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दिल का दर्पण : View Blog Posts
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दिल का दर्पण

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दिल का दर्पण...
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  July 10, 2017, 10:34 pm
बहुत दिनों से कुछ लिखा नहीं था I आज दिन में टेलीविज़न पर एक अंग्रेजी फिल्म "The Hurricane"आ रही थी I यह एक बॉक्सर "रूबल कार्टर"के जीवन पर आधारित है जिसको अदालत के गलत निर्णय के कारण उम्र कैद हो जाती है I जेल में रह कर वह अपने जीवन पर एक किताब लिखता है I उसी किताब को पढ़ कर एक लड़का बड़ा प्रभ...
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  March 29, 2017, 10:34 pm
अधिकतर लोग यह समझते हैं कि वह जानते हैं प्रसन्न  रहने के लिए क्या करना चाहिए I विभिन्न लोग भिन्न भिन्न कारणों को प्रसन्न रहने के लिए आवश्यक  मानते हैं I  आईये इस विषय पर और आगे बढ़ने से पहले हम यह जान लें कि मृत्यु के करीब लोगों पर किये गए सर्वेक्षण में उनके कौन से मुख्य पछत...
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  March 13, 2017, 11:14 pm
बात का अब क्या कहना दिल की कह गया कोई मिल गयी उसको मंजिल टूट  कर रह गया कोई दोस्त ही ना रहा अपना फिर भी सह गया कोई बूँद भर भी नहीं बरसी बाढ़ में  बह गया कोई ईंट बस एक वहां सरकी बाँध फिर ढह गया कोई ...
दिल का दर्पण...
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  February 27, 2017, 9:25 pm
दिल में तेरी यादों का गुलाब खिल तो आया है साथ हिस्से में मगर कुछ कांटे भी मेरे आये हैं सोचता हूँ क्यों कोई नहीं मिलता अपनों सा यहाँ फिर याद आता है मुझे हम इस देश में पराये हैं पहले हर आवाज पर लगता था कि कोई आया है जानता हूँ अब कोई नहीं दस्तक देती ये हवायें हैं जिस्म तो...
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  November 24, 2016, 1:20 am
हर घडी न तलाशो नक्शे कदम कुछ दूर तो अपने दम पर चलो बोझ से ख्वाहिशोँ के थक जाओगे दिल मेँ अरमान कम ले कर चलो गुजरी बातोँ का चर्चा क्योँ हर घडी झगडे पुराने सभी दफन कर चलो ठोकरेँ न कहीँ तेरा हौँसला तोड देँ राहे सफर मेँ ऐसा जतन कर चलो काफिला  मँजिल तक पहुँचायेगा भूल जा...
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  August 6, 2015, 5:04 pm
हल बैल फिर खेत निरायी कहीं बीज कहीं पौध रोपायी हरी कौपले, कोमल डालियाँ समय से बने सुनहरी बालियाँ खलिहानों से दुकानों तक दुकानों से घर की रसोई रसोई से फिर थाली तक किस पर क्या-क्या बीता किस ने है क्या-क्या झेला कुछ जग जाहिर है इस दूरी में और कुछ न कहने की मजबूरी में कच्ची मि...
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  July 10, 2015, 11:42 am
जीवन क्या है? जन्म और मृत्यु के बीच एक अन्तराल कभी दीर्घ अनुभूति, कभी लघु आभास जीवन एक चित्रपट (कैन्वॅस) काल की लेखनी उकेरती जिस पर कभी सूक्ष्म, कभी वृहद रेखाचित्र धीर गम्भीर या फिर मधुर सुहास जीवन एक चित्रपट (कैन्वॅस) भाग्य व कर्म की तूलिकाएँ भरतीं जिसमें भावनाओं के वि...
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  June 18, 2015, 10:32 am
क्या नहीँ है आज यहाँ मेरे लिये कोई दुआ है फली यहाँ मेरे लिये हजार दुश्मन  तो कोई बात नहीँ तुम तो मेरे हो ना यहाँ मेरे लिये बस्ती-ए-ख्वाब से एक बार गुजरा ठहरना लाजिम अब यहाँ मेरे लिये महफिल मेँ बस इक तेरे आने से सब कुछ नया-नया यहाँ मेरे लिये मुझसे नजरेँ फेरे लेने से पह...
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  June 18, 2015, 10:18 am
धूप से रहगुजर की सायोँ से वास्ता रखा हो सका जहाँ तक बीच का रास्ता रखा सिर्फ दोस्ती ही नहीँ निभाई है यहाँ मैँने दुश्मनोँ से भी है बराबर का राब्ता रखा कुछ मीठे और कुछ कडवे घूँट पीने पडे बना के मैँने मगर जुँबा का जायका रखा राहोँ मेँ मुझे जहाँ भी चिराग सोये मिले मैँने आ...
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  June 17, 2015, 12:49 pm
मेरा प्रकाशित कविता सँग्रह "दिल का दर्पण" नीचे दिये लिंक पर जा कर प्राप्त किया जा सकता है.  पुस्तक का मुल्य रु. 105 मात्र  + रु 40 पोस्टेज है. http://www.infibeam.com/Books/dil-ka-darpan-mohinder-kumar/9789381394212.html#variantId=P-M-B-9789381394212 मोहिन्दर कुमार  ...
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  June 17, 2015, 11:30 am
कई झूठे अफसाने हैँ फिजाओँ मेँ किससे बोलेँ और क्या कहा जाये जब भी कभी बोलने की सोची है दिल का मश्वरा था चुप रहा जाये दर्द रह रह कर  दिल मेँ उठता है खुद सह लो जब तलक सहा जाये वक्त की धार ही सबकी किस्मत है साथ बह लो इसके गर बहा जाये सभी काफिलोँ की अपनी मँजिल है जिसकी मँज...
