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तू... सर्दियों की धूप सीगुनगुनी...तू... सर्दियों की धूप सीमिनमिनी...तू... सर्दियों की धूप सीशीरी-शीरी...तू... सर्दियों की धूप सीनग्मगी...     तू... सर्दियों की धूप सी     चुलबुली...     तू... सर्दियों की धूप सी     खिलखिली...     तू... सर्दियों की धूप सी     सन्दली...     तू... सर्दियों की धूप सी     मख...
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  December 24, 2011, 1:34 am
एक रवायत का नाम है देवानंद :  गुलज़ार          देव साहब का इस दुनिया से जाना, एक दुनिया का जाना है। देव और उनकी फिल्मों के बारे में बहुत से लोगों ने बहुत कुछ कहा है। मैं सिर्फ देव साहब के वजूद की बात करूंगा। देव साहब को देखना, उनसे मिलना, उनकी बात करना, ऐसा ही है जैसे उन्हें जीन...
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  December 16, 2011, 10:48 am
     हर एक शहर की अपनी एक तहजीब कुछ रवायतें होती हैं जो अपने अंदर उस शहर के वजूद और पहचान को समेटे रहती हैं. गुजिश्ता 100 साल होने को आये दिल्ली को हिंदुस्तान की राजधानी बने. कुछ रवायतों को छोडकर इन सौ सालों में दिल्ली की तहजीब में दशक-दर-दशक कुछ न कुछ बदलाव होता आया है. यह बदला...
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  December 12, 2011, 7:02 pm
     हर एक शहर की अपनी एक तहजीब कुछ रवायतें होती हैं जो अपने अंदर उस शहर के वजूद और पहचान को समेटे रहती हैं. गुजिश्ता 100 साल होने को आये दिल्ली को हिंदुस्तान की राजधानी बने. कुछ रवायतों को छोडकर इन सौ सालों में दिल्ली की तहजीब में दशक-दर-दशक कुछ न कुछ बदलाव होता आया है. यह बदला...
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  December 12, 2011, 3:06 pm
शब है तो फसाना-ए-आरजू हैशब है तो हंगामा चार-सू है          शब है तो उजालों की आजमाइश है          शब है तो कहकशों की पैमाइश हैशब मुस्कुराये तो चांद तबोताब होशब लहराये तो समंदर फैजयाब हो          शब है तो तारों की रानाई है          शब है तो आलम-ए-तनहाई हैशब है तो सुबह-ए-इंतजार हैशब है तो बाद...
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  December 8, 2011, 9:04 pm
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