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do patan ke bich : View Blog Posts
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do patan ke bich

बिहार के सीमांत जिले अररिया, किशनगंज, कटिहार और पूर्णिया में पोरस बॉर्डर से होकर जो समस्याएं प्रवेश कर रही हैं, उनके दूरगामी परिणाम घातक होंगे। सतत घुसपैठ ने जहां इन इलाकों को मानव से लेकर मवेशी तस्करों का पसंदीदा ठिकाना बना दिया है, वहीं गरीबी, जनसंख्या विस्फोट, धार...
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  June 30, 2014, 5:12 pm
 दहाये हुए देस का दर्द-87कोशीके कछार पर स्थित मेरा गांव सिमराही बाजार, जिला- सुपौल, बिहार आज राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में है। आज यहां नरेंद्र मोदी के कदम पड़ने वाले हैं,जो पटना विस्फोट में मारे गये भरत रजक के परिजनों से मिलने उनके घर पहुंच रहे हैं। गांव से आने वाले म...
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  November 2, 2013, 6:03 pm
यह है कोसी का कछार। रेणु साहित्य के अलावा अन्यत्र इस इलाका के आर्थिक पिछड़ेपन और दुरुह भूगोल की चर्चा बहुत कम हुई है। इस इलाके के दुरुह भूगोल का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अंग्रेज शासन के दौरान यहां काम करने वाले अधिकारी को अंडमान की तरह अलग से विशेष भत्ता दिय...
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  October 3, 2013, 6:42 pm
समंदर ! अगर रास्ता आगे से बंद न किया गया होता अगर दिल्ली इस कदर बिल्ली न हुई होतीऔर बहती हुई हवा रोकी न गयी होतीऔर निकले हुए आंसू, पोंछे गये होते,सच कहते हैं समंदरतब तेरी शान में हम गड्ढे वाले भी गाते पूनम की रात, ज्वार-भाटे के गीत  ...
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  September 7, 2013, 3:57 pm
बच्चा कोई भी होबीच खेल से बांह पकड़कर खींच लाओ,तो रोता है  कुछ चॉकलेट लेकर चुप हो जाता है कुछ चॉकलेट फेंककर भी चुप नहीं होतामगर हम नहीं समझतेशायद इसलिए कि हम चॉकलेट देने और बांह मरोड़ने के आगेसोच ही नहीं पाते...
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Tag :Kavita
  June 9, 2013, 12:16 pm
   वह पानी का जीव कभी नहीं था पर पानी के पास ही रहता आया, सदियों से पानी के बिल्कुल पास, मगर लहरों से बहुत दूर हालांकि युगों के साथ उसके रंग बदलते रहे  लेकिन उसके मुंह का गंध कभी नहीं बदला  रत्ती भर भोथरा नहीं हुआ उसकी चोंच का नोक तमाम नारे और तमाम अकाल के बाद भी  वह बगुला ह...
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Tag :Kavita
  May 25, 2013, 6:49 pm
केंद्र सरकार का मनरेगा और राज्य सरकार का विकास का मोहक नारा के बीच बिहार में मजदूर दिवस के क्या मायने हैं। रोजी-रोटी के लिए परदेस की यात्रा और पलायन की पीड़ा। यही बिहार के कामगारों की गाथा है। पहले भी थी और आज भी है। हिंदी दैनिक राष्ट्रीय सहाराके पटना संस्करण में प्रकाश...
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  May 1, 2013, 1:19 pm
दहाये हुए देस का दर्द - 86पूजा, कबूला और चढ़ावा ! फसल में दाना नहीं आया, तो ग्राम देवता को कबूला। रोग नहीं छूट रहा, तो सिंघेश्वर भगवान को कबूला। बेटा नहीं जनम रहा, तो बाबा वैद्यनाथ को कांवर भरकर जल चढ़ाने का कबूला। बारिश के लिए टोटका, तो बाढ़ नहीं आने के लिए भी टोना-टोटका। चढ़ावा क...
