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उच्चारण

नहीं मिलेगी किसी को, बत्ती नीली-लाल।अफसरशाही को हुआ, इसका बहुत मलाल।।--लाल बत्तियों पर लगी, अब भगवा की रोक।।सत्ता भोग-विलास में, छाया भारी शोक।।--लालबत्तियाँ पूछतीं, शासन से ये राज़।इतने दशकों बाद क्यों, गिरी अचानक ग़ाज़।।--नेताओं का पड़ गया, चेहरा आज सफेद।पलक झपकते मिट ...
Tag :बत्ती नीली-लाल
  April 23, 2017, 12:51 pm
पढ़े-लिखे करते नहीं, पुस्+तक से सम्वाद।इसीलिए पुस्+तक-दिवस, नहीं किसी को याद।।--पुस्+तक उपयोगी नहीं, बस्ते का है भार।बच्चों को कैसे भला, होगा इनसे प्यार।।--अभिरुचियाँ समझे बिना, पौध रहे हैं रोप।नन्हे मन पर शान से, देते कुण्ठा थोप।।--बालक की रुचियाँ समझ, देते नहीं सुझाव...
Tag :दोहे
  April 23, 2017, 6:42 am
कम्प्यूटर और इण्टरनेट (चार कुण्डलियाँ)(१)जालजगत है देवता, कम्प्यूटर भगवान।शोभा है यह मेज की, ऑफिस की है शान।।ऑफिस की है शान, बनाता अनुबन्धों को।सारे जग में सदा, बढ़ाता सम्बन्धों को।।कह मयंक कविराय, अनागत ही आगत है।सबसे ज्ञानी अब दुनिया में जालजगत है।।(२)कम्...
Tag :कुण्डलियाँ
  April 23, 2017, 4:00 am
एक साल में एक दिन, धरती का त्यौहार।धरा दिवस का सपन फिर, होगा फिर साकार।१।--कंकरीट जबसे बना,  जीवन का आधार।धरती की तब से हुई, बड़ी करारी हार।२।--पेड़ कट गये धरा के, बंजर हुई जमीन।प्राणवायु घटने लगी, छाया हुई विलीन।३।--नैसर्गिक अनुभाव का, होने लगा अभाव।दुनिया में होने लगे, म...
Tag :धरती का त्यौहार
  April 22, 2017, 5:45 am
अपना धर्म निभाओगे कबजग को राह दिखाओगे कबअभिनव कोई गीत बनाओ,घूम-घूमकर उसे सुनाओस्नेह-सुधा की धार बहाओवसुधा को सरसाओगे कबजग को राह दिखाओगे कबसुस्ती-आलस दूर भगा दोदेशप्रेम की अलख जगा दोश्रम करने की ललक लगा दोनवअंकुर उपजाओगे कबजग को राह दिखाओगे कबदेवताओं के परिवारों स...
Tag :गीत
  April 22, 2017, 4:00 am
हो गया मौसम गरम,सूरज अनल बरसा रहा।गुलमोहर के पादपों का,“रूप” सबको भा रहा।।दर्द-औ-ग़म अपना छुपा,हँसते रहो हर हाल में,धैर्य मत खोना कभी,विपरीत काल-कराल में,चहकता कोमल सुमन,सन्देश देता जा रहा।गुलमोहर के पादपों का,“रूप” सबको भा रहा।।घूमता है चक्र, दुख के बाद, सुख भी आय...
Tag :सूरज अनल बरसा रहा
  April 21, 2017, 6:25 am
सभी तरह की निकलती, बातों में से बात।बातें देतीं हैं बता, इंसानी औकात।।--माप नहीं सकते कभी, बातों का अनुपात।रोके से रुकती नहीं, जब चलती हैं बात।।--जनसेवक हैं बाँटते, बातों में खैरात।अच्छी लगती सभी को, चिकनी-चुपड़ी बात।।--नुक्कड़-नुक्कड़ पर जुड़ी, छोटी-बड़ी जमात।ठलवे ...
Tag :बातों का अनुपात
  April 20, 2017, 10:25 am
इंसानों की बोली में, ईमान बदलते देखे हैं।धनवानों की झोली में, सामान बदलते देखे हैं।।सौंपे थे हथियार युद्ध में, अरि को सबक सिखाने को,उनका ही मुँह मोड़ दिया, अपनों को घाव खिलाने को,गद्दारों की गोली में, संधान बदलते देखे हैं।धनवानों की झोली में, सामान बदलते देखे हैं।।भार प...
