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*साहित्य प्रेमी संघ*

        गोबर की अहमियत हमारी जिंदगी में कदर कितनी गाय भेंसों की ,एक छोटे से उदाहरण से ,समझ सब आप सकते है करे इंसान विष्टा तो,बहा  दी जाती है फ्लश में,करे गर गाय गोबर तो,हम उपले थाप रखते है पवित्तर मानते इतना ,लगाते चौका गोबर का ,हवन में काम में लाते ,जलाते आग चूल्हे की,उन्ही के ...
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  March 23, 2016, 11:00 am
       न रंग होली के फागुन में लड़कियां देख कर 'घोटू' बहुत फिसले लड़कपन में हुई शादी, हसरतें सब, रह गई ,मन की ही मन मेंकिसी को ताक ना सकते,कहीं हम झाँक ना सकते ,बाँध कर रखती है बीबी, हमे अब  अपने   दामन में  हमारी हरकतों पर अब,दफा एक सौ चुम्मालिस है,न आँखे चार कर सकते किसी से ,हम ह...
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  March 23, 2016, 10:52 am
       आशिक़ी और होली जलवा दिखा के हुस्न का ,हमको थी जलाती ,   ये जान कर भी  रूप पर ,उनके हम  फ़िदा  हैहमको न घास डालती थी जानबूझ कर ,      हम समझे हसीनो की ये भी कोई अदा  हैदेखा जो किसी और को बाहों में हमारी ,      मारे जलन के ,दिलरुबा ,वो खाक हो गयी प्रहलाद सलामत रहा,होलिका जल गयी,      ...
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  March 23, 2016, 10:33 am
        होली की जलन                   १ सुंदर कन्या कुंवारी ,जिसका रूप अनूप ज्यों गुलाब का फूल हो,या सूरज की धूप या सूरज की धूप ,हमारे  मन को  भायी  लाख करी कोशिश,मगर वो हाथ  न आयी हमे जलाती रोज ,दिखा कर नूतन जलवा ललचाता था बहुत ,हुस्न का उनके हलवा                    २ हमने कुछ ऐसा किया ,र...
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  March 23, 2016, 10:06 am
 पांच तत्व की प्रतिमा -नारी हमार काया को प्रभु ने पांच तत्वों से बनाया हवा,पानी ,अग्नि ,धरती और आकाश पर इनका आभास नारी में होता है ख़ास उनमे हवा तत्व है भरपूर मिलता उनकी इजाजत के बिना ,घर का एक पत्ता भी नहीं हिलता अग्नि तत्व भी स्पष्ट नज़र आता है इनके सानिध्य  से ,कोई भी ,पत्थर...
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  March 22, 2016, 10:15 pm
 होली-रंगों का त्योंहार         आज होली दिवस भी है,         रंगों का  त्योंहार भी हैपर्व कल था जो दहन काआस्थाओं के दमन काकुटिलता के नाश का दिनभक्ति के  विश्वास का दिन         शक्ति के उस परिक्षण में         जीत भी है ,हार भी है         आज होली  दिवस भी है,          रंगों का त्योंहार भी...
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  March 20, 2016, 6:06 pm
           बीबी का एडिक्शन जिस दिन खाने को ना मिलती ,है बीबीजी  डाट हमे ,     वो सारा का सारा  दिन ही, सूना सूना सा लगता  है जिस सुबह नहीं हमको मिलती ,उनकी हाथों की बनी चाय ,     उस दिन गायब रहती चुस्ती ,और मन सुस्ती से भरता है जिस उनके हाथों छोंकी , है दाल न होती थाली में,        उस दिन ...
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  March 19, 2016, 12:58 pm
      फिसलन फिसलता कोई कीचड़ में ,फिसलता कोई पत्थर पर कोई चिकनाई में  फिसले ,कोई  बर्फीले  पर्वत  पर कोई  फिसले है चढ़ने में,कोई फिसले उतरने  में फिसलने कितनी ही आती ,सभी के आगे  बढ़ने में जो पत्थर पर पड़ा पानी ,फिसलते लोग है अक्सर बड़ा फिसलन भरा  होता ,है पानी में पड़ा पत्थर फिसलना...