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  April 30, 2013, 2:00 pm
दहाये हुए देस का दर्द - 86पूजा, कबूला और चढ़ावा ! फसल में दाना नहीं आया, तो ग्राम देवता को कबूला। रोग नहीं छूट रहा, तो सिंघेश्वर भगवान को कबूला। बेटा नहीं जनम रहा, तो बाबा वैद्यनाथ को कांवर भरकर जल चढ़ाने का कबूला। बारिश के लिए टोटका, तो बाढ़ नहीं आने के लिए भी टोना-टोटका। चढ़ावा क...
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  April 30, 2013, 2:00 pm
 अवाम होने के मजाक में मुंह मूंदकर रोते जाना आंख खोलकर सोये रहना हमारी नियति नहीं, अवसाद हैबगुल-ध्यान में है "मसीहा''बायें हाथ में जाल, दायें में हथियार हैहमेशा आस्तीन में छिपा था जवाबआज भी दर-दर भटक रहा मूल सवाल है...
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Tag :Kavita
  March 23, 2013, 4:19 pm
एक पीढ़ी तैयार होगीलूटे हुए पैसों के पालने में झूलती हुईघोटाले के उड़नखटोले में उड़ती हुईबेईमानी की छत के नीचे  सोती हुई हर फिक्र को हवा में उ़डाती हुई यह पीढ़ी जवान होगी शायद अनजान ही रहेगी इतिहास सेठीक उसी समय एक दूसरी पीढ़ी भी रहेगी लूटे हुए खेतों में रोती हुई छीने हुए घ...
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Tag :Kavita
  March 11, 2013, 1:56 pm
आपऔर आपे का तापतपने से क्या होता है हमने लोहे को चटकते देखा है।चैत्य की दूब से पूछोसावनी अहंकार के बारे मेंहां,रोशनी पकाता और परोसता है सूरज प्रकाश खाने वालों को ब्लैकहोल कहते हैं ।...
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Tag :Kavita
  November 16, 2012, 6:32 pm
 ताले जितने थे सबके सब तोड़े जा चुके  और हम अब भी चाबी संभाल रहे  जवाब नहीं हमारा पहले खाते हम थे मेमियाता था मेमना  अब हम खाते भी हैं, मेमियाते भी हैं...
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Tag :Kavita
  November 2, 2012, 5:06 pm
     अपने वजूद के पतंग में   अक्सर भरोसे की डोरी बांधता हूं    और    उस मैदान का आंसू पोंछता हूं    जिसका धावक दौड़ हार गया है    भरोसा जरूरी है   आदमी के लिए    मैं भटकी नदी को समुद्र का पता बताता हूं    बछड़ा जरूर कूदेगा      मैं उख़ड़े खूंटे गाड़ रहा हूं ...
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Tag :Kavita
  September 25, 2012, 12:37 pm
पड़ोसी पेटजरूआ न कहेपानी पीकर डकारते  रहे बाप कई-कई  रातकई-कई  सालपेट को कोई कितना परतारेपानी पीकर कब तक कोई डकारता  रहेअब आती है भूख, तो चलते हैं हाथजलता है दिमाग आप कह सकते हो मुझे द्रोहीराजनीतिक विरोधी या बहका हुआ कोई अलोकतांत्रिक नहीं, मुझे नहीं है विश्वासमैं प्रजा...
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Tag :Kavita
  September 24, 2012, 7:11 pm
बिहार की धरती दर्शन और अध्यात्म के लिए सदियों से प्रसिद्ध रही है। आदि काल में बुद्ध, महावीर, नागार्जुन, गार्गी, मैत्रयी और याज्ञवलक्य ने बिहार का मान बढ़ाया तो प्राचीन काल में चाणक्य ने अपने तत्व ज्ञान से दुनिया को चकित किया। आधुनिक काल में महिर्षी मेंही ने इस परंपरा को ...
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  September 23, 2012, 1:55 pm
बिहार की धरती दर्शन और अध्यात्म के लिए सदियों से प्रसिद्ध रही है। आदि काल में बुद्ध, महावीर, नागार्जुन, गार्गी, मैत्रयी और याज्ञवलक्य ने बिहार का मान बढ़ाया तो प्राचीन काल में चाणक्य ने अपने तत्व ज्ञान से दुनिया को चकित किया। आधुनिक काल में महिर्षी मेंही ने इस परंपरा को ...
