Hamarivani.com

गीत कलश

कल्पना के चित्र पर ज्यों पड़ गई इंचों बरफ सीरह गईं आतुर निगाहें एक अनचीन्हे दरस की फिर किरण की डोर पकडे बादलों के झुण्ड उमड़ेकसमसाने लग गईं बाहें कसक लेकर परस की शून्य में घुलते क्षितिज की रेख पर से आ फिसलतीझालरी कोई हवा की लग रहा कुछ कह रही है आ रही लगता कही से कोई स्वर ...
गीत कलश...
Tag :
  May 28, 2012, 7:30 am
गीत लिखते हुये ये कलम थक गईएक भी तुम मगर गुनगुनाये नहींगीत के शब्द में खुद कलम ढल सकेइस तरह से कभी मुस्कुराये नहींछन्द के बन्द में कुन्तलों की लटेंबाँधती तो रही ये मचलती हुईरागिनी की लहर पे रिराती रहीरूप की ज्योत्सनायें छिटकती हुईराग की सीढियों पर सजाये हुयेथिरकनें ...
गीत कलश...
Tag :
  May 14, 2012, 7:30 am
संजो रखे हैं पल स्मृतियों के मैंने मन की मंजूषा में और संवारा करता हूँ उनसे संध्या का एकाकीपनवे पल जिनमें दृष्टि साधना करते करते उलझे नयनावे पल जिनमें रही नींद में सोई हुई कंठ की वाणीवे पल जिनमें रहे अपरिचित शब्द अधर की अंगनाई सेरही छलकती जिनमें केवल रह रह कर भावों की ...
गीत कलश...
Tag :
  April 9, 2012, 5:34 pm
कुछ प्रश्नों क्रे उत्तर मैने दिये नही बस इस कारण सेमेरे उत्तर नव प्रश्नो का कारण कहीं नहीं बन जायेंघड़ी प्रहर पल सभी रहे हैं प्रश्नों के घेरे में बन्दीघटते बढ़ते गिरते उठते साये तक भी प्रश्न उठातेगति में रुके हुए या मुड़ते पथ की हर सहमी करवट परहर पग की अगवानी करते प्रश्न ...
गीत कलश...
Tag :
  December 19, 2011, 7:24 am
बोझ से लगने लगें सम्बन्ध के धागे जुड़े जबआस हो कर के उपेक्षित द्वार से खाली मुड़े जबकैद में बन्दी अपेक्षा की रहें सद्भावनायेंस्वार्थ के पाखी बना कर झुंड अम्बर में उड़ें जब  तब सुनिश्चित संस्कृतियों की हमारी वह धरोहरजो विरासत में मिली थी, खर्च सारी हो गई है  छू न पायें या...
गीत कलश...
Tag :
  December 12, 2011, 7:40 am
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3652) कुल पोस्ट (163590)