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लेखनी...

आहट पे तुम्हारी,पलकें बिछीं हैं हमारी,पथराई आँखें,प्रतीक्षा तुम्हारी.               पलकों की कालीन बिछी है              कमरे की हर चीज़ सजी है              गुलदस्ते की आँखें कहतीं               रेतीली आशाएं सारी.              पथराई आँखें,               प्रतीक्षा तुम्हारी. नाखूनों से ज़मीं कुरचतेअ...
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महफूज़ अली
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  January 28, 2013, 10:38 am
आज इस साल की पहली ब्लॉग पोस्ट पोस्ट करने का टाइम काफी दिनों के बाद मिला है। पिछले कई महीनों से मैं हिंदी साहित्य और हिंदुस्तानी फ़िलौसोफ़ि (दर्शन) का अध्ययन कर रहा हूँ। मेरे यह नहीं समझ आता कि हमारा हिंदी साहित्य इतना समृद्ध है फिर भी इसकी मांग क्यूँ नहीं है? हम सिर्फ ब...
लेखनी......
महफूज़ अली
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  January 15, 2013, 6:26 pm
(फोटो हैज़ नथिंग टू  डू विद द पोस्ट)एक कविता -----पिछला हफ्ता मैंने नाखूनों की तरह काटकर कचरे के ढेर में फ़ेंक दिया है। मगर दिन में भी नाखूनों की तरह रिजैनेरेटिव पावर होता है पुनः दिन उँगलियों में नाखूनों की तरह उगने लगा है।नाखून की मीनारों में मैल भरने लगा है ...धीरे धीर...
लेखनी......
महफूज़ अली
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  December 18, 2012, 8:30 pm
पेश है मेरी एक अंग्रेजी कविता से प्रेरित यह कविता :यह उन दिनों की बात है जब मेरा बचपन पिता की ढीली होती हुई पकड़ का गवाह हो रहा था। समझ की उम्र के साथ मैंने यह जाना कि माँ का सिर्फ सरनेम बदला है मगर पिता पूरी तरह बदल गए हैं। फिर मैं लड़ाई की उम्र में आ गया वर्षों तक लड़ने...
लेखनी......
महफूज़ अली
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  December 10, 2012, 8:27 pm
धीरे धीरेमैंने उसके भीतर सुख उंडेलने की शुरुआत की और उसकी पलकों के नीचे और ऊपर की चमड़ी झुर्रियाने लगी आँख बंद होती चली गयीं,होंठ सीटियाँ बजाने लगे ... मैं रिसने को बेचैन अपनी गति बढाने जा रहा था।गति बढती है तो कसाव निर्मम हो जाता है और आदमी भीतर की घुटन बाहर धकेल कर ...
लेखनी......
महफूज़ अली
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  November 20, 2012, 9:37 pm
आजकल मेरे पास इतना टाइम नहीं होता कि ब्लॉग पोस्ट लिखूं या फिर ब्लॉग पर भूमिकाएं लिखूं ... एक चीज़ और है जो कि  समझ भी आ गयी कि  ब्लॉग और फेसबुकिंग तभी हो पाती है जब आप निरे निठल्ले, बेरोजगार और बिना किसी एम्बिशन के होते हैं और ऐम्लेसली ज़िन्दगी ढो  रहे होते हैं। अब तो मुझे य...
लेखनी......
महफूज़ अली
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  November 11, 2012, 3:46 pm
आजकोई यहाँ वहां की भूमिका लिखने का मन नहीं है। टॉपिक तो कई हैं दिमाग में मगर लिखने का मन नहीं कर रहा है ... और ना ही किसी कोतानेमारने का मन है ... और ना ही किसी की बेईज्ज़तीकरने का मन है। आज सिम्पली एक कविता है मगर बिना मेरी कोई फोटो के .... आजकल मैं फोटो नहीं खिंचवा रहा हूँ क्यूं...
लेखनी......
महफूज़ अली
Tag :
  October 29, 2012, 7:21 pm
मुझे आजकल ख़ुद के बारे में ऐसे लगता है कि मैं एक फिनिक्स पक्षी हूँ जो अपनी राख से ज़िंदा हो जाता है. इसे एक झूठा घमंड भी कह सकते हैं मगर यह घमंड आजकल मुझ पर ज़्यादा ही हावी है, सुपिरियरीटी कॉम्प्लेक्स शायद किसी सायकोलौजिकल प्रॉब्लम की वजह से चादर की तरह ओढा हुआ हूँ. बहुत ...
लेखनी......
महफूज़ अली
Tag :दंगा
  October 8, 2012, 9:53 am
कहा जाता है कि घर में हमेशा कोई जानवर पालना चाहिए... इससे घर की सारी बलाएँ दूर रहतीं हैं... हमारे बड़े बुजुर्गों ने कुछ चीज़ें तो अनुभव कर के ही कही होंगी.. यह हमारे सबसे प्यारे कुत्ते स्व. श्री जैंगो जी की हैं. आपकी यह तस्वीर तबकी है (ड्रिप चढ़ते हुए) जब आप बीमार हो कर हॉस्पिट...
