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हमदम

उदयपुर नाम का एक राज्य था। राजा रत्नेश का शासन चल रहा था। वे बड़े लापरवाह और कठोर प्रकृति के थे। राज्य में निर्धनता आसमान को छू रही थी। प्रजा रत्नेश का आदर-सम्मान करना भूल चुकी थी। राजा को प्रणाम-नमस्कार किए बिना लोग अपना मुख मोड़ लेते थे। प्रजा के व्यवहार से रत्नेश स...
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Tag :राजा बदल गया
  April 15, 2016, 5:02 pm
एक बार दो राज्यों के बीच युद्ध कीतैयारियां चल रही थीं। दोनों के शासक एक प्रसिद्ध संत के भक्त थे। वेअपनी-अपनी विजय का आशीर्वाद मांगने के लिए अलग-अलग समय पर उनके पास पहुंचे।पहले शासक को आशीर्वाद देते हुए संत बोले, ‘तुम्हारी विजय निश्चित है।’दूसरेशासक को उन्होंने कहा, ...
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Tag :भाग्य और पुरुषार्थ
  January 12, 2014, 3:31 pm
एक मछुआरा था । उस दिनसुबह से शाम तक नदी में जाल डालकर मछलियाँ पकड़ने की कोशिश करता रहा , लेकिन एक भी मछली जाल में न फँसी ।जैसे -जैसे सूरज डूबने लगा , उसकी निराशा गहरी होती गयी । भगवान का नाम लेकर उसने एक बार और जाल डाला पर इस बार भी वह असफल रहा ,पर एक वजनी पोटली उसके जाल में...
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Tag :प्रकृति और प्रारब्ध
  June 8, 2013, 11:01 am
राजा भोज वन में शिकार करने गए लेकिनघूमते हुए अपने सैनिकों से बिछुड़ गए और अकेले पड़ गए। वह एक वृक्ष के नीचेबैठकर सुस्ताने लगे। तभी उनके सामने से एक लकड़हारा सिर पर बोझा उठाएगुजरा। वह अपनी धुन में मस्त था। उसने राजा भोज को देखा पर प्रणाम करना तोदूर, तुरंत मुंह फेरकर जा...
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Tag :मन का राजा
  March 3, 2013, 2:42 pm
एक किसान बहुत बूढ़ा होने के कारण खेतों में काम नहीं कर सकता था।  वह सारा दिन खेत के किनारे पेड़ की छाँव में बैठा रहता|  उसका बेटा खेत में काम करता रहता और रह-रह के सोचता कि  उसके पिता का जीवन अब व्यर्थ है क्योंकि वह कोई काम करने लायक नहीं रहे।  यह सोच-सोच कर उसका बेटा एक द...
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Tag :ताबूत
  August 1, 2012, 4:06 pm
पर्वतरोहियों का एक दल एक अजेय पर्वत पर विजय पाने के लिए निकला। उनमें एक अतिउत्साही पर्वतरोही भी था , जो यह चाहता था कि पर्वत के शिखर पर विजय पताका फ़हराने का श्रेय उसे ही मिले । रात के घने अंधेरे में वह अपने तम्बू से चुपके से निकल पड़ा और अकेले ही उसने पर्वत पर चढ़ना आरंभ क...
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Tag :पर्वतरोही
  July 2, 2012, 4:11 pm
एक ऋषि अपने आश्रम के बाहर टहल रहे  थे l उन्होंने देखा कि एक काली सी भया कृति वहां चली आ रही है। ऋषि  ने उसे रोका और पूछा, कौन हो तुम? वह बोली, मुनिवर मैं मौत हूं। यह सुनकर ऋषि हैरानी से बोले, तुम्हें अचानक इस गांव में आने की क्या जरूरत पड़ गई?मौत बोली, मुनिवर मैं कभी भी बिना बुल...
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Tag :बोधकथा
  June 3, 2012, 1:55 pm
एक शिकारी प्रतिदिन शिकार करने जंगल जाया करता था . एक दिन उसे कोई शिकार नहीं मिला और वह थक हार कर पेड़ के निचे बैठ गया . तभी उसकी नज़र पेड़ पर बैठी चिड़िया पर गयी . शिकारी ने तुरंत जाल फेंक कर चिड़िया को पकड़ लिया . चिड़िया के बहुत कहने पर भी शिकारी ने चिड़िया को नहीं छोड़ा . कुछ देर श...
