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मनसा वाचा कर्मणा

                                           ॐ                           अद्धैतामृतवर्षिणीम्     भगवतीमष्टादशाध्यायिनीम्                      अम्ब  त्वामनुसंदधामि  भगवद्गीते    भवद्वेषनीम्   l अद्धैत का अमृत बरसाने व...
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Tag :प्रथम अध्याय अर्जुन विषाद योग.
  July 1, 2017, 12:01 am
ऊँ ...........................    ऊँ ...........................  ऊँ ...........................     ऊँ   सहनाववतु     l    सहनौभुनक्तुसहवीर्यं करवावहै   l    तेजस्विनावधीतमस्तु मा  विद्धिषावहै  l lअखण्डमंडलाकारं  व्याप्तं येन चराचरम्  lतत्पदं दर्शितं  येन  तस्मै श्री  गुरवे  नम:  l lऊँ  पार्...
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Tag :negativity
  April 27, 2014, 8:07 am
मेरा ब्लॉग  पर  पूरे एक वर्ष  के  पश्चात आना  हो पा रहा  है. इस बीच कई महत्वपूर्ण  घटनाएं   घटित हुईं. मेरे  स्वास्थ्य  में  उतार चढाव  होते रहने  के साथ साथ ही मेरे  ससुर जी  का देहांत  मार्च  २०१३ में हो गया. मेरी पत्नी उनकी एक मात्र  संत...
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Tag :नववर्ष
  January 1, 2014, 9:23 am
मुझे बहुत ही हार्दिक संतोष और  प्रसन्नता मिली कि मेरी स्वस्थता के लिए आप सभी सुधि जनों नेमुझे   शुभकामनाएँ दी. इसके लिए मैं आप सभी का दिल से आभारी हूँ और हृदय से कामनाकरता हूँ कि नव वर्ष में हम सभी विषाद से सर्वथा मुक्त हो आनन्द ,शान्ति और  उन्नति की ओरनिरंतर अग्रसर हो.म...
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Tag :शुभकामनाएँ
  December 31, 2012, 12:00 pm
अपनी कुछ अस्वस्थता के कारण  मैं ब्लोगिंग  में सक्रिय  रहने में  स्वयं को असमर्थपा रहा हूँ.इसलिए अभी ब्लोगिंग से अल्पकालीन विराम ले लेना ही बेहतर समझताहूँ. मैं अपने उन सुधिजनों का क्षमाप्रार्थी हूँ जिन्होंने मुझ से नवीन पोस्ट लिखने  का आग्रहकिया था अथवा जिनको मेरी पो...
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Tag :अल्पकालीन विराम
  October 31, 2012, 11:06 pm
                                           बुद्धिहीन तनु  जानकर, सुमिरौं   पवन  कुमार                                             बल बुधि  बिद्या देहु मोहिं,हरहु कलेस बिकार मैं  स्वयं को बुद्धिहीन तन जानकर पवन कुमार  हनुमान जी का स्मरण करता हूँ जो मुझे   बल,बुद्धि और विद्या प्रदान कर मेरे समस्त क्लेश विका...
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Tag :permanent
  September 30, 2012, 11:23 pm
मेरी पिछली पोस्ट  'हनुमान लीला भाग-५'  में  प्रेम सरोवर जी और डॉ. टी एस दराल जी  ने मुझे  विषयान्तर  और विषय में विविधता लाने की सलाह दी है. मुझे लेखन का अधिक अभ्यास नही है.अभी तक जो विषय मुझे दिल से  प्रिय है, उसी पर मैंने अपनी सोच आप सभी सुधि जनों के समक्ष रक्खी और आप सुधि ...
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Tag :superstore
  August 5, 2012, 2:04 am
                         जय जय जय हनुमान गोसाँई, कृपा करहु गुरुदेव  की नाईंमेरी पोस्ट ' हनुमान लीला भाग -१'  में हनुमान जी के स्वरुप का चिंतन करते हुए मैंने लिखा था' हनुमान जी  वास्तव में 'जप यज्ञ'  व 'प्राणायाम' का साक्षात ज्वलंत  स्वरुप ही हैं.साधारण अवस्था में  हमारे  मन, बुद...
