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उच्चारण

“आज हरेला है”उत्तराखण्ड की संस्कृति की धरोहर “हरेला” उत्तराखण्ड का प्रमुख त्यौहार है!उत्तराखण्ड के परिवेश और खेती के साथ इसका सम्बन्ध विशेषरूप से जुड़ा हुआ है! हरेला पर्व वैसे तो वर्ष में तीन बार आता है- 1- चैत्र मास में!(प्रथम दिन बोया जाता है तथा नवमी को काटा...
Tag :“हरेला”
  July 16, 2018, 6:48 am
आज 15 जुलाई, 2018 को अपराह्न् 2 बजे से साहित्य शारदा मंच, खटीमा द्वारा ब्लॉग सभागार, खटीमा (ऊधमसिंहनगर) मेंसमय-अपराह्न 2 बजे से पुस्तक विमोचन एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें-श्रीमती राधा तिवारी (राधेगोपाल) द्वारा रचित “सृजन कुंज” (काव्य संग्रह) एवं “जीवन का भूगोल...
Tag :
  July 15, 2018, 9:41 pm
सीधा-सादा. भोला-भाला।बच्चों का संसार निराला।।बचपन सबसे होता अच्छा।बच्चों का मन होता सच्चा।पल में रूठें, पल में मानें।बैर-भाव को ये क्या जानें।।प्यारे-प्यारे सहज-सलोने।बच्चे तो हैं स्वयं खिलौने।।बच्चों से नारी है माता।ममता से है माँ का नाता।।बच्चों से है दुनियादा...
Tag :बालकविता
  July 14, 2018, 8:01 pm
कर्कश सुर से तो होती है, खामोशी की तान भलीजल जाता शैतान पतिंगा, शम्मा सारी रात जलीदो पल का तूफान, तबाही-बरबादी को लाता हैकभी न थकती मन्द हवा, जो लगातार दिन-रात चलीबचपन-यौवन साथ न देता, कभी किसी का जीवन भरसिर्फ बुढ़ापे के ही संग में, इस जीवन की शाम ढलीसूखे भी हों पात शज़र के, ...
Tag :ग़ज़ल
  July 14, 2018, 8:10 am
अनुभव पर मेरे मुझे, रहता सदा यकीन। सागर की हर बूँद का, पानी है नमकीन।।देशद्रोह-अलगाव की, जहाँ भड़कती आग। उस केसर के खेत में, लगे खून के दाग।।मन को अब भाती नहीं, बहती हुई बयार। इसीलिए मैली हुई, गंगा जी की धार।।खूनी पंजे देखकर, सहमे हुए कपोत। खुद को सूरज कह रहे, अब छ...
Tag :सहमे हुए कपोत
  July 13, 2018, 7:44 am
सिक्कों में बिकने लगा, दुनिया में ईमान।लोग रूप की धूप पर, करते हैं अभिमान।।सदाचार का हो गया, दिन में सूरज अस्त। अपनी ही करतूत पर, लोग हो रहे मस्त।।तन-मन मैले हो रहे, झूठे हैं उपवास। मेल-जोल का हो गया, मेला बहुत उदास।।पंथ भिन्न तो क्या हुआ, सबका है ये देश।म...
Tag :लोग हो रहे मस्त
  July 12, 2018, 8:51 am
रंग भी रूप भी छाँव भी धूप भी,देखते-देखते ही तो ढल जायेंगे।देश भी भेष भी और परिवेश भी,वक्त के साथ सारे बदल जायेंगे।।ढंग जीने के सबके ही होते अलग,जग में आकर सभी हैं जगाते अलख,प्रीत भी रीत भी, शब्द भी गीत भी,एक न एक दिन तो मचल जायेंगे।वक्त के साथ सारे बदल जायेंगे।।आप चाहे भु...
Tag :गीत
  July 11, 2018, 6:00 am
 था कभी ये 'रूप' ऐसा।हो गया है आज कैसा?? बालपन में खेल खेले।दूर रहते थे झमेले।।छा गई थी जब जवानी।शक्ल लगती थी सुहानी।। तब मिला इक मीत प्यारा।दे रहा था जो सहारा।।खुशनुमा उपवन हुआ था।धन्य तब जीवन हुआ था।। बढ़ी गई जब मोह-माया।तब बुढ़ापे ने सताया।जब हुई कमजोर काय...