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  June 16, 2015, 10:21 am
डँगरेयाँ चरान्दे चरान्दे घा छम्मण पौँदेँ पौँदे ऐ जिन्द्डी बेहाल होई बिन दाँणेयाँ पराल होई तू कुत्थु दिक्खी सकेया खूँगेयाँ पेराँ जो घाह दित्ते रौनकाँ देया ओ मेरम्माँ दिन मुज्जो तू सिआह दित्ते बुज्झी चुक्की लौ हुण ताँ ऐथू जुग्नू हन्न गवाह मत्ते मर्जिया दा हुण म...
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  May 25, 2015, 11:01 am
कभी गलियारे मेँ यादोँ के कभी बँजारे बन राहोँ पर न जाने क्या ढूँढते हैँ हम भूलाना था जिसे हमको वही सब  याद करते हैँ रेत के भँवर मेँ डूबते हैँ हम कभी मौसम जो भाते थे और मँजर जो लुभाते थे उन्हीँ से आज ऊबते हैँ हम न आने वाला है अब कोई न मनाने वाला है अब कोई खुद से जाने क्य...
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  May 25, 2015, 10:58 am
गर्व से सर उठाये पर्वत की शिखरोँ को सूर्य की किरण  सर्वप्रथम व अंतिम किरण अंत तक निज दिन चूमती है परंतु चकित हूँ यह फिर भी हरित नहीँ होती हरित होती हैँ घाटियाँ जीवन वहीँ विचरता है किँचित यह ओट देने का श्राप है अथवा दमन का प्रतिशोध कि जल की एक बूँद नहीँ ठहरती यहाँ जल ...
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  May 25, 2015, 10:55 am
शरीर एक नाव है    एँव आत्मा एक यात्री यही सत्य है सभी कहते हैँ यदि यह सत्य भी है महान तो शरीर ही हुआ ना जीवन भर ढोता रहा जो इस यात्री का बोझ जो केवल मूक साथी था इस घाट से उस घाट की बीच की दूरी का इस आशा मेँ इस पर सवार किंचित यह नाव  समय  के धारे के विपरीत बह कर उसे मिला देगी...
दिल का दर्पण...
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  April 20, 2015, 4:02 pm
तुम बिन क्या हाल है मेरा सब कुछ पूछो यह न पूछो बाहर से कोई जान न पाये भीतर क्या है हाल न पूछो बसंत छाई  है  उपवन मेँ पलाश  उपजा मेरे मन मेँ गँधहीन पुष्पोँ से सज्जित पत्रहीन स्वय़ँ से लज्जित जिसे देख कर सभी सराहेँ क्षितिज लालिमा की रेखायेँ फूलदान के लिये नहीँ खरा जँगल...
दिल का दर्पण...
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  March 11, 2015, 3:41 pm
पेशावर (पाकिस्तान) के एक स्कूल मेँ आतँकवादियोँ द्वारा निर्दोश बच्चोँ की हत्या और उनके परिजनोँ के दुख से उपजी कुछ पक्तियाँ समर्पित हैँ.... इस घटना की जितनी निन्दा की जाये कम है... साथ ही अपराधियोँ के लिये बडे से बडा दण्ड भी कम रहेगा... शायद फाँसी भी कम पड जाये. झर गये आशाओँ क...
दिल का दर्पण...
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  December 18, 2014, 3:57 pm
मैँने भर लिया आगोश मेँ चाँद को चाँदनी पर जहाँ मेँ फेरा लगाती रही भुला गम को ये जहाँ बसा तो लिया उदासी पर हर शाम डेरा लगाती रही पहले पहल बनाई तेरी तस्वीर के रँग दोबारा फिर कागज पर उतर न सके रातोँ के घने काले अँधेरे सँवर न सके यूँ किरणेँ सूरज की सवेरा सजाती रही जीने के ल...
दिल का दर्पण...
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  November 28, 2014, 12:49 pm
मैँने हुस्न वालोँ की जिद देखी है मैँने दिवानेपन की हद भी देखी है रहेगी किताबोँ मेँ फसाना बन कर जीस्ते-सफर मेँ वो गर्द भी देखी है ...
दिल का दर्पण...
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  October 21, 2014, 10:57 am
साईं जी मै तेरी पतंग, सतगुरु मैं तेरी पतंग, हवा विच उडदी जावांगी, हवा विच उडदी जावांगी। साईंया डोर हाथों छोड़ी ना, मैं कट्टी जावांगी॥ बड़ी मुश्किल दे नाल मिलेय मेनू तेरा दवारा है। मेनू इको तेरा आसरा नाले तेरा ही सहारा है। हुन तेरे ही भरोसे, हवा विच उडदी जावांगी, साईंया डो...
दिल का दर्पण...
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  October 17, 2014, 4:06 pm
मिटाना चाहते हो तो मिटा भी दो मुझकोकोई तो सिला मेरी मुहब्बत का दो मुझको मेरी हस्ती है सिर्फ और सिर्फ तेरी खातिर  जहाँ अँधेरा हो तेरी राहोँ मेँ जला लो मुझको कतरा कतरा मुहब्बत का समेटा था दिल मेँ  चाहो तुम तो इस समन्दर मेँ बहा दो मुझको करीब सबसे है तेरा मुकाम मेरे इस दिल ...
दिल का दर्पण...
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  October 14, 2014, 5:25 pm
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