ थी उतने में एक बात यही समझ में आई फिल्म बहुत अच्छी है ...फिल्म में एक मोगेम्बो  था .....हेल मोगेम्बो  सुनना उसे अच्छा लगता था ...लोगों को सताता था ,डरता था जब भी परदे पर आता था डर लगता था...मगर वहीँ एक मिस्टर इंडिया भी था जो डरा...
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  January 18, 2013, 7:41 pm
मैंने एक अंधे से पूछा,तुम देखते कैसे हो ?अंधे ने कहा ...छोडो देखता कैसे हूँ ,ये बताओ देखना कैसे है ?यदि आँखों  से देखना होता है तो लोंगों  की आँखों से देखता हूँ मगर इससे चीजें धुंधली दिखती है और यदि साफ़ देखना होता है तो अपनी अनुभवों से देखता हूँ इसके अलावा कभी-कभी स्पर्श ...
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Tag :आँख
  December 24, 2012, 12:39 am
लड़की वाले डरे-डरे से थे...लड़के वाले हरे-भरे से थे..हाँथ में थाल लिए कन्या जैसे आईलड़के की माँ, पति पर चिल्लाईमुझे सातवीं बार वही लड़की दिखला रहे होजगह बदल बदल कर एक हीं घराने में आ रहे होपति झुंझला गयाअपनी औकात पर आ गयाकहा,भाग्यवान लड़की के मामले में तुम थोडा लेट हो...क्य...
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Tag :हास्य कविता
  December 21, 2012, 1:46 pm
माँ की तबियत ठीक नहीं ........करीब एक महीने से बीमार हैं .......उनकी बिमारी मानसिक है .......मगर बेहद समझदारी के साथ ........वो जानती हैं की पूरा परिवार चिंतित है ........यही कारण है, कल रात  भी सभी के  सोने के बाद उन बर्तनों को चुप-चाप  धो डाला जो अगली  सुबह, मुझे धोने थे .........शायद वो सोंचती हैं बे...
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  December 16, 2012, 12:35 am
वर्ष के सभी दिन महत्वपूर्ण हैं ,ऐसा मैंने बड़ों से सुना है ..मगर कुछ दिन ऐसे होते हैं जो इतिहास रच देते हैं ....समय बीत  जाता है मगर वो गुजरे दिन ज़िन्दगी के एक अहम् मोड़ की तरह पुरे ज़िन्दगी को सकारात्मक सवरूप प्रदान कर देतें हैं।          उन यादों को याद करना अंतर मन को ताज़ा ...
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  December 1, 2012, 6:34 pm
युक्ति उसे सूझती है,जो अभाव में जीता हैतुम पियो मिनरल वाटरवो बारिश का पीता हैछत पर और एक घर बना करहोम लोने लेने का चक्करउसको देखो "मस्त कलंदर"खुली आकाश में सोता हैजिस धागे से सिले चटाईउसी धागे से कुरता उसकातुम सूट का वज़न उठाओवो शारीर हीं ढोता हैएक रोटी गरीब को देकरतुम ...
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  July 26, 2012, 4:30 pm
युक्ति उसे सूझती है,जो अभाव में जीता हैतुम पियो मिनरल वाटरवो बारिश का पीता हैछत पर और एक घर बना करहोम लोने लेने का चक्करउसको देखो "मस्त कलंदर"खुली आकाश में सोता हैजिस धागे से सिले चटाईउसी धागे से कुरता उसकातुम सूट का वज़न उठाओवो शारीर हीं ढोता हैएक रोटी गरीब को देकरतुम ...
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  July 26, 2012, 4:30 pm
युक्ति उसे सूझती है,जो अभाव में जीता हैतुम पियो मिनरल वाटरवो बारिश का पीता हैछत पर और एक घर बना करहोम लोने लेने का चक्करउसको देखो "मस्त कलंदर"खुली आकाश में सोता हैजिस धागे से सिले चटाईउसी धागे से कुरता उसकातुम सूट का वज़न उठाओवो शारीर हीं ढोता हैएक रोटी गरीब को देकरतुम ...