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Tag :गुरु हनुमान
  June 29, 2012, 1:37 am
                          महाबीर बिनवउँ हनुमाना, राम जासु जस आप बखाना  हनुमान जी का चरित्र अति सुन्दर,निर्विवाद और शिक्षाप्रद है, उन्ही के चरित्र की प्रधानता श्रीरामचरितमानस के सुन्दरकाण्ड में सर्वत्र हुई है. सुन्दरकाण्ड का पाठ अधिकतर मानस प्रेमी घर घर में करते-कराते हैं.परन...
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Tag :शरणागति
  April 24, 2012, 12:30 am
                             यज्ञ दान तप: कर्म  न त्याज्यं कार्यमेव तत्                                                        यज्ञो दानं  तपश्चैव  पावनानि   मनीषिणाम्यज्ञ,दान  और तपरूप कर्म त्याग करने के योग्य नहीं हैं,बल्कि वह तो अवश्य कर्तव्य हैं.क्यूंकि यज्ञ,दान और तप - ये तीनों ही कर्म बुद्धिमान पु...
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Tag :यज्ञ
  February 16, 2012, 4:00 am
                           नहिं कलि करम न भगति बिबेकू, राम   नाम    अवलंबन    एकू                           कालनेमि   कलि   कपट  निधानू, नाम  सुमति समरथ हनुमानू'कलियुग में न कर्म है, न भक्ति है और न ज्ञान ही है.केवल रामनाम  ही एक आधार है.कपट की खानकलियुग रुपी कालनेमि को मारने के लिए 'रामनाम' ही ...
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Tag :ऊँ
  January 20, 2012, 1:45 am
                                मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं  बुद्धिमतां वरिष्ठम्                                वातात्मजं  वानरयूथमुख्यं   श्रीरामदूतं   शरणं   प्रपध्ये        मैं मन के समान  शीघ्र गति युक्त , वायु के समान प्रबल वेग वाले, इन्द्रियों को जीत लेने वाले,        बुद्धिमानों  मे...
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Tag :explanation
  December 19, 2011, 1:00 am
                        अतुलितबलधामं     हेमशैलाभदेहं                                           दनुजवनकृशानुं    ज्ञानिनामग्रगण्यम                          सकलगुणनिधानं  वानरणामधीशं                                           रघुपतिप्रियभक्तं   वातजातं  नमामि  अतुलित बल के धाम , सोने के पर्वत के समांन  कान्तियुक्त  शरी...
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Tag :सुग्रीव
  November 25, 2011, 11:11 pm
आनंद की परिकाष्ठा परमानन्द है.  हर  मनुष्य  में   चिंतन   मनन करने की  स्वाभाविकप्रक्रिया होती  है.परन्तु , परमानन्द का चिंतन करना ही  वास्तविक सार्थक चिंतन है.परमानन्दपरमात्मा का स्वाभाविक रूप है ,जिससे  जुडना  'योग' कहलाता  है.  जब मनुष्य परमानन्दके विषय में  चिंतन...
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Tag :सीता लीला
  October 20, 2011, 1:00 am
मन में श्रद्धा के  'जोश' और बुद्धि में विश्वास के 'होश'से 'भवानी और शिव' की कृपा होने लगती है.भक्त वही  है जो परम  आनंद से ,परम शान्ति और संतुष्टि  से मन और बुद्धि के माध्यम से किसीभी  प्रकार से हृदय में स्थित परमात्मा से  जुड जाये. जो नहीं जुड पाता वह 'विभक्त' है, खंडित है,अश...
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Tag :अर्थार्थी
  September 12, 2011, 2:20 am
सीता पवित्र पावन है, मनोहारी,सुकोमल  और अत्यंत सुन्दर है, दुर्लभ भक्ति स्वरूपा है, समस्तचाहतों की जननी है. सीता का नाम जन जन में प्रचलित है, जो राम से पहले ही  बहुत आदर  वसम्मान के  साथ लिया जाता  है.बहुत प्राचीन समय से  अनेक  घरों में  बच्चियों का नाम सीता,जानकी या वैदेह...
