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मनोज : View Blog Posts
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मनोज

हे छट्ठी मैय्या,प्रणाम !तब, सज गया सब घाट-बाट? कैसा लग रहा है इस बार हमारे बिना? हम भी आपही की तरह साल में एक ही बार आते थे। कभी-कभी तो कनफ़्युज हो जाते थे कि हमरे माता-पिता, सखा-संगी, अरिजन-परिजन आपकी प्रतीक्षा करते हैं या हमारी। वैसे बात तो एक्कहि है... हमारे आने पर आप आती थी या ...
Tag :छ्ठ पर्व
  October 26, 2017, 12:13 pm
मनोज कुमारआज संसार में हर व्यक्ति किसी न किसी दुख-दर्द से ग्रसित है। रोज़ी-रोटी की चिंता में लोग इस कदर व्यस्त है कि हंसना ही भूल गए हैं। हंसी को दुनिया की सबसे कारगर दवाई माना जाता है। दिल-खोलकर मस्ती बिखेरने वाली हंसी, कष्टों को विदा करने की अचूक दवा है। और खूबी की बात य...
Tag :
  July 1, 2017, 6:00 am
प्रश्न पूछो दिवसमनोज कुमारआज अंतरराष्ट्रीय प्रश्न पूछो दिवस (International Ask a Question Day) है। इसका लक्ष्य लोगों को अधिक और बेहतर प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित करना है,ताकि वो मिलने वाले उत्तर से लभान्वित हो सकें।एरिक हाफरका कहना था, “भाषा की खोज प्रश्न पूछने के लिये की गयी थी। उत्तर त...
Tag :
  March 14, 2017, 11:40 am
अभिव्यक्ति ...!मनोज कुमारमहत्वपूर्ण यह नहीं किज़िन्दगी में आप कितने ख़ुश हैं, बल्कि यह महत्वपूर्ण है कि आपकी वजह से कितने लोगख़ुश हैं।वास्तव में कुछ लोगों की कुछ खास बातें, उनकी कुछ खासअदाएं, उनकी अभिव्यक्ति के कुछ खास अंदाज हमें भरपूर खुशी देते हैं, वहीं कुछ लोगों के हा...
Tag :
  March 11, 2017, 10:05 pm
अहंकारमनोज कुमारतुलसीदास जीके मानसमें कहा गया है, ‘अहंकार अति दुखद डमरुआ’यानी अहंकार अत्यंत दुख देने वाला डमरुआ (गठिया) रोग है। स्वाभिमान और आत्मसम्मान के नाम पर झूठ-मूठ का अहंकार जगाना बहुतों की आदत होती है।इसको झूठी शान भी कह सकते हैं। यह झूठी शान, और इसका दिखावा क्...
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  September 9, 2016, 10:00 pm
आत्मविश्वासकालिदासने कुमारसंभवममें कहा है, ‘प्रायः प्रत्ययमाधत्ते स्वगुणेषूमादरः’अर्थात्‌ बड़े लोगों से प्राप्त सम्मान अपने गुणों में विश्वास उत्पन्न कर देता है। ऐसे लोग वही कहते हैं जो जयशंकर प्रसादजी ने चन्द्रगुप्तमें कहा है, “अतीत की सुखों के लिए सोच क्यों, ...
Tag :
  October 27, 2015, 7:18 am
रंगारंग फ़ागुन में...- करण समस्तीपुरीसूना मोरा देस रंगारंग फ़ागुन में।पिया बसे परदेस रंगारंग फ़ागुन में॥छत पर कुजरे काग, कबूतर, कोयलिया,ले जाओ संदेश, रंगारंग फ़ागुन में॥ फ़ूले सरसों गदराया महुआ का तन।बौरी अमराई में भँवरों का गुंजन॥पहिर चुनरिया धानी धरती अँगराईले दुल्ह...
Tag :कविता
  March 2, 2015, 6:47 pm
फ़ुरसत में ... 122मोती की याद!मनोज कुमारपशु-पक्षियों की भी अपनी भाषा होती है। उनका भी अपना एक संप्रेषण सिद्धान्त होता ही होगा। जब संप्रेषण होगा, तो नामकरण भी वे कर ही लेते होंगे। वैसे तो प्रकृति द्वारा ये जीव स्वतंत्र विचरण और स्वच्छंद जीवन के लिए रचे गए हैं, लेकिन हम मनुष्य...
Tag :
  February 22, 2015, 7:42 pm
कैसा विकास है...?-    करण समस्तीपुरीकैसा विकास है, ये कैसा विकास है?सूखा-सा सावन है, जलता मधुमास है।कैसा विकास है, ये कैसा विकास है??मंगल पर जा बैठे, मँगली को मारते।सरेआम देवियों की इज्जत उतारते।पाकेट में इंटरनेट, घर में उपवास है।कैसा विकास है, ये कैसा विकास है??मानवत...