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Tag :बोधकथा
  April 22, 2012, 2:20 pm
 एक शिकारी रोज जंगल जाकर पशु - पक्षियों का शिकार करता था।एक दिन उसे बहुत भटकने के बाद भी शिकार नहीं मिला।थककर वह एक पेड़ के निचे बैठ गया।पेड़ पर उसे चिड़िया बैठी दिखाई दी। उसने खुश होकर चिड़िया पर निशाना साधा तो चिड़िया बोली - भाई , मुझे मत मारो।यदि तुम मुझे छोड़ दो तो मैं तु...
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Tag :लालच में आकर शिकारी को अपनी जान गंवानी पड़ी
  June 26, 2011, 3:09 pm
रामगढ़ के राजा ने रूपल नामक व्यक्ति की बुद्धिमानी की चर्चा सुनकर उसे अपना मंत्री नियुक्त किया । रूपल निष्ठा व चतुराई से अपना कार्य करने लगा । एक दिन राजा के मन में विचार आया की रूपल की बुद्धिमता की परीक्षा लेनी चाहिए । उन्होंने रूपल को राजभवन में बुलाया और उसके सामने भ...
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Tag :बोधकथा
  June 5, 2011, 4:48 pm
एक राजा को पक्षी पालने का शौक था। अपने पाले पक्षिओ में एक बाज उन्हें इतना प्रिय था कि उसे वे अपने हाथ पर बिठाए रहते और कही जाते तो साथ ही ले जाते थे। एक बार राजा वन में आखेट करने गए। उनका घोड़ा दुसरे साथियों से आगे निकल गया। राजा वन में भटक गए। उन्हें बहुत प्यास लगी थी।घूम...
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Tag :क्रोध में राजा ने अपने हितैषी को खो दिया
  May 15, 2011, 3:04 pm
एक रात एक आदमी ने एक सपना देखा ।  उसने सपने में देखा कि वह और भगवान समुद्र तट पर साथ-साथ टहल रहे हैं ।  आकाश में उसकी बीती जिंद़गी के दृश्य चलचित्र की तरह चल रहे थे ।  उसने देखा कि उसकी जिंद़गी के हर पल में रेत में दो जोड़ी पैरों के निशान थे, एक उसके पैरों के और दूसरे भगवान ...
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Tag :बोधकथा
  April 15, 2011, 7:38 pm
एक महात्मा थे। उनकी तपस्या का यह प्रभाव था कि हिंसक हिंसा को भूल गये। शेर और बकरी, सर्प और मेढ़क अपने जन्मजात वैर को भूल गये। उनकी तपस्या से इन्द्र का आसन डोलने लगा। इन्द्र ने अपने ज्ञान से देखा कि अब उसका पद टिक नहीं सकेगा। वहएक बटोही के रुप में महात्मा के आश्रम में आया...
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Tag :बोधकथा
  April 5, 2011, 5:03 pm
एक मच्छीमार जाल लेकर नदी पर गया। उसने नदी में जाल फैलाया और किनारे पर बैठ गया। सन्धया के समय जब उसने जाल निकाला तो जाल में मछलियों केसाथ केकड़े भी थे। उसके पास दो टोकरियां थीं। उसने एक टोकरी में मछलियां भर कर उस पर ढक्कन लगा दिया और दूसरी टोकरी में केकड़े भर कर उसे खुला ...
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Tag :स्वाभाव का नतीजा
  March 25, 2011, 4:34 pm
एक गाँव में एक फकीर आए। वे किसी की भी समस्या दूर कर सकते हैं। सभी लोग जल्दी से जल्दी अपनी समस्या फकीर को बताकर उपाय जानना चाहते थे। नतीजा यह हुआ कि हर कोई बोलने लगा और किसी को कुछ समझ में नहीं आया। अचानक फकीर चिल्लाए. ‘खामोश’। सब चुप हो गए। फकीर ने कहा, “मैं सबकी समस्या दू...
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Tag :बोधकथा
  March 14, 2011, 1:52 pm
एकबोधकथाजीवनमेंजबसबकुछएकसाथऔरजल्दी - जल्दीकरनेकीइच्छाहोतीहै , सबकुछतेजी सेपालेनेकीइच्छाहोतीहै , औरहमेंलगनेलगताहैकिदिनकेचौबीसघंटेभीकम पड़तेहैं , उससमययेबोधकथा , " काँचकीबरनीऔरदोकपचाय " हमेंयादआती है।दर्शनशास्त्रकेएकप्रोफ़ेसरकक्षामेंआयेऔरउन्होंन...
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Tag :काँच की बरनी और दो कप चाय
  March 7, 2011, 10:46 am

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Tag :
  January 1, 1970, 5:30 am
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