Tag :चक्र है आवागमन का
  July 10, 2018, 10:39 am
नदिया-नाले सूख रहे हैं, जलचर प्यासे-प्यासे हैं।पौधे-पेड़ बिना पानी के, व्याकुल खड़े उदासे हैं।।चौमासे के मौसम में, सूरज से आग बरसती है।जल की बून्दें पा जाने को, धरती आज तरसती है।।नभ की ओर उठा कर मुण्डी, मेंढक चिल्लाते हैं।बरसो मेघ धड़ाके से, ये कातर स्वर में ग...
Tag :कविता
  July 9, 2018, 6:35 am
नाम है कंटक हमारा, पालते हैं हम सुमन को।हम लुटेरों से बचाते जायेंगे, खिलते चमन को।।साये की मानिन्द रहते साथ में हम फूल के,गुल हमेशा हैं सुरक्षित गोद में ही शूल के,ख़ार ही तो बेधते हैं शत्रुओं के तन-बदन को।हम लुटेरों से बचाते जायेंगे खिलते चमन को।।पीर के पश्चात सुख देत...
Tag :देखना इस अंजुमन को
  July 8, 2018, 8:09 pm
आये थे हरि भजन को, ओटन लगे कपास। कैसे जीवन में उगे, हास और परिहास।।बन्धन आवागमन का, नियम बना है खास। अमर हुआकोई नहीं, बता रहा इतिहास।।निर्बल का मत कीजिए, कभी कहीं उपहास। आँधी में तूफान में, जीवित रहती घास।।तुलसी-सूर-कबीर की, मीठ-मीठी तान। निर्गुण-सगुण उपासना, भ...
Tag :दोहे
  July 7, 2018, 7:27 am
हमारा ही नमक खाते, हमीं पर वार करते हैं जहर मॆं बुझाकर खंजर, जिगर के पार करते हैं शराफत ये हमारी है, कि हम बर्दाश्त करते हैं नहीं वो समझते हैं ये, उन्हें हम प्यार करते हैं   हमारी आग में तपकर, कभी पिघलेंगे पत्थर भी पहाड़ों के शहर में हम, चमन गुलज़ार करते हैं कह...
Tag :ग़ज़ल
  July 6, 2018, 12:53 pm
आहत वृक्ष कदम्ब का, तकता है आकाश। अपनी शीतल छाँव में, बंशी रहा तलाश।।माटी जैसी हो वही, देता है आकार।कितने श्रम पात्र को, गढ़ता रोज कुम्हार।।शब्दों में अपने नहीं, करता कभी कमाल।कच्ची माटी जब मिले, दूँ साँचों में ढाल।।चिन्तन-मन्थन के लिए, मिलता कच्चा माल।र...
Tag :शैल सूत्र पत्रिका में मेरे दोहे
  July 5, 2018, 2:51 pm
गरमी का मौसम गया, शुरू हुआ चौमास। नभ के निर्मल नीर से, बुझी धरा की प्यास।।घिर आये आकाश में, सुबह-सुबह घन श्याम। धान रोपने खेत में, अब चल पड़े किसान।।जाड़े-पाले में हमें, अच्छा लगता घाम।बारिश से बरसात में, मिलता है आराम।।गति-यति, लय-तुक और गण, दोहे के हैं अंग।वो दोहे हो...
Tag :शुरू हुआ चौमास
  July 4, 2018, 4:01 am
पहले भी थे धरा पर, भोगी और असन्त। लेकिन अब अधिकांश हैं, कामी और कुसन्त।।दौलत से मत तौलना, करना मत व्यापार। ढाई आखर में छिपा, दुनियाभर का सार।।अब तो सेवाभाव का, खिसक रहा आधार।मक्कारी की बाढ़ में, घिरा हुआ संसार।।बन जाते हैं प्यार से, सारे बिगड़े काम।प्यार और अनुराग...
Tag :दोहे
  July 2, 2018, 4:24 pm
मई महीना आता है और, जब गर्मी बढ़ जाती है।नानी जी के घर की मुझको, बेहद याद सताती है।।तब मैं मम्मी से कहती हूँ, नानी के घर जाना है।नानी के प्यारे हाथों से, आइसक्रीम भी  खाना है।।कथा-कहानी मम्मी तुम तो, मुझको नही सुनाती हो।नानी जैसे मीठे स्वर में, गीत कभी नही ...
Tag :जुलाईः18
  July 1, 2018, 11:23 am
सारा जग वन्दन करे, खग करते हैं शोर। अँधियारे को चीर कर, जब आती है भोर।।देखा जब से आपको, छोड़ा पूजा-जाप।नहीं जानता पुण्य है, या फिर होगा पाप।।पूरे नहीं किये कभी, जनता के अरमान।फिर भी बहुमत कह रहा, शासक बहुत महान।।बोतल बदली पेय की, बदल न पाया माल। कोई भी शासक बने, जनता तो...