Tag :कविता
  February 11, 2015, 11:44 am
फ़ुरसत में ... 121निराशा ही निराशामनोज कुमारकभी-कभी मेरे दिल में ख़्याल आता है कि मैं निराशावादी होता जा रहा हूं। मुझे पता है कि निराशा बड़ी ख़तरनाक़ चीज़ है। फिर भी, मैं समाज, देश, परिवार के लिए कतई ख़तरनाक़ नहीं हूं। यह बात मुझे संतोष प्रदान करती है। जो आशावादी होते हैं, वे भी तो कभ...
Tag :
  November 22, 2014, 9:10 am
गांधी जयंती और स्वच्छता अभियान 1886गांधी जी तब सत्ताइस वर्ष के थे। उन्हें पता लगा कि बम्बई (मुंबई) में ब्यूबोनिक प्लेग की महामारी फूट पड़ी। चारों तरफ़ घबराहट फैल गई। पूरे पश्चिम भारत में आतंक छा गया। जब बम्बई में प्लेग फैला तो राजकोट में भी खलबली मच गई। यह आवश्यक हो गया कि...
Tag :
  October 2, 2014, 6:00 am
फ़ुरसत में – 120शब्दनिर्मित्तं किंचिदाश्रित्य खलु शब्दः प्रवर्तते।यतो वाचो निवर्तन्ते निमित्तानामभावतः॥निर्विशेषे परानन्दे कथं शब्दः प्रवर्तते।(कठरुद्रोपनिषद्‌)अर्थात्‌ शब्द की प्रवृत्ति किसी निमित्त को लेकर होती है। परम तत्त्व में निमित्त का अभाव होने से वाण...
Tag :
  September 27, 2014, 10:42 am
रामधारी सिंह ‘दिनकर’जन्म : रामधारी सिंह दिनकर का जन्म बिहार के मुंगेर (अब बेगूसराय) ज़िले के सिमरिया गांव में बाबू रवि सिंह के घर 23 सितम्बर 1908 को हुआ था।शिक्षाऔर कार्यक्षेत्र : ढाई वर्ष की उम्र में पिता जी का देहांत हो गया। गांव से लोअर प्राइमरी कर मोकामा से मैट्रिक किया।...
Tag :
  September 23, 2014, 7:58 am
गांधी और गांधीवाद-159सत्याग्रह का आंदोलन फिर से …1913शादियां अवैध घोषित कर दी गईउधर जनरल स्मट्स के धोखे से भारतवासियों का रोष बढ़ रहा था। इस बीच उच्चतम न्यायालय के बाई मरियम के एक मुकदमे के फैसले ने आग में घी का काम किया। इस घटना ने स्त्रियों को भी लड़ाई में शामिल कर लेने का म...
Tag :गांधी
  September 22, 2014, 6:00 am
बादल- करण समस्तीपुरी१.भर अंबर मेंरोर मचाएप्यासी वसुधाको तरसाएचमक-दमक केआश जगाएना बरसाए जलओ छलिया बादल। २.गई जेठ कीतप्त दुपहरीसावन रीता बिन हरियरीकाना, हस्तीगए स्वातीचले न अब तक हलओ बेसुध बादल।३.भादों भद्रा गई किसानीका वर्षा जबकृषी सुखानीफटा कलेजारोए धरतीखेत रह...
Tag :कविता
  September 2, 2014, 9:30 am
फ़ुरसत में ... 119नैना मिलाइकेकिसी ने क्या ख़ूब कहा है - जिसकी प्यास एक सुराही से न बुझे वह लाख दरिया को चूमे प्यासा का प्यासा ही रह जाएगा। अब ये बात कहने वाले ने किस सन्दर्भ में कही उसे जाने दीजिये, हमारे सरकारी दफ़्तरों के मामले में तो यह बात कुछ ज़्यादा ही माक़ूल साबित होती है।...
Tag :मनोज कुमार
  August 2, 2014, 2:12 pm
चींटी           (एक लंबी कविता)चींटियों को भी हो जाता मौत के पहले ही एहसास अब उनकी आयु पहुंच गई है खतम होने के आस-पास उस समय जगती है उनकी भीतरी प्रेरणा कि ज़िन्दगी के दिन बचे हैं अब बहुत थोड़े से हो जाती हैं आमादा वे करने को काम और भी भारी यानी चींटियां उम्र के अन...