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Tag :सत्संग
  August 20, 2011, 5:00 am
किसी भी  चाहत की उत्पत्ति आनंद प्राप्ति के लिए   होती है. यह अलग बात है कि उस  चाहत कीपूर्ति पर आनंद मिले या न मिले. अथवा जो आनंद मिले वह स्थाई न होकर अस्थाई ही रहे.जैसे जैसे हमारी सोच व अनुभव परिपक्व होते जाते  है ,हम अस्थाई आनंद की अपेक्षा स्थाईआनंद की चाहत को अधिक महत्व द...
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Tag :भक्ति
  July 20, 2011, 2:48 am
चाहत या आरजू का जीवन में बहुत महत्व है.हमारी  अनेक प्रकार की चाहतें हो सकतीं हैं, जो  जीवनके स्वरुप को बदलने में सक्षम हैं.  वासनारूप होकर जब    चाहत   अंत:करण  में वास  करने लगतीहै तो  हमारे 'कारण शरीर' का भी  निर्माण  करती रहती है.'कारण शरीर' हमारी स्वयं की वासनाओं से...
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Tag :सीता जन्म
  June 29, 2011, 1:18 am
यह मेरे लिए अति आनंद की बात है कि प्रिय सुधिजनों  ने  'रामजन्म -आध्यात्मिक चिंतन' परप्रकाशित मेरी पिछली तीनों पोस्टों  का अपनी आनंदपूर्ण टिप्पणियों से भरपूर स्वागत किया है.देवेन्द्र भाई का कहना है कि'संगम सरयू स्नान कर धवल व पवित्र हो जाता है. भाई अरविन्द मिश्रा जी ...
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Tag :
  May 21, 2011, 12:47 pm
आनंद का चिंतन करना अदभुत है,  मंगलकारी है . आनंद का एक एक पद, एक एक शब्द,एक एक अक्षर मधुरातिमधुर  है. आप सुधिजनों ने मेरी पोस्ट 'रामजन्म - आध्यात्मिक चिंतन- १'  व 'रामजन्मआध्यात्मिक चिंतन- २'  पर जो टिप्पणियाँ कीं उनमें आनंद ही आनंद समाया है  , जिससे मन आनंद निमग्न हों गया ह...
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Tag :
  May 5, 2011, 7:54 pm
राम यानि 'सत्-चित-आनंद' का भाव  व्यक्ति के  ह्रदय में जैसे जैसे घर करने लगता है,उस व्यक्ति के विचारों, उसके भावों और कर्मों में भी यह भाव परिलक्षित होने  लगता है.वह बोलेगा तो आनंद होगा, वह लिखेगा तो आनंद होगा , वह मूर्ति या चित्र बनायेगा तोउसकी बनाई मूर्ति या चित्र में भ...
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Tag :
  April 21, 2011, 10:18 pm
रामजन्म के पावन पर्व रामनवमी  की समस्त ब्लोगर जन को हार्दिक शुभकामनाएं.इस पोस्ट में मै आप सभी सुधिजनों के साथ रामजन्म  के विषय  में आध्यात्मिक चिंतनकरना चाहता हूँ ,जिसपर मैंने अपने कुछ विचार" जी न्यूज "  चैनल पर रामनवमी के दिन  (दि. १२.०४ .२०११)  को "मंथन" कार्यकर्म...
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Tag :
  April 13, 2011, 1:09 pm
           वर्णानां अर्थसंघानां रसानां छंद सामपि,           मंगलानां च कर्त्तारौ वंदे वाणीविनायकौअक्षरों, अर्थ समूहों, रसों, छंदों और मंगलों के करने वाले वाणी विनायक जी की मै वंदना करता हूँ. यह प्रार्थना तुलसीदास जी ने रामचरितमानस के बालकाण्ड में सबसे पहले की है.वाणी का ...
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Tag :
  April 4, 2011, 9:37 am
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