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मेरी भावनायें...

भावनाओं की आँधी उठे या शनै: शनै:शीतल बयार बहे या हो बारिश सी फुहार सारे शब्द कहाँ पकड़ में आते हैं !कुछ अटक जाते हैं अधर में कुछ छुप जाते हैं चाँदनी में कुछ बहते हैं आँखों से और कभी उँगलियों के पोरों से छिटक जाते हैं तो कभी आँचल में टंक जाते हैं ...... मैंने देखा है कई बार इनको प...
मेरी भावनायें......
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  May 31, 2012, 7:02 pm
मैं गले की तरह रुंध जाती हूँ बन जाती हूँ सिसकियाँ चित्रित हो जाती हूँ आंसुओं के धब्बों सरीखे !हो जाती हूँ सर्वशक्तिमान सिसकियों के मध्य से उठाती हूँ जज्बा और आंसुओं को हटाकर मुस्कान का आह्वान करती हूँ !मैं हो जाती हूँ खुद रहस्य और उन रहस्यों का करती हूँ सामना जो विघ्न क...
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  May 29, 2012, 10:30 am
खुद की तलाश खुद के लिए होती है क्योंकि प्रश्न खुद में होते हैं ये बात और है कि इस तलाश यात्रा में कई चेहरे खुद को पा लेते हैं ................अबोध आकृति जब माँ की बाहों के घेरे में होती है तब वही उसका संसार होता है वही प्राप्य और वही संतोष .... !पर जब अक्षरों की शुरुआत होती है साथ में को...
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  May 27, 2012, 10:22 am
यह तलाश क्या है क्यूँ है और इसकी अवधि क्या है !क्या इसका आरम्भ सृष्टि के आरम्भ से है या सिर्फ यह वर्तमान है या आगत के भी स्रोत इससे जुड़े हैं ?क्या तलाश मुक्ति है या वह प्रलाप जो नदी के गर्भ में है या वह प्रवाह जिसका गंतव्य उसके समर्पण से जुड़ा है !जन्म का रहस्य जानना है या म...
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  May 25, 2012, 9:37 am
मैं समय हूँ तो क्या ? किसी से कुछ छिनने का ख्यालया यूँ हीं चलते हुए ले लेने काख्यालकभी नहीं आया .दिया तो पूरे मन से दियामीठे को मीठा ही रहने दियाकड़वे को कड़वा ....लेने में पूरा विश्वास रहासुनने में पूरा विश्वास रहामानने में पूरा विश्वास रहाकुछ चेहरों को मैंने झूठ से परे ...
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  May 24, 2012, 10:25 am
बन्द कमरे में या सड़कों परगुहार लगाती चीखों कोमैंने ठीक उसी तरहमहसूस किया हैजिस दहशत और बचाव की उम्मीद मेंवे गूंजती हैं !सांय सांय सी एक आवाज़दिल दिमाग मेंअंधड़ की मानिंद उठापटक करती है !तहसनहस मानसिक स्थिति कोसहेजने के क्रम मेंमैं कहाँ होती हूँ -खुद ही नहीं जान पाती ...
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  May 23, 2012, 8:45 am
मैंने जो जिया वो मेरा जूनून था , मेरे बदलते तर्क भी मेरा जूनून थे !मुझे बस जीना था और कमाल की बात हैसूरज चाँद सितारे धरती आकाश ...सबको जूनून रहा मेरे संग चलने काराह चलते जो मिला वह मेरे जूनून से जुड़ गया ............. इस कमाल में मैंने पाया कि मेरे पास अव्यवहारिक प्यार है , सोच है , कु...
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  May 18, 2012, 8:43 am
( माँ )सृष्टि तुम प्रकृति तुम सौन्दर्य तुम परिवर्तन तुम तुम ही हो विद्या तुम्हीं हो लक्ष्मीऔर साहसी दुर्गा तुमतुम हो सपना तुम्हीं हकीकतजीवन का हर स्रोत हो तुम ...शिव की जटा से निकली गंगाआदिशक्ति हो तुमतुम्हीं साज हो तुम्हीं हो गीततोतली भाषा भी तुमतुम्हीं खिलौनातुम्ह...