Tag :कविता
  July 23, 2014, 6:00 am
फ़ुरसत में ... 118 फ़ुरसत से ...!मनोज कुमारमहत्वपूर्ण यह नहीं कि ज़िन्दगी में आप कितने ख़ुश हैं, बल्कि यह महत्वपूर्ण है कि आपकी वजह से कितने लोग ख़ुश हैं।वास्तव में कुछ लोगों की कुछ खास बातें, उनकी कुछ खास अदाएं, उनके कुछ खास अंदाज हमें भरपूर खुशी देते हैं, वहीं कुछ लोगों के हाव-भाव, ...
Tag :
  July 19, 2014, 6:00 am
नमस्कार !अनायास कुछ तुकबंदी हो गई। एक मित्र को सुनाया तो उन्होंने कहा, "वाह मियाँ ! अब रुबाइयाँ भी लिखने लगे हो।"कुछ और लिख लिया। कभी अकेले में खुद ही गुनगुना भी लेता हूँ। सोचा कि आप से शेयर कर लूँ तो कुछ बात बने! तो पेश-ए-खिदमत है मेरे मुक्तक। मैं दरिया हूँ समंदर की लहर को ...
Tag :काव्य-प्रसून
  May 30, 2014, 6:20 pm
नमस्कार !अनायास कुछ तुकबंदी हो गई। एक मित्र को सुनाया तो उन्होंने कहा, "वाह मियाँ ! अब रुबाइयाँ भी लिखने लगे हो।"कुछ और लिख लिया। कभी अकेले में खुद ही गुनगुना भी लेता हूँ। सोचा कि आप से शेयर कर लूँ तो कुछ बात बने! तो पेश-ए-खिदमत है मेरी रुबाइयाँ। मैं दरिया हूँ समंदर की लहर ...
Tag :काव्य-प्रसून
  May 30, 2014, 6:20 pm
गांधी और गांधीवाद-1581913सत्याग्रह फिर आरम्भसत्याग्रह आंदोलन में काफ़ी सूक्ष्म विचार से काम लिया जा रहा था। नीति के विरुद्ध कोई भी क़दम न उठाया जाए इस पर विशेष ध्यान रखा जाता था। जैसे ख़ूनी क़ानून केवल ट्रांसवाल के भारतीयों पर लागू किया गया था, तो इस आंदोलन में केवल ट्रांसवाल...
Tag :
  May 18, 2014, 7:57 pm
काम करती मां--- --- मनोज कुमारजब मां आटा गूंथती थीतो सिर्फ अपने लिए ही नहीं गूंथती थी,सबके लिए गूंथती थी,झींगुर दास के लिए भी !  मां जब झाड़ू देती थीतो सिर्फ घर आंगन ही नहीं बुहारती थीओसारा, दालान औरझींगुर दास का प्रवास क्षेत्र भी बुहार देती थी।  मां जब बर्तन धोती थी तो सि...
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  May 11, 2014, 12:22 pm
खंजन - लगातार दुम ऊपर-नीचे हिलाते रहने वाला पक्षीअंग्रेज़ी में नाम :White Wagtailवैज्ञानिक नाम :Motacilla alba{L. motacilla, a wagtail,-cilla, hair, alba : L. albus, white.}स्थानीय नाम : हिंदी में इसे धोबन भी कहा जाता है। पंजाब में इसे बालकटारा, बांग्ला में खंजन, आसाम में बालीमाटी और तिपोसी और मलयालम में वेल्ला वलकुलुक्की कह...
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  May 6, 2014, 9:09 pm
गांधी और गांधीवाद-1571912 गोखले की दक्षिण अफ़्रीका की यात्रादक्षिण अफ़्रीका के आंदोलन की गूंज भारत तक पहुंची। भारत में ‘वायसरीगल काउंसिल के ऑफ इंडिया’ के गोपालकृष्ण गोखले ने रंगभेद के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ बुलंद की थी। भारत और इंग्लैंड दोनों ही देशों में गोखले जी को अत्यंत सम्म...
Tag :
  April 26, 2014, 12:44 pm
महालट - पारिवारिक वार्तालाप करने वाला पक्षीअंग्रेज़ी में नाम : Indian Treepie or Rufous Treepieवैज्ञानिक नाम : डेंड्रोसिट्टा वेगाबंडा (Dendrocitta vagabunda)Dendron : a tree, kitta : the magpieVagabunda : vagabond, wanderingस्थानीय नाम : इस खूबसूरत और आकर्षक पक्षी को हिंदी में महालटऔर उर्दू में महताबकहा जाता है। पंजाब में लोग इसे लगोजाऔर बंग...
Tag :
  April 18, 2014, 8:12 pm
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