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महफूज़ अली
Tag :
  September 9, 2012, 4:40 pm
हर मर्द के ज़िन्दगी में माँ का होना बड़ा ज़रूरी होता हैक्यूंकि एक माँ ही होती है जो बच्चे को समझती है. मेरी माँ कहतीं थीं  हमें जाहिलों के मुँह नहीं लगना चाहिए... यह सोचते और पढ़ते  कुछ और हैं और समझते कुछ और हैं... जाहिल आदमी बहस ज़्यादा करता है जबकि समझदार आदमी कन्फ्यूज़ ...
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महफूज़ अली
Tag :महफूज़
  July 25, 2012, 12:19 pm
अभी लौटा हूँ गोरखपुरसे तो रस्ते में कविता लिखी. अच्छा ट्रेन एक ऐसी जगह है जहाँ आपके साथ वेरायटीज़ ऑफ़ घटनाएँ घटती रहतीं हैं. आज हुआ क्या कि हमने देखा कि पैसे में बहुत बड़ी ताक़त होती है ...हम हमेशा जनरल का टिकट लेते हैं पर बैठते  ए.सी. में ही हैं... आज जिस आदमी की आर.ए.सी. कन्फर...
लेखनी......
महफूज़ अली
Tag :
  July 16, 2012, 12:37 am
आज मैंने फेसबुक पर सुश्री डॉ. शरद सिंहजी की एक पोस्ट से इंस्पायर्ड एक अपनी सोच के हिसाब से स्टेटस डाला कि "लोग कहते हैं कि मन की सुन्दरता देखो, लेकिन मन की सुन्दरता जैसी कोई चीज़ है ही नहीं. हम सबसे पहले बाहरी सुन्दरता ही देखते हैं. और जब हमारा कम्युनिकेशन इस्टैबलिश हो ...
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महफूज़ अली
Tag :महफूज़
  June 27, 2012, 9:24 pm
लखनऊ के इतिहासके पिछले और पहले श्रृंखला में आपने लखनऊ का शुरूआती इतिहास जाना. अब इस श्रृंखला को आगे बढ़ाते हैं. लखनऊ के इतिहास की श्रृंखला देरी से आने का कारण समय की कमी है. कोशिश रहेगी कि टाइम टू टाइम यह सीरीज़ जारी रहे. हमारा लखनऊ बनारस के बाद दुनिया का सबसे नोन और पुरा...
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महफूज़ अली
Tag :mahfooz
  June 26, 2012, 8:04 pm
आज मेरे कुछ फेवरिट पोस्ट्स ... की बात हो जाये। इन पोस्ट्स ने आज मेड माय डे.... दरअसल आज मेरे पास कुछ लिखने को नहीं था और मन बहुत कर रहा था कुछ लिखने को... तो सुनीता दी की पोस्ट ने आज रुला दिया। तो यही सोचा की क्यूँ न आज जो पोस्ट्स पढ़ीं उन्हें रिशेयर कर दिया जाए.. कुछ अपने अंदाज़ म...
लेखनी......
महफूज़ अली
Tag :महफूज़
  June 23, 2012, 10:11 pm
आज कोई भूमिकाया यहाँ वहां की बातें (बेकार की) लिखने का मन नहीं है. और इतिहास सीरीज भी टाईप  नहीं हुईहै, रीना छुट्टी पर है और अपने पास टाइम नहीं है टाईप करने का। आज देखिये सीधे मेरी एक कविता। बहुत पहले लिखी थी और पोस्ट अब कर रहा हूँ। आज कोई फ़ोटो(ज़) भी नहीं है, कंप्यूटर की हा...
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महफूज़ अली
Tag :महफूज़
  June 17, 2012, 9:16 pm
आज से मैं लखनऊ का अनदेखा और अनजाना इतिहास पेश कर रहा हूँ. यह इतिहास मैंने नहीं लिखा है और ना ही मेरा इसे लिखने में कोई ऐसा योगदान है. यह वो इतिहास है जिसे हम जानते तो हैं लेकिन सिर्फ नाम से. लखनऊ वो शहर है जो पूरी दुनिया में सिर्फ और सिर्फ अपनी तहज़ीब और बाग़ों के लिएजाना जा...
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महफूज़ अली
Tag :भगवान् राम
  June 14, 2012, 6:50 pm
मैं थोडा आजकल परेशान चल रहा हूँ. मेरी परेशानी यह है कि मेरे समझ में नहीं आ रहा है कि मैं अपने नाम के साथ डॉ. लगाऊं या नहीं? आख़िर पी.एच.डी. किये हुए आठ साल हो गए हैं. और ऑफिशियली डॉ. लगाना पड़ता है. अगर डॉ. लगाता हूँ तो मेरा बचपना ख़त्म हो जायेगा जो कि मैं चाहता नहीं हूँ. मुझे बह...