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  September 23, 2012, 1:55 pm
दहाये हुए देस का दर्द-85बिहारके कोशी अंचल को जूट की खेती के लिए भी जाना जाता है। उत्पादन के लिहाज से यह इलाका पश्चिम बंगाल और असम के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा जूट उत्पादन केंद्र रहा है। कोशी अंचल के पूर्णिया, कटिहार,मधेपुरा,सुपौल,अररिया और किशनगंज के लाखों किसानों के लिए ...
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  September 8, 2012, 6:24 pm
बिहार के विभिन्न दियारा और टाल क्षेत्रों में मध्य बिहार से भी ज्यादा खून बहे हैं, लेकिन इस पर बहस नहीं होती । शायद सरकारों  ने दियारा को अलग दुनिया मान रखी है। दियारा की हिंसा पर "द पब्लिक एजेंडा'' के हालिया अंक में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। ऊपर की तस्वीर डाउनलोड कर यह र...
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  September 1, 2012, 1:31 pm
जलना कोयले की नियति है। यह बात दीगर है कि जलने की कहानी हमेशा एक जैसी नहीं होती। बाहर जलने पर यह काला धुआं देता है, लेकिन बंद खदानों में जले तो धुएं का रंग झक-झक सफेद हो जाता है। झारखंड की आगग्रस्त झरिया, कुजू आदि कोलियरी के विशाल भू-भाग में कोयले की यह लीला आज भी जारी है। स...
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  August 28, 2012, 7:57 pm
धन अर्जित करना अब चाहत नहीं, बल्कि हवश हो गयी  है। इसके लिए लोग हर हद को पार कर रहे हैं। डॉक्टर को धरती का भगवान कहा जाता है। लेकिन बिहार में धरती के इन भगवानों ने पैसों के लिए हजारों महिलाओं के गर्भाशय बेवजह निकाल डाले। द पब्लिक एजेंडा ने अपने हालिया अंक में इस हैरतअंगे...
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  August 17, 2012, 1:21 pm
                   1विश्व का नक्शा बहुत पेचीदा हैआड़ी-तिरछी  रेखाओं की "ओझरी" है दुनियाएटलस पर छड़ी रखकर बताया था विद्यालय के "मास्साब" ने यह अमेरिका और यहां रहा सीरिया कांगो, सोमालिया,वाशिंगटन,जेनेवा से वियतनाम तक देश-देश, दरिया-दरियासमंदर से ज्वालामुखी तकघूमती थी ''मास्स...
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Tag :Kavita
  August 16, 2012, 1:28 pm
नेपाल की समकालीन राजनीति में बाबू राम भट्टराइ शायद अकेले नेता हैं, जो जमीनी हकीकत को समझते हैं। अन्य नेपाली माओवादी नेताओं की तरह भट्टराइ किसी यूटोपिया में नहीं जीते। नेपाल-भारत के संबंधों पर वे दूसरे नेताओं की तरह अपनी जनता को गुमराह नहीं करते। आज जब नेपाल के तमाम बड़...
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  August 13, 2012, 3:27 pm
नेपाल की समकालीन राजनीति में बाबू राम भट्टराइ शायद अकेले नेता हैं, जो जमीनी हकीकत को समझते हैं। अन्य नेपाली माओवादी नेताओं की तरह भट्टराइ किसी यूटोपिया में नहीं जीते। नेपाल-भारत के संबंधों पर वे दूसरे नेताओं की तरह अपनी जनता को गुमराह नहीं करते। आज जब नेपाल के तमाम बड़...
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  August 13, 2012, 3:27 pm
नेपाल की समकालीन राजनीति में बाबू राम भट्टराइ शायद अकेले नेता हैं, जो जमीनी हकीकत को समझते हैं। अन्य नेपाली माओवादी नेताओं की तरह भट्टराइ किसी यूटोपिया में नहीं जीते। नेपाल-भारत के संबंधों पर वे दूसरे नेताओं की तरह अपनी जनता को गुमराह नहीं करते। आज जब नेपाल के तमाम बड़...
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  August 13, 2012, 3:27 pm
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