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उच्चारण

इंसानों की बोली में, ईमान बदलते देखे हैं।धनवानों की झोली में, सामान बदलते देखे हैं।।सौंपे थे हथियार युद्ध में, अरि को सबक सिखाने को,उनका ही मुँह मोड़ दिया, अपनों को घाव खिलाने को,गद्दारों की गोली में, संधान बदलते देखे हैं।धनवानों की झोली में, सामान बदलते देखे हैं।।भार प...
Tag :गीत
  November 20, 2018, 3:31 pm
दिन है देवोत्थान का, व्रत-पूजन का खास।भोग लगा कर ईश को, तब खोलो उपवास।।--होते देवउठान से, शुरू सभी शुभ काम।दुनिया में सबसे बड़ा, नारायण का नाम।।--मंजिल की हो चाह तो, मिल जाती है राह।आज रचाओ हर्ष से, तुलसी जी का ब्याह।।--पूरी निष्ठा से करो, शादी और विवाह।बढ़ जाता शुभ कर्म से, ज...
Tag :दोहे
  November 19, 2018, 3:57 pm
आज दुर्गा की अवतार श्रीमती इन्दिरा गांधीका भी जन्मदिवस है। अमर वीरांगना झाँसी की महारानी लक्ष्मीबाई के193वें जन्म-दिवस पर उन्हें अपने श्रद्धासुमन समर्पित करते हुएश्रीमती सुभद्राकुमारी चौहान कीयह अमर कविता सम्पूर्णरूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ!सिंहासन हिल ...
Tag :
  November 19, 2018, 12:15 pm
शीतल धरा और शीतल गगन हैकड़ाके की सरदी में, ठिठुरा बदन हैउड़ाते हैं आँचल, हवा के झकोरे,काँटों की गोदी में, पलता सुमन हैमिली गन्ध मधु की, चले आये भँवरेहँसे फूल-कलियाँ, महकता चमन हैपरेशान नदियाँ है, नालों के डर से.बिना जल के होता नहीं आचमन हैभरी “रूप” में आज कितनी मिलावटखुश ...
Tag :महकता चमन है
  November 18, 2018, 11:48 am
‘‘आर्य समाज:बाबा नागार्जुन की दृष्टि में’’ (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')        राजकीय महाविद्यालय, खटीमा में हिन्दी के विभागाध्यक्ष वाचस्पति शर्मा थे । बाबा नागार्जुन अक्सर उनके यहाँ प्रवास किया करते थे । इस बार भी जून के अन्तिम सप्ताह में बाबा का प्रवास खटी...
Tag :संस्मरण
  November 17, 2018, 12:15 pm
आओ माता! सुवासित करो मेरा मन।शारदे माँ! तुम्हें कर रहा हूँ नमन।।घोर तम है भरा आज परिवेश में,सभ्यता सो गई आज तो देश में,हो रहा है सुरा से यहाँ आचमन।शारदे माँ! तुम्हें कर रहा हूँ नमन।।दो सुमेधा मुझे मैं तो अनजान हूँ,माँगता काव्य-छन्दों का वरदान हूँ,चाहता हूँ वतन में सदा...
Tag :वन्दना
  November 16, 2018, 4:18 pm
कभी आरम्भ की शिक्षा, भुलायी ही नहीं जातीभवन के नींव की ईंटे, दिखायी ही नहीं जातीजमाने भर की कमियाँ, हम जमाने को बताते हैंमगर सन्तान की कमियाँ, गिनायी ही नहीं जातीजो दिलवर चोर हैं वो डालते खुलकर डकैती कोमगर दौलत स्वयं अपनी, चुरायी ही नहीं जातीकभी जो दिल के दरवाजे पे, दस्त...
Tag :नहीं जाती
  November 15, 2018, 8:00 am
काले रंग का चतुर-चपल,पंछी है सबसे न्यारा।डाली पर बैठा कौओं का, जोड़ा कितना प्यारा।नजर घुमाकर देख रहे ये,कहाँ मिलेगा खाना।जिसको खाकर कर्कश स्वर में,छेड़ें राग पुराना।।काँव-काँव का इनका गाना,सबको नहीं सुहाता।लेकिन बच्चों को कौओं का,सुर है बहुत लुभाता।।कोयलिया की कु...
Tag :बालकविता
  November 14, 2018, 10:47 am
बच्चों के प्यारे चाचा नेहरू कोशत्-शत् नमन!जिस दिन लाल जवाहर ने था,जन्म जगत में पाया।उसका जन्मदिवस भारत मेंबाल दिवस कहलाया।।मोती लाल पिता बैरिस्टर,माता थी स्वरूप रानी।छोड़ सभी आराम-ऐश को,राह चुनी थी बेगानी।।त्याग वकालत को नेहरू ने,गांधी का पथ अपनाया।उसका जन्मदिवस भ...