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  March 19, 2016, 12:28 pm
दादा पोता संवाद दादा से पोते ने पूछा ,जब आपका था जमाना न बिजली थी ,न गैस ,तो फिर कैसे पकता था खाना दादा ने बतलाया बेटे ,खाना उन दिनों ,मिटटी के चूल्हे पर जाता था पकायाआश्चर्य चकित होकर बोला पोता ये मिट्टी का चूल्हा है क्या होता दादा बोले ये चूल्हा ,मिट्टी से बनी ,U शेप का ,एक '...
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  March 15, 2016, 3:24 pm
     ये लललन टॉप होती है नचाती मर्दों को रहती ,उँगलियों के इशारों पर ,        इन्हे कमजोर मत समझो,ते सबकी बाप होती है पति मुश्किल का मारा है ,बिना इनके अधूरा है ,       बटर सी प्यारी लगती है ,ये 'बेटर हाफ ' होती  है नहीं चुप बैठ सकती है ,बोलना इनकी फितरत है ,        जलजला आने को होत...
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  March 15, 2016, 2:28 pm
      बीबी की अहमियत एक फिलम,'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे 'थी आई जो लोगों के मन इतनी भायी कि एक सिनेमा हाल में ,कितने ही वर्षों चल गई उन्ही सितारों की ,एक दूसरी फिल्म,'दिलवाले'भी बनी,पर पता ही न चला ,कब आई,और कब गई इस उदाहरण का इतना सा सार है बिना दुल्हनिया के ,दिलवाले बेक...
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  March 15, 2016, 2:10 pm
सबसे अच्छी हीरोइन एक दिन ,पत्नीजी ने ,अपने ही अंदाज से ,मेरी क्लास ले ली और बोली,एक बात बताना सच्ची सच्ची तुमको ,फिल्म की कौनसी हीरोइन लगती है अच्छी मुझे लगा कि ये गंगा उल्टी क्यों बह रही है कहीं ये मेरे पत्नीव्रत धर्म का, इम्तहान  तो नहीं ले रही है अब मैं क्या बताता किस के ...
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  March 15, 2016, 1:56 pm
          हम अंग्रेजी छोड़ न पाये अंग्रेजों ने भारत छोड़ा,हम अंग्रेजी छोड़ न पाये रहे गुलामी में ही बंध कर,वो जंजीरें तोड़ न पाये केवल नहीं बोलते,पढ़ते,अंग्रेजी है ,पीते ,खाते बच्चे जाते ,इंग्लिश स्कूल ,अपनी भाषा बोल न पाते नहीं जलेबी,पोहा,इडली,उन्हें चाहिए पीज़ा,बरगर करे नाश्ता,...
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  March 12, 2016, 6:11 pm
       मारे गए गुलफाम मुझको उनने घास तक डाली नहीं ,         खेत कोई और ही आ चर  गया चवन्नी को मुझको तरसाते रहे ,         और तिजोरी ,दूसरा ले भर गया मुझको मीठी मीठी बातों से लुभा ,मिठाई के लिए ,ललचाते  रहे ,मिठाई का डिब्बा मेरे सामने ,        दूसरा ही कोई आ ,चट  कर गया या तो तुम चालू थी य...
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  March 12, 2016, 5:41 pm
                        बेटियां बेटी को तो 'बेटा' कह कर ,अक्सर लोग बुलाते है पर भूले से, भी बेटे को  ,'बेटी'  कह  ना   पाते  हैबेटी होती भले परायी , अपनापन  ना  जाता  है  बेटा ,अपना होकर ,अक्सर, बेगाना  हो जाता है बेटी ,शादी होने पर भी ,गुण  पीहर के  गाती  है बेटे के सुर बदला करते ,जब ...
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  March 12, 2016, 5:00 pm
              गंगा तट -अक्षयवट कल कल बहती प्रीतधार है,लम्बा चौड़ा  वृहद  पाट है कहीं वृक्ष है,कहीं खेत है ,  और कहीं पर बने घाट है जो भी मेरे पास बस गए,सच्चे मन से सबको सींचा मैंने उनकी प्यास बुझाई ,उनका फूला फला  बगीचा  टेडी मेडी बहती सरिता ,किन्तु शांत मैं ,ना नटखट हूँ              ...
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  March 6, 2016, 3:11 pm
            सच्चा समर्पण         मैं तो एक कंटीली झाडी का गुलाब हूँ सुंदर हूँ,मैं महक रहा हूँ, लाजबाब  हूँ मैंने खुद को सच्चे मन से किया समर्पित जीवन भर के लिए हो रहा तुम पर अर्पित चाहे अपनी जुल्फों में तुम इसे सजाओ या फिर मिश्री डाल ,इसे गुलकंद  बनाओ मैं तो आम्र तरु की हूँ एक क...