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  May 15, 2012, 10:01 am
( कवि मात्र खुद को कैनवस पर नहीं उतारता , बल्कि समग्रता में जीता है ..... चिड़िया की आँखों की भाषा लिखने से वह चिड़िया नहीं हो जाता , बल्कि वह एक संवेदनशीलता का उदाहरण है ... सिक्के के दूसरे पहलू को उजागर करने की चेष्टा ! )चाहो न चाहोज़िन्दगी बढ़ जाती हैएक क्षण भी नहीं रूकतीविचा...
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  May 14, 2012, 11:34 am
खुद की तलाश हर किसी को होती है .... बचपन में हम झांकते हैं कुँए में , जोर से बोलते हैं .... पानी में झांकता चेहरा , बोली की प्रतिध्वनि पर मुस्कुराना खुद को पाने जैसा प्रयास और सुकून है .... खुद को ढूंढना ' मैं ' के बंधन से मुक्त होता है , इस खोज में एक आध्यात्म होता है . इसे समझना , इसे व्...
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  May 10, 2012, 6:25 pm
मैं जीवन का सत्य लिखना चाहती हूँ बिल्कुल हँस की तरह दूध अलग पानी अलग ...पानी की मिलावट यानि झूठ की मिलावट अधिक होती है पर न ग्वाला मानता है न दुनिया ग्वाले के स्वर में भी सख्ती झूठे के स्वर में कभी तल्खी कभी बेचारगी ....... रिकॉर्ड करो - कोई फर्क नहीं पड़ता झूठ के पाँव बड़े मजबू...
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  April 4, 2012, 9:59 am
शब्दों की झोपड़ी में तुम्हें देखा था !!!...इतनी बारीकी से तुमने उसे बनाया था कि मुसलाधार बारिश हतप्रभ ...- कोई सुराख नहीं थी निकलने की कमरे में टपकने की !दरवाज़े नहीं थे -पर मजाल थी किसी की कि अन्दर आ जाए एहसासों की हवाएँ भी इजाज़त लिया करती थीं !न तुम सीता थी न उर्मिला न यशोदा न...
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  April 1, 2012, 12:42 pm
मुझे जानना हो तो तितली को देखोगौरैया को देखो पारो को देखोसोहणी को जानोमेरे बच्चों को देखो क्षितिज को देखोउड़ते बादलों को देखोरिमझिम बारिश को देखो बुद्ध को जानो.............जो उत्तर मिले मैं हूँ !ख़ामोशी को देखो बोलती आँखों को देखो इस पार उस पार का रहस्य जानो छत पर अटकी बारिश ...
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  March 30, 2012, 4:36 pm
हाँ मैं कृष्ण ----मैं तो कुछ कहता ही नहीं कह चुका जो कहना था गुन चुका जो गुनना था पर तुम सब अपने बंधन में आज भी हो ...कभी धृतराष्ट्र कभी दुर्योधन कभी शकुनी ....कभी कर्ण कभी अर्जुन कभी युद्धिष्ठिर !एक बार पूर्णतः यशोदा या राधा बनो न प्रश्न न संशय न हार न जीत बस ------ माखन और बांसुरी क...
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  March 27, 2012, 9:19 pm
तुम्हारी सोच मुझसे नहीं मिलती तो तुम बदल गए तुम्हारी मासूमियत खो गई तुम बनावटी हो गए तुमने अपने वक़्त को सिर्फ अपने लिए मोड़ दिया ................मेरी सोच तुमसे नहीं मिलती पर मैं तुम्हें अपनी सोच बताती गईतुम्हारी सोच सुनती गई .... आँधियाँ , तूफ़ान और बदलते लोग अपनी सोच के साथ ...मैं ...
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  March 20, 2012, 10:37 am
शब्दों का महाजाल कहें या मायाजाल फैलता जा रहा है जकड़ता जा रहा है अनकहे एहसासों का वक़्त नहीं अपनी डफली अपना राग है'हम सही ' बाकी शक के दायरे में तो स्पर्श का माधुर्य कहाँ और कैसा !शब्द जब बेमानी नहीं थे तो वे ही एहसास थे अब स्व के मद में शब्दों की पैदावार ही अप्राकृतिक हो ...
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  March 16, 2012, 12:59 pm
( महिला दिवस ! पर )मैं औरत हूँ नहीं चाहिए ऐसा कोई दिवस मुझे जिसमें तुम कुछ लिखो कुछ सूक्तियां कहो कुछ दर्द उजागर करो ... !मैं अपूर्ण हूँ ही नहीं जो एक दिवस के नाम पर तुम मुझे पूर्णता देने का प्रयास करो !अन्नपूर्णा को अपूर्ण तुमने बनाया तुम्हारी नियत , तुम्हारी मर्ज़ी ...निःसं...