Tag :मैदान बदलते देखे हैं
  April 19, 2017, 6:14 am
पग-पग पर है घेरती, सौतन जिसको आज।उस भाषा के जाल में, जकड़ा हुआ समाज।।--कविता हिन्दी की मगर, अँगरेजी का जोर।छिपा हुआ बैठा अभी, दाढ़ी में है चोर।।--अँगरेजी का दिलों पर, छाया हुआ बुखार।कदम-कदम पर हो रही, हिन्दी की ही हार।।--आसन पर सब बैठ कर, करते हैं आखेट।भाषा के तो नाम पर, होते ल...
Tag :दोहे
  April 18, 2017, 6:44 am
 पैंसठ वर्षों तक रहा, माता जी का साथ।जब से माँ सुरपुर गयी, मैं हो गया अनाथ।।जगदम्बा के रूप में, रहती थी हर ठाँव।माँ के आँचल में मिली, मुझको हमेशा छाँव।।ममता का जिसकी नहीं, होता कोई अन्त।उस माँ के दिल में बसा, करुणा-प्यार अनन्त।।मतलब का संसार है, मतलब के उपहार।लेकिन दुनि...
Tag :दोहे
  April 17, 2017, 6:09 am
शून्य में दुनिया समायी, शून्य से संसार है।शून्य ही विज्ञान का अभिप्राण है आधार है।।शून्य से ही नाद है और शून्य से ही शब्द हैं।शून्य के बिन, प्राण-मन, सम्वेदना निःशब्द हैं।।शून्य में हैं कल्पनाएँ, शून्य मे है जिन्दगी।शून्य में है भावनाएँ, शून्य में है बन्दगी।।श...
Tag :शून्य पर ही अन्त है
  April 15, 2017, 6:06 am
केवल मन में था बसा, धन का जिनके भाव।डूब गयी मझधार में, उनकी छल की नाव।।--देखा मद में चूर हैं, अपने जहाँपनाह।तब चल पड़े वजीर सब, पकड़ दूसरी राह।।--सोचा आम चुनाव में, पा जाऊँगा वोट।हार गये दोनों जगह, नीयत में था खोट।।--इतना भोला भी नहीं, प्रान्त उत्तराखण्ड।हरदा के अभिमा...
Tag :फुटकर दोहे
  April 13, 2017, 7:21 pm
कोई भी होता नहीं, छन्दों में निष्णात।दोहों में ही कीजिए, सीधी-सच्ची बात।।आकर्षित सबको करे, यौवन का ही रूप।हो जाता निस्तेज तन, जब ढल जाती धूप।।जीवन में मिलते सदा, पग-पग पर आघात।दोहों में ही कीजिए, सीधी-सच्ची बात।।सरल नहीं है विरल है, ऊँची-नीची राह।मंजिल तो उनको मिले, जिनक...
Tag :मानस के अनुभाव
  April 13, 2017, 9:45 am
ढल गयी है अब जवानीमिट गयी है सब रवानीशाम देती है अन्धेरासुबह होती है सुहानीदे रहे खण्डहर गवाहीबस यही थोड़ी निशानीजिस्म में अब दम नहीं हैसिर्फ जुमले हैं जुबानीआजमाती हर बशर कोजिन्दगी कितनी सयानीजर्द हों पत्ते भले हीरौब अब भी है पठानी“रूप”अब वैसा नहीं है...
Tag :हो गयी पूरी कहानी
  April 12, 2017, 1:07 pm
खेतों में बिरुओं पर जब, बालियाँ सुहानी आती हैं।जनमानस के अन्तस में तब, आशाएँ मुस्काती हैं।।सोंधी-सोंधी महक उड़ रही, गाँवों के गलियारों में,खुशियों की भरमार हो रही, आँगन में, चौबारों में,बैसाखी आने पर रौनक, चेहरों पर आ जाती हैं।जनमानस के अन्तस में तब, आशाएँ मुस्काती हैं।...
Tag :बैसाखी आने पर जामुन भी बौराया है
  April 12, 2017, 7:03 am
 धीर-वीर, रक्षक प्रबल, बलशाली-हनुमान।जिनके हृदय-अलिन्द में, रचे-बसे श्रीराम।।--महासिन्धु को लाँघकर, नष्ट किये वन-बाग।असुरों को आहत किया, लंका मे दी आग।।--कभी न टाला राम का, जिसने था आदेश।सीता माता को दिया, रघुवर का सन्देश।।--लछमन को शक्ति लगी, शोकाकुल थे राम।बूटी लाने पव...
Tag :पवनपुत्र हनुमान
  April 11, 2017, 3:12 pm
नकल विदेशों की करें, ऋषियों की सन्तान।चित्रगीत को हाइगा, बतलाते नादान।। भूल गये अपनी विधा, छन्दों का विज्ञान।क्षणिकाओं को भूलकर, रहा हाइकू ध्यान।। वेदों ने हमको दिया, आदिकाल में ज्ञान।इनके जैसा है नहीं, जग में छन्दविधान।। हमने दुनिया को दिया, कविताओं का ढंग।किन...
