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Blog: hindigen

Blogger: रेखा श्रीवास्तव
वीरो तुम्हेंकैसे दूँ श्रद्धांजलि !सीमा पर शहीद होते तोफ़ख्र होता है ।अभी तोगद्दारों ने अपने ही देश में,अपने अपराधों की फेहरिश्त मेंऔर एक वारदात बढ़ा करक्या रुतबा बढ़ाया है ?आँखे बरसती अगरतुम्हारे बलिदान में ,तो अंगारे भरेदिल से कोसती उनको ,जो वायस बनेकुछ अपने हीतुम्हार... Read more
clicks 2 View   Vote 0 Like   1:24pm 4 Jul 2020 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
आजजब मची हाहाकारऔर लगता है ,किहर एक जिंदगीरह गई हैमुट्ठी भर रेत की तरह ।बंद मुट्ठी मेंकितने कण शेष हैंअब नहीं पता है।न उम्र , न काल, न साँसेंसब चुक रहीं हैं ,बेवजह, बेवक़्त, बेतहाशाहर दुआ, हर दवा मुँह छिपा रही है ।हर कोई अकेला आया हैऔर अकेला ही जायेगा ।आज सच हो गया है -घर से ल... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   6:21pm 21 Jun 2020 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
वो संगतराश जिसे लोग पत्थर दे जाते थे कुछ अपने होते थे और कुछ पराये भी होते , वह उन्हें तराश कर ढाल देता एक आकार में । रास्ते के वे पत्थर मुखर हो उठते । आते वे और ले जाते, किसी ने सजा लिया घर में और किसी ने भेंट कर दिया । किसी ने बैठाकर मंदिर में, उन्हें टकसाल बना लिया । वो जिंदगी भर उन बेतरतीब पत्थरों को रूप ... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   6:38pm 9 Jun 2020 #Poem
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
वो संगतराशजिसे लोग पत्थर दे जाते थेकुछ अपने होते थेऔर कुछ पराये भी होते।वह उन्हें तराश करढाल देता एक आकार में,रास्ते के वे पत्थर मुखर हो उठते ।आते वे और ले जाते,किसी ने सजा लिया घर मेंऔर किसी ने भेंट कर दिया ।किसी ने बैठाकर मंदिर में,उन्हें टकसाल बना लिया ।वो जिंदगी भरउ... Read more
clicks 13 View   Vote 0 Like   6:34pm 9 Jun 2020 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
बेटियों के उदास चेहरे अच्छे नहीं लगते माँ के कलेजे में हूक उठती है। फिर भी वो खामोशी से सह जाती हैं पूछने पर "कुछ नहीं माँ बेकार परेशान रहती हो।" बस थोड़ी सी थकान है। वो माँ जो पढ़ लेती है चेहरा के भाव को इन दलीलों से संतुष्ट नहीं होती। वो हँसती , खिलखिलाती , कोयल सी आवाज में गाती तो ठिठक जाते थे पैर अब तो गु... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   5:09pm 2 Jun 2020 #General
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
बेटियों के उदास चेहरेअच्छे नहीं लगतेमाँ के कलेजे में हूक उठती है।फिर भीवो खामोशी से सह जाती हैंपूछने पर"कुछ नहीं माँ बेकार परेशान रहती हो।बस थोड़ी सी थकान है।"वो माँ जो पढ़ लेती हैचेहरे के भाव कोइन दलीलों से संतुष्ट नहीं होती।वो हँसती , खिलखिलाती ,कोयल सी आवाज में गातीत... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   3:54am 2 Jun 2020 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
हे विधाता ये काल चक्र कैसा है? धरती और आकाश सभी से तूने मृत्यु रची है। किसके किसके घर उजड़े हैं? किसके टूटे है परिवार? कौन धरा पर तड़प रहा है कैसा है किसका व्यवहार ? नहीं दया आती है तुझको मानव के जीवन पर कभी गगन से , कभी धरा से, कोई आदि अंत नहीं है पूरा विश्व जलता अग्नि में और किसी को ले गया तूफान, जल ने मारा, ... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   8:25am 27 May 2020 #General
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
हे विधाताये काल चक्र कैसा है?धरती और आकाश सभी से तूने मृत्यु रची है।किसके किसके घर उजड़े हैं?किसके टूटे है परिवार?कौन धरा पर तड़प रहा हैकैसा है किसका व्यवहार ?नहीं दया आती है तुझकोमानव के जीवन परकभी गगन से ,कभी धरा से,कोई आदि अंत नहीं हैपूरा विश्व जलता अग्नि मेंऔर किसी क... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   11:19am 25 May 2020 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