Tag :दोहे
  June 30, 2018, 8:26 am
मुझे तो छन्द और मुक्तक, बनाना भी नहीं आता।सही मतला, सही मक़्ता, लगाना भी नहीं आता।।दिलों के बलबलों को मैं, भला अल्फ़ाज़ कैसे दूँ,  मुझे लफ्ज़ों का गुलदस्ता, सजाना भी नहीं आता।सुहाने साज मुझको, प्यार से आवाज़ देते हैं,मगर मजबूर हूँ, इनको बजाना भी नहीं आता।भरा है प्यार ...
Tag :सही मक़्ता लगाना भी नहीं आता
  June 29, 2018, 4:13 pm
“ग़ज़लियात-ए-रूप”‘चेहरा चमक उठा,दमक उठा है रूप भी’     संसार की समस्त काव्यविधाओं में ग़ज़ल का एक विशिष्ट स्थान है। अपनी उत्स भूमि से उर्वरा लेकर यह काव्य रूप विभिन्न भाषाओं के साहित्य का एक ऐसा अहम अंग बन गया है जिसे ‘साधारण’ और ‘आम’ कहकर अनदेखा नहीं किया जा सकता ह...
Tag :दमक उठा है रूप भी’
  June 29, 2018, 9:52 am
“ग़ज़लियात-ए-रूप” की भूमिका”(डॉ. राजविन्दर कौर)क्या ग़ज़ल सिर्फ उर्दू की जागीर हैडॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’       मैंने सोशल साइटों पर देखा है कि डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’जी ने अब तक अनेकों पुस्तकों की भूमिकाएँ और समीक्षाएँ लिखी हैं और अब भी कई पुस्तकें स...
Tag :ग़ज़लियात-ए-रूप” की भूमिका
  June 28, 2018, 10:38 am
सम्बन्धों को लोग अब, देते नहीं महत्व। इसीलिए सौहार्द्र का, बिगड़ा हुआ घनत्व।दौलत पाने की लगी, दुनिया भर में होड़।नैतिकता को स्वार्थ में, लोग रहे अब छोड़।।इंसानों के आज तो, बड़े हो गये पेट।मानवता का कर रहे, मनुज स्वयं आखेट।।भगवा चोला पहन कर, सन्त बने शैतान। अब खुद क...
Tag :दोहे
  June 27, 2018, 10:12 am
सूरज आया गगन में, फैला धवल प्रकाश।मूरख दीपक हाथ ले, खोज रहा उजियास।।गले मिलें जब प्यार से, रामू और रसीद। अपने प्यारे देश में, समझो तब ही ईद।।अच्छी सूरत देखकर, मत होना अनुरक्त। जग के मायाजाल से, मन को करो विरक्त।।काली छतरी ओढ़ के, आते गोरे लोग।बारिश में करते सभी, छात...
Tag :मन को करो विरक्त
  June 26, 2018, 7:55 am
जिसमें रंग हजार हों, वही प्यार का रोग।अब तो मतलब के लिए, प्यार जताते लोग।।अपने निश्चय पर अडिग, रहता जो इनसान।मंजिल को पाना उसे, है बिल्कुल आसान।।सरल शब्द का कीजिए, कविता में उपयोग।जटिल काव्य को आजकल, नहीं पढ़ेंगे लोग।।जो दिल से निकले वही, कहलाता है भाव।उन भावों क...
Tag :दोहे
  June 25, 2018, 10:29 am
जब से मिली स्वतंत्रता, हुई सभ्यता नष्ट। अधिकारी अधिकांश हैं, आज देश में भ्रष्ट।।अपनी लीला जानता, खुद कोविद भगवान।झूठे दावे कर रहा, लेकिन अब इंसान।।नीला नभ नीला रहा, घटा नहीं चहुँ ओर।अब तो बिन बरसात के, दादुर करते शोर।।जब-जब बढ़ता धरा पर, अनाचार-अन्याय। तब होता प...
Tag :बढ़ा जगत में ताप
  June 24, 2018, 5:00 am
अपना आज सँवार लो, कर लो कर्म पुनीत। मौसम के उपहार हैं, गरमी-पावस-शीत।।उनके मँहगे बिल सभी, हो जाते है पास। जो सरकारी खर्च पर, नाप रहे आकाश।।जनसेवक तो देश के, होंगे नहीं विपन्न। भत्ते-वेतन छोड़ दें, फिर भी हैं सम्पन्न।।अब तो सेवाभाव का, खिसक रहा आधार।मक्कारी की बाढ़ ...
Tag :दोहे
  June 23, 2018, 5:30 am
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