Tag :रहा हाईकू ध्यान
  April 9, 2017, 7:05 pm
नकल विदेशों की करें, ऋषियों की सन्तान।चित्रगीत को हाइगा, बतलाते नादान।। भूल गये अपनी विधा, छन्दों का विज्ञान।क्षणिकाओं को भूलकर, रहा हाईकू ध्यान।। वेदों ने हमको दिया, आदिकाल में ज्ञान।इनके जैसा है नहीं, जग में छन्दविधान।। हमने दुनिया को दिया, कविताओं का ढंग।किन...
Tag :रहा हाईकू ध्यान
  April 9, 2017, 7:00 pm
आदमी के इरादे बदलने लगेदीन-ईमान पल-पल फिसलने लगेचल पड़ी गर्म अब तो हवाएँ यहाँसभ्यता के हिमालय पिघलने लगेफूल कैसे खिलेंगे चमन में भला,लोग मासूम कलियाँ मसलने लगे।अब तो पूरब में सूरज लगा डूबनेपश्चिमी रंग में लोग ढलने लगेदेख उजले लिबासों में मैले मगरशान्त सागर के आँसू न...
Tag :दीन-ईमान पल-पल फिसलने लगे
  April 9, 2017, 4:25 am
झुकी पत्तियाँ पेड़ की, करती क्रन्दन आज। गरमी में बारिश हुई, सहमा देश-समाज।१। --धरा-गगन में हो रहा, बेमौसम माहौल। चपला करती गर्जना, बादल बोले बोल।२। --उमड़-घुमड़कर आ रहे, अब नभ में घनश्याम। फसलों का भी हो गया, अब तो काम तमाम।३। -- गेहूँ की है दुर्दशा, महँगाई की मार। जीव...
Tag :हुए हौसले पस्त
  April 7, 2017, 6:38 am
माँ के चेहरे पर रहे, सहज-सरल मुसकान।माता से बढ़कर नहीं, कोई देव महान।।--व्रत-तप-पूजन के लिए, आते हैं नवरात।माँ को मत बिसराइए, कैसे हों हालात।।--बिना अर्चना के नहीं, मिलता है वरदान।प्रतिदिन करना चाहिए, माता का गुणगान।।--जय दुर्गा नवरात में, बोल रहे थे लोग।बाकी पूरे सा...
Tag :लोगों का आहार
  April 6, 2017, 7:43 pm
याद हमेशा कीजिए, वीरों का बलिदान।सीमाओं पर देश की, देते जान जवान।।--उनकी शौर्य कहानियाँ, गाते धरती-व्योम। आजादी के यजन में, किया जिन्होंने होम।।--नेता मेरे देश के, ऐसे हैं मरदूद।भाषण तक सीमित हुए, जिनके आज वजूद।।--आज हमारे देश में, सबसे दुखी किसान।फाँसी खा कर मर रहे, ...
Tag :सबसे दुखी किसान
  April 5, 2017, 6:09 am
सरदी का मौसम गया, हुआ शीत का अन्त।खुशियाँ सबको बाँटकर, वापिस गया बसन्त।।--गरम हवा चलने लगी, फसल गयी है सूख।घर में मेहूँ आ गये, मिटी कृषक की भूख।।--नवसम्वत् के साथ में, सूरज हुआ जवान।नभ से आग बरस रही, तपने लगे मकान।।--हिमगिरि से हिम पिघलता, चहके चारों धाम।हरि के दर्शनमात्र...
Tag :सूरज हुआ जवान
  April 3, 2017, 12:45 pm
जाने कैसे भूल हो गई, अन्तर्मन को पढ़ने में।कल्पनाएँ निर्मूल हो गईं, पाषाणों को गढ़ने में।हार नहीं मानी मैंने, संघर्षों के तूफानों से,राहें ही प्रतिकूल हो गईं, सोपानों को चढ़ने में।उठती-गिरती लहरों से, नौका को सदा बचाया है,भरी जवानी धूल हो गई, तूफानों से लड़ने में।आ...
Tag :ग़ज़ल
  April 3, 2017, 6:10 am
मूरख दिवस मना रहे, लोग शान से आज।गुणवन्तों के दिवस का, कोई नहीं रिवाज।।--लोगों को रुचने लगा, मूरखपन का खेल। मूरख की संसार में, खूब फैलती बेल।।--जो सुपात्र हैं जगत में, वो हैं आज उदास।मगर निठल्लों के भरा, तन-मन में उल्लास।। --बेवकूफ खुश हो रहे, देख निराले ढंग।उनके जीवन ...
Tag :दोहे
  April 1, 2017, 9:23 pm
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