Tag :
  November 13, 2018, 5:15 pm
बालगीत और बालकविता             बहुत से लोग जानकारी के अभाव में बाल गीत को बाल कविता और बालकविता को बालगीत लिख देते हैं। किन्तु यह विचार नहीं करते कि बालकविता और बालगीत कोई नयी विधा नहीं है। गीत से बालगीत और कविता से बालकविता बना है। अर्थात् बच्चों के लिए ...
Tag :बालगीत और बालकविता में भेद
  November 13, 2018, 10:24 am
छठपूजा का आ गया, फिर पावन त्यौहार।माता जन-गण के हरो, अब तो सभी विकार।।लोग छोड़कर आ गये, अपने-अपने नीड़।सरिताओं के तीर पर, लगी हुई है भीड़।।अस्तांचल की ओर जब, रवि करता प्रस्थान।छठ पूजा पर अर्घ्य तब, देता हिन्दुस्थान।।परम्पराओं पर टिका, सारा कारोबार।मान्यताओं में है छिप...
Tag :छठपूजा
  November 11, 2018, 3:39 pm
सरपंच मेरे गाँव के, कितने कमाल केहोते हैं फैसले जहाँ, सिक्का उछाल केबन्दों के साथ भेद-भाव, कर रहे खुदाइंसाफ के मन्दिर में, जाना देखभाल केजब बिक गया ज़मीर तो, नज़ीर क्या करेमिलते नहीं जवाब हैं, सीधे सवाल केहोली में भाईचारा तो, कब से जुदा हुआबेरंग हो गये हैं रंग, अब गुला...
Tag :सरपंच मेरे गाँव के
  November 11, 2018, 10:49 am
मेरी पुस्तक "स्मृति उपवन"से एक संस्मरण-"तू से आप और सर"(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') --     लगभग तैंतालीस साल पुरानी बात है। उस समय उत्तराखण्ड राज्य नही बना था। विशाल उत्तर-प्रदेश था। मेरा निवास उन दिनों नेपाल सीमा पर बसे छोटे से स्थान बनबसा में हुआ करता था। बन...
Tag :संस्मरण
  November 10, 2018, 10:26 am
 चाहे कवितायें लिखो, चाहे लिखो निबन्ध।भावनाओं का चाहिए, दोनों में सम्बन्ध।।यादों में आने लगे, अगर अनोखी गन्ध।समझो तब अजनबी से, हुआ नया अनुबन्ध।।छोटा हो या हो बड़ा, या साझा परिवार।ताल-मेल के साथ में, चलता है संसार।।दनुज-मनुज के भेद का, हो कैसे अनुमान।पग-पग पर इंसा...
Tag :दोहे
  November 9, 2018, 10:20 am
मेरे भइया तुम्हारी हो लम्बी उमर, कर रही हूँ प्रभू से यही कामना।लग जाये किसी की न तुमको नजर,दूज के इस तिलक में यही भावना।।चन्द्रमा की कला की तरह तुम बढ़ो,उन्नति के शिखर पर हमेशा चढ़ो,कष्ट और क्लेश से हो नही सामना।दूज के इस तिलक में यही भावना।।थालियाँ रोली चन्दन की सजती ...
Tag :भाईदूज का तिलक
  November 8, 2018, 2:57 pm
यज्ञ-हवन करके बहन, माँग रही वरदान।भइया का यमदेवता, करना तुम कल्याण।।--भाई बहन के प्यार का, भइया-दोयज पर्व।अपने-अपने भाई पर, हर बहना को गर्व।।--तिलक दूज का कर रहीं, सारी बहनें आज।सभी भाइयों के बने, सारे बिगड़े काज।।--रोली-अक्षत-पुष्प का, पूजा का ले थाल।बहन आरती कर रही, मंगल दी...
Tag :दोहे
  November 8, 2018, 2:51 pm
अन्नकूट पूजा करो, गोवर्धन है आज।गोरक्षा से सबल हो, पूरा देश समाज।१।श्रीकृष्ण ने कर दिया, माँ का ऊँचा भाल।सेवा करके गाय की, कहलाये गोपाल।२।गौमाता से ही मिले, दूध-दही, नवनीत।सबको होनी चाहिए, गौमाता से प्रीत।३।गइया के घी-दूध से, बढ़ जाता है ज्ञान।दुग्धपान क...