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महफूज़ अली
Tag :
  June 12, 2012, 9:19 pm
पिछले चार पांच दिनोंसे मन बहुत  अजीब हो रहा था. सब कुछ अच्छा होते हुए भी अच्छा नहीं लग रहा था. एक तो आजकल ज़्यादातर वक़्त गोरखपुर में बीतता है दूसरा गोरखपुर में इन्टरनेट कनेक्शन नहीं रहता है. और फिर बिज़ी इतना कि मोबाइल फोन तक का ध्यान नहीं रहता है (बीते हुए वक़्त को दोबा...
लेखनी......
महफूज़ अली
Tag :I love you
  June 11, 2012, 12:38 am
ब्लॉग लिखने के लिए अलग से टाइम निकालना पड़ता है. मैं रोज़ सोचता हूँ कि कुछ ना कुछ लिखूंगा लेकिन टाइम नहीं मिल पाता है. जब हमें वक़्त का नुक्सान बिना किसी मतलब में हो जाता है तो  उस बीते हुए पल की भरपाई बहुत मुश्किल से हो पाती है. और खासकर तब जब आप स्वाभिमान और अभिमान की वजह ...
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महफूज़ अली
Tag :कौवा
  June 6, 2012, 2:28 pm
काफी दिनों (दस दिनों के बाद) के बाद नेट पर आना हुआ है. वजह बहुत सिंपल सी थी कि मैं अपने अकैडमिक कौन्फेरेंस के लिए बाहर था और नेट के एक्सेस में नहीं था और इंटरनेश्नल रोमिंग की सुविधा मेरे मोबाइल में नहीं थी. लौट कर आया तो दिल्ली से सीधे अपने गृह नगर गोरखपुर चला गया वहां भी ...
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महफूज़ अली
Tag :चेयरमैन
  May 20, 2012, 5:51 pm
मैं फेसबुक पर देखताहूँ कि कई लोगों ने देशभक्ति का ठेका ऐसे ले लिया है कि बाक़ी लोग उन लोगों के सिवाय कोई देशभक्त हैं ही नहीं. इन लोगों को पता नहीं कि ऐसे फेसबुक पर लिखने से देश और धर्म में कोई बदलाव नहीं आता उल्टा बेवकूफोंकी इमेज बनती है. देश सेवा समाज में और समाज के लिए अ...
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महफूज़ अली
Tag :महफूज़ और तुम
  May 8, 2012, 7:51 pm
आज हमारेघर मशहूर शायर फार्रूक जायसीसाहब का आना हुआ. फार्रूक साहब एक्साइज़ कमिशनर भी हैं और शायरी का शौक़ भी रखते हैं और अक्सर मशहूर ग़ज़ल गायक प्रदीप श्रीवास्तव के साथ मंच साझा भी करते हैं. फारूक साहब की ग़ज़लों को दुनिया भर में काफी लोगों ने लयबद्ध किया है. हालांकि! म...
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महफूज़ अली
Tag :फारूक साहब
  May 3, 2012, 9:04 pm
शब्दों कीसत्ता का कोई भले ही अस्तित्व ना हो लेकिन रचनाकार अपने लेखन से एक और (लेकिन) अलग संसार का निर्माण करता है कुछ ऐसा ही लेखन सुपरिचित कवयित्री और ब्लॉगर अंजू अनु चौधरीका है.(God gifted beauty with brain)अंजू द्वारा रचित किताब "क्षितिजा" कई सारे अनूठे रंगों का संगम है. जैसी निरंतरता ...
लेखनी......
महफूज़ अली
Tag :महफूज़ क्षितीजा
  April 28, 2012, 4:26 pm
आज एकछोटा सा हादसा हुआ. हुआ क्या कि मैं गोमतीनगर से सी.एम.एस. स्कूल के रास्ते  हज़रतगंज  जा रहा था कि विपुल खंड के मोड़ पर एक बुज़ुर्ग साहब के स्कूटी को मैंने टक्कर मार दी हालांकि टक्कर हलकी थी फ़िर भी वो बुज़ुर्ग बगल में खुदी सड़क के किनारे बने गड्ढे में जा गिरे. मैं फ़ौर...
लेखनी......
महफूज़ अली
Tag :महफूज़
  April 14, 2012, 7:18 pm
मैं कभी आरक्षण विरोधी नहीं रहा. आजकल हमारे उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार में बहुत से ऐसी जातियों को जो पहले ओ.बी.सी. में आतीं थीं अब उनको जातियों को एस.सी. में डाला जा रहा है. मैंने देखा है कि रिज़र्वेशन सिस्टम जो है वो कुछ करता नहीं है सिवाय कुछ काबिल लोगों म...
लेखनी......
महफूज़ अली
Tag :सिर्फ तुम
  April 10, 2012, 10:33 pm
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  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
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