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  July 26, 2012, 4:30 pm
मैंने अपने ससुर जी से कहाआपकी बेटी चुटकी बजा करकई लड़ाइयाँ  लड़ लेती हैससुर जी कहते हैं ...."ताली एक हाँथ से नहीं बजती है "शेर सुनाने पर भी माहोलठीक नहीं होताससुर जी कहते हैं .... "सौ सुनार का तो एक लुहार का होता है "बड़े भाई के समझाने पर भीउसे समझ नहीं आई हैससुर जी कहते हैं .... "च...
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  June 29, 2012, 7:58 pm
जो चाहता था हुआ नहीं.जो हुआ पर्याप्त नहींआशा निराशा की इस गुत्थम-गुत्थी में जीत किसी की नहींमानसिक लड़ाइयों में अंत की कामना करते हींस्थितियां नयी लड़ाई की पृष्ठ भूमि तैयार करता गयाकभी हार कभी जीत  चक्र बस चलता गया ..........शब्दों का रंगकागज पर पड़ते हींफिर से मै बन गया चि...
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  June 28, 2012, 8:04 pm
सभी  रिश्तों का अपना एक  मज़ा  है ...मगर एक पिता होने  का आनंद अलग है..कुछ अनुभव बाटना चाहता हूँ..कहाँ से शुरू करूँ  यही सोंच रहा हूँ ...मै और मेरा बेटा आरिज़ 4 माह का                                              तुम नए होपरन्तु मुझे लगता  हैकुछ पुरानी धारणाएंघर कर रहीं हैं तुम्हारे अन्दर भीऔर प...
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  April 15, 2012, 1:08 pm
--------१-------सत्य को सौगंघ कीआवश्यकता है कहाँजो बिजय है जन्म से हार का उसे भय कहाँ वाण जो निकल गए वो कहाँ लौटते भेदते हैं लक्ष्य को जो लक्ष्य के लिए चला घेरता है लाख उड़ता हुआ बादल घना सूर्य को ढके कोईप्रवल नहीं कोई बनाशौर्य और सत्य कोसदेव इश्वरिये बल मिला रेत भी उर्वर हुआ...
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  April 1, 2012, 6:09 pm
मिसेज़ शर्मा परेशान हैं ..पत्नी ने धीरे से कहा मैंने पूछा क्यों?पत्नी ने कहा अपने बच्चों को लेकरचिंतीत हैंमैंने पुनः पूछा क्यों?पत्नी ने कहाबच्चे हाज़िर ज़वाब हो गए हैं मैंने कहाइसमें चिंता के क्या बात हैबच्चे हैं उनके अपने भी ज़ज्बात हैंदेखता हूँ समय पर स्कूल आते जा...
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Tag :हास्य कविता
  March 25, 2012, 6:59 pm
पुत्र ने पिता से पूछा,पापा मुनाफा किसे कहते हैं?पिता ने सरलता से कहा,कोई बस्तु कम कीमत का होऔर अधिक मूल्य में बीक जाता है तो जो अतिरिक्त धन प्राप्त होता हैवही मुनाफा है.पुत्र ने कहा,तब तो मुझे मुनाफा कमाना आ गया असल में चौकीदार को आपका जूता भा गया कल आप मम्मी पर जूते को ले...
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  August 28, 2011, 11:51 am
शर्मा जी आधुनिकता का मजाक उड़ा रहे थे.आँखे गोल-गोल नचा रहे थे तभी फोन घनघना गया भरी मीटिंग को एक कॉल खा गया फोन उठते हीं मिसेज शर्मा ने नमस्कार किया अनमने ढंग से शर्मा जी ने नमस्कार सिव्कार किया पत्नी का एक तुगलकी फरमान आया था शाम में बच्चों को घुमाने ले जाना है,याद कराया...
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Tag :Arshad Ali
  April 29, 2011, 7:51 pm
एक विनय जीवन देने की माँ तुमसे है ध्यान धरोस्त्री भुर्ण हूँ मारी जाउंगी थोडा मुझपर दया करो संवेदनाओं को झंझोड़ देने वाली ये याचना अभी भी हो रही है...और अभी भी मानवता की हत्याएं निरंतर है एक संवाद उस माँ से जो इस हत्या में शामिल थी (पुर्णतः या अंशतः )माँ राह तुमने हीं खो दिय...
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Tag :
  April 9, 2011, 7:58 pm
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