Tag :दोहे
  November 7, 2018, 6:00 pm
देती नरकचतुर्दशी, सबको यह सन्देश।साफ-सफाई को करो, सुधरेगा परिवेश।।--दीपक यम के नाम का, जला दीजिए आज।पूरी दुनिया से अलग, हो अपने अंदाज।।--जन्मे थे धनवन्तरी, करने को कल्याण।रहें निरोगी सब मनुज, जब तक तन में प्राण।।--भेषज लाये धरा से, खोज-खोज भगवान।धन्वन्तरि संसार को, देते ज...
Tag :धन्वन्तरि संसार को देते जीवनदान
  November 7, 2018, 12:13 pm
दीवाली पर आओ मिलकर,नन्हें दीप जलायें हमघर-आँगन को रंगोली से,मिलकर खूब सजायें हमआओ स्वच्छता के नारे कोदुनिया में साकार करेंचीन देश की चीजों कोहम कभी नहीं स्वीकार करेंछोड़ साज-संगीत विदेशीदेशी साज बजायें हमघर-आँगन को रंगोली से,मिलकर खूब सजायें हमकंकरीट की खेती सेधरत...
Tag :गीत
  November 7, 2018, 11:48 am
दीप खुशियों के जलाओ, आ रही दीपावली।रौशनी से जगमगाती, भा रही दीपावली।।क्या करेगा तम वहाँ, होंगे अगर नन्हें दिए,रात झिल-मिल कर रही नभ में सितारों को लिए,दीन की कुटिया में खाना, खा रही दीपावली।रौशनी से जगमगाती, भा रही दीपावली।।नेह के दीपक सभी को अब जलाना चाहिए,प्यार से उल्...
Tag :दीप खुशियों के जलाओ
  November 6, 2018, 12:57 pm
एक दीपक तुम जलाओ, एक दीपक हम जलायें।आओ मिलकर इस धरा को, रौशनी से जगमगायें।।आज दूषित सभ्यता की, चल रहीं हैं आँधियाँ,आग में अलगाव की तो, जल रही हैं वादियाँ,नफरतों को दूर करके, एकता की धुन बजायें।आओ मिलकर इस धरा को, रौशनी से जगमगायें।।वतन में गन्दी सियासत, सेंकत...
Tag :गीत
  November 5, 2018, 8:48 am
हिन्दुस्तानी सभ्यता, पर होता है गर्व।पञ्च पर्व के साथ में, जुड़ा दीवाली पर्व।।धनतेरस त्यौहार पर, घर लाना कंदील।लाना शुद्ध मिठाइयाँ, और धान की खील।।पर्व सभी देते हमें, यह पावन सन्देश।कूड़ा-करकट को हटा, स्वच्छ करो परिवेश।।दीपक यम के नाम का, कूड़ाघर पर बाल।इसे बालन...
Tag :धनतेरस
  November 4, 2018, 12:28 pm
बाबा नागार्जुन के साथ बागों की सैरइसी वर्ष प्रकाशित मेरी पुस्तक "स्मृति उपवन” से एक संस्मरण-       बाबा नागार्जुन ने अपने यायावर स्वभाव को अन्त तक जी भरके जिया। इसका जीता जागता प्रमाण मुझे बाबा के साथ बिताये गये कुछ दिनों में मिला।      बाबा को आम ...
Tag :संस्मरण
  November 3, 2018, 12:53 pm
जय विजय पत्रिका केनवम्बर अंक में मेरा गीतमहक रहा है मन का आँगन,दबी हुई कस्तूरी होगी।दिल की बात नहीं कह पाये,कुछ तो बात जरूरी होगी।।सूरज-चन्दा जगमग करते,नीचे धरती, ऊपर अम्बर।आशाओं पर टिकी ज़िन्दग़ी,अरमानों का भरा समन्दर।कैसे जाये श्रमिक वहाँ पर,जहाँ न कुछ मजदूरी होगी...
Tag :जयविजय नवम्बर 2018
  November 2, 2018, 10:30 am
मनमोहक सबको लगें, झालर-बन्दनवार।जगमग करती रौशनी, सजे हुए बाजार।।--मन सबका ललचा रहे, काजू औ’ बादाम।लेकिन श्रमिक-किसान की, नहीं जेब में दाम।।--धनवानों के है लिए, दीपों का त्यौहार।जुआ खेलते शान से, जीत रहे या हार।।--बाजारों में धान का, गिरा हुआ है भाव।धरती के भगवान के, घर मे...
Tag :दोहे
  November 1, 2018, 4:03 pm
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