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  March 6, 2016, 2:12 pm
      कनक छड़ी से खिचड़ी तक जब हम घोड़ी पर चढ़ते है,उसे 'घुड़ चढ़ी 'हम कहते है मिलती सुंदर ,प्यारी पत्नी ,उसको 'कनकछड़ी 'कहते है जब वो बढ़ मोटी  हो जाती,तो बन जाती 'मांस चढ़ी 'है बात बात में नाक सिकोड़े ,तो सब कहते 'नाक चढ़ी' है जब ज्यादा सर पर चढ़ जाती,बहुत 'सरचढ़ी'कहलाती है खुश ना...
*साहित्य प्रेमी संघ*...
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  March 6, 2016, 1:08 pm
                  मैं नीबू हूँ सुन्दर रूप,सुनहरी काया ,दिलकश प्यारी सी खुशबू हूँ                                                        मैं नीबू हूँ पीला रंग,रसीला तनमन ,कुछ खट्टा,लेकिन मन भाता कितने ही भोजन पदार्थ का,और चाट का स्वाद  बढ़ाता छोले और भठूरे प्यारे ,या फिर चाट  फलों वाली में ख...
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  March 6, 2016, 12:05 pm
shayari,gajal shailrachana: बौना मन का आस्मां कर रहना पड़ा है:  ''दर्द का पुलिंदा ''तेरे नाम  से  बस  पहचानी  गयी मैं था क्या  नाम  मेरा  भूलाना  पड़ा है किसी ने न देखा  क्या मेरा ......
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  February 28, 2016, 11:55 pm
        चखने का तो हमको हक़ है हाय बुढ़ापे ,तूने आकर ,ऐसा हाल बिगाड़ दिया है हरी भरी थी जीवन बगिया ,तूने उसे उजाड़ दिया है उजले केश,झुर्रियां तन पर ,अब अपनी पहचान यही है इस हालत में ,प्यार किसी का ,मिल पाना आसान नहीं है ढंग से खड़े नहीं रह पाते ,और जल्दी ही थक  जाते    है हुस्न और दुनिय...
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  February 28, 2016, 5:12 pm
           शैतानियाँ कुछ बच्चे शैतानी करते है तो भी प्यारे लगते है कुछ लड़के,शैतानी कर,लड़की को पटाया करते है कुछ साधू है शैतान बने , आती है खबरें ,यदा कदा मुंह से कहते राम राम और छुरी बगल में रखें सदा कुछ डॉक्टर भी शैतान बने ,है सेवा जिनका परम धर्म कन्या की भ्रूण हत्या करवा ,वो ...
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  February 28, 2016, 4:31 pm
                 सब चलता है आँखे चलती,पलकें चलती ,इधर उधर नज़रें चलती है मुंह चलता ,हम दांत चलाते ,कैंची सी जिव्हा चलती है चलते हाथ,उँगलियाँ चलती,पैरों से मानव चलता  है जब तक चलती सांस हमारी ,तब तक ही जीवन चलता है सूरज चलता रहता दिन भर ,और रात चंदा चलता  है ,मुश्किल से ही घर चल पाता...
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  February 28, 2016, 4:03 pm
         हुस्नवालों से                   १ तुम्हारे हुस्न का चर्चा ,यहां हर बार होता है वो दिन अच्छा गुजरता जब ,तेरा दीदार होता है न जिस दिन तुम नज़र आते ,बड़ा बेचैन रहता हूँ,मुस्करा देते हो जिस दिन,मेरा त्योंहार  होता है                     २   अदाएं ,नाज़ और नखरे ,दिखा हमको सताते हो संवर...
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  February 27, 2016, 7:23 pm
             तू देख किसी का अच्छा कर मत सोच बुरा तू औरों का ,तेरा न भला वरना होगा तुझको मुआवजा अपनी सब ,करतूतों का भरना होगा औरों हित ,तूने निज मन में ,नफरत के बीज ,रखे बो है रहता है दुखी ,यूं ही हरदम ,यह देख देख वो खुश क्यों है है तेरे  घर में राज तेरा , अपने  घर  में वो राज करें तेरे ...
*साहित्य प्रेमी संघ*...
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  February 27, 2016, 7:11 pm
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