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  March 4, 2012, 7:27 pm
देखा है मैंने अँधेरे से उभरते एक साए को - शायद मेरा था ... नहीं नहीं निःसंदेह मेरा ही था सुना मैंने सन्नाटों को - जो मेरे अन्दर की दबी घुटन से निकलते थे बिना किसी आहट के !खुद को कोसों दूर करके देखा - मैं हूँ या नहीं जानने के लिए कई बार करीब गई धड़कनों की थाह ली साँसों का एहसास लि...
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  February 22, 2012, 10:02 pm
कहाँ से आते हैं ये ख्याल ??? आँखों से टपकते उँगलियों में ऐंठते पाँव में जमते - होठों में सिले पर शब्द - अनवरत ...आँखों से ओझल ये कौन रोता हैकौन हथेलियों में आंसुओं के ओस रखता है भीगे भीगे से ख्यालों की सदा ये कौन देता है पनपते हैं शब्द अनवरत ...दहलीज़ पे होती है एक सरसराहट कमरे ...
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  December 23, 2011, 10:37 am
अमृता -एक टीनएजर की आँखों में उतरी तो उतरती ही चली गई ...वक़्त की नाजुकता रक्त के उबाल को किशोर ने समय दिया फिर क्या था समय अमृता को ले आया ....अमृता के पास शब्द थे इमरोज़ के पास सुकून का जादू जिससे मिला उसे दिया निःसंदेह अमृता ख़ास थी तो उसके घर का कोना कोना महक उठा इस सुकून स...
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  December 21, 2011, 5:05 pm
सन्नाटा मुझे पसंद नहीं नहीं अच्छा लगता मुझे जब अन्दर सांय सांय सा होता है न दिल धड़कता है न दिमाग कुछ सोचता है चेहरे पर अवाक सी लहरें उठती रहती हैं ...ऐसे में मैं गीतों की भीड़ में चली जाती हूँ यह गीत वह गीत ....देखते देखते ख्यालों में हल्की बारिश होने लगती है खुली हवा ... लहरा...
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  December 20, 2011, 9:31 am
जो मैं कहूँ वो तुम कहो - ज़रूरी नहीं फिर जो तुम कहते हो वही मैं भी कहूँ - क्यूँ ज़रूरी होता है ?मैं तो मानती हूँ कि विचारों की स्वतंत्रता ज़रूरी हैअपना अपना स्पेस ज़रूरी है तुम भी मानते हो ...तभी मेरी बात से अलग होकर तुम उसे सहज मानते हो पर मेरे अलग विचार से तुम बिफर उठते हो !य...
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  December 18, 2011, 6:39 pm
बात सकारात्मकता की हो नकारात्मकता की हो तो ग्लास आधा खाली है आधा भरा है का तर्क समझ में आता है पर पानी हो , प्यास हो और आधा ग्लास पानी मिले यह बात गले के नीचे नहीं उतरती ...वैसे गौर कीजिये ,यह तर्क एक ख़ास चेहरे की भंगिमा के साथ वही बताते हैं जो आधा ग्लास पानी देखते आगबबुला ह...
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  December 17, 2011, 7:53 am
उन्होंने बड़े प्यार से कहा -'तुम बहुत बहादुर हो "........ चेहरे पे मुस्कान उतर आई वर्षों की परिस्थितियों ने ली अंगड़ाई और मैंने खुद का मुआयना किया ...मैं एक डरपोक लड़की माँ की चूड़ियों में ऊँगली फंसाकर सोती थी ताकि जब भूत मुझे पकड़ने आए तो माँ की चूड़ियों में फंसी ऊँगली माँ को ...
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Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  December 14, 2011, 9:22 pm
तुम कुशल तैराक हो मैं तैरना नहीं जानती तुम प्रतीक्षित हो गुरुर में मैं पार पहुँचाने का आग्रह करुँगी ...सत्य है- मैं तैरना नहीं जानती पर पार पहुँचने की प्रबल चाह प्रभु से छुपी नहीं है नहीं छुपी है प्रभु से यह बात कि ...डूबने के भय से मैं आशंकित नहीं पानी में उतर ही जाऊँगी ऐसे ...
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Tag :सर्वाधिकार सुरक्षित
  December 12, 2011, 8:34 am
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