तट पर बैठो सुनो जरा , हर नदिया गाती है ।कल कल करती जल की धारारुक कर ये एक बात बताती है।निर्मल मन रख कंर करना जब,अर्पण हो या तर्पंण शांति लाती है। तट पर बैठो सुनो जरा हर नदिया गाती है ।लहरों  में उसके संगीत बसा है।सदियों का इतिहास रचा है ।गंगा, यमुना , गोदावरी ,नर्मदा,... Read more
clicks 12 View   Vote 0 Like   6:05pm 18 May 2020 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
जिसे न कोई रोपे जग मेंं, खुद ब खुद उगता बढ़ता हूँ नहीं धूप वर्षा की जरूरत रहते जिसमें शूल ही शूल, ्हाँ मैं शूल हूँ बबूल ! नहीं चाहिए खाद औ पानी फिर भी करके मैं मनमानी जहाँ तहाँ उग ही आता हूँ चाहे धरती हो प्रतिकूल हाँँ मैं हूँ बबूल !... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   1:30pm 17 May 2020 #Poem
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
हाइकु ये धरा हिली वो महसूस किया हिला ये जिया। *** भय में जीना मरने से बुरा है दण्ड निरा है। *** जीवन अब अनुशासित जीना नहीं है खोना। *** विश्व आ रहा अब पीछे हमारे वेदों के द्वारे। *** कोरोना क्या है? प्रकृति की सज़ा है एक रज़ा है । *** ... Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   8:37am 17 May 2020 #Poem
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
हाइकुये धरा हिली वो महसूस कियाहिला ये जिया।***भय में जीनामरने से बुरा हैदण्ड निरा है।***जीवन अब अनुशासित जीनानहीं है खोना।***विश्व आ रहाअब पीछे हमारेवेदों के द्वारे।***कोरोना क्या है?प्रकृति की सज़ा हैएक रज़ा है ।***... Read more
clicks 12 View   Vote 0 Like   11:30am 16 May 2020 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
दर्द और भयदोनों में नींद नहीं आती,दर्द तो इंसान का अपना ही होता हैऔर भयवह तो न जानेकितनी आशंकाओं और कुशंकाओं सेउपजता है ।रात की खामोशियों के बीच बीच कुत्तों के सामूहिक रुदन सेमन काँप ही तो जाता है।और भयभीत मनमहामृत्युंजय के मानसिक जप मेंआँखें मूँद कंर जुट जाता है।फ... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   3:27am 9 May 2020 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
आज भी इंसानहै कितना नादानमौत से दो कदम खड़ा है,फिर भी अपनी जिद पर अड़ा है ।शेखी समझता है कानून तोड़ने मेंक्या मिलता है नहीं जानता जोड़ने में।वो रहम नहीं करेगा ,गर लग गया गले से ,फिर तुम कहाँ औ बाकी सब कहाँ ?जिये हो जिनके लिए ,जीते है जो तुम्हारे लिए ,कुछ उनकी भी सोचो ।देखना तो दू... Read more
clicks 15 View   Vote 0 Like   11:33pm 29 Apr 2020 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
दिन में रात आँधी औ बरसात माह कौन रे। *** दहशत में जीवन हैं हमारे कोरोना मारे । *** बंद घर में साँस भी घुटती है जाँ अधर में। *** वो दिखते है एक रोबोट जैसे बचाये कैसे ? *** दीप जलाये बैठी है उसकी माँ साँसत में जाँ। *** वो कर्मवीर खड़े हैं सीना तान बचा लें जान। ***... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   6:10pm 27 Apr 2020 #General
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
कहर बन कर आया जरूर हूँ ,विश्व में भी कहलाया क्रूर हूँ ,जन्म दिया किसने ये प्रश्न है ?वही जिन्हें अपने पर गुरूर है।                               हाँ हर तरफ सबका रोना हूँ।                           &n... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   3:15pm 11 Apr 2020 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
मौतएक सचहम जानते हैं,उसकी आहट पहचानते हैं ,फिर भीस्वीकार नहीं कर पाते ।जीवन दीप कोकाल के झंझावातों से बचाने कोदोनों हाथों सेया कहें जितने जोड़ी हाथ होंसब मिलकर भीउसे बुझने से बचा नहीं पाते हैं।एक साँस और उसके थमने केबीच का फासलासब कुछ ले जाता है -किसी के सिर की छाया,किस... Read more
clicks 35 View   Vote 0 Like   3:59pm 17 Nov 2019 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
क्या फर्क पड़ता है !इन शब्दों को अक्सर सुना है,लेकिनये वाक्य जेहन में आता ही तभी है,जब वाकई कुछ फ़र्क पड़ता है ।अपने मन समझाने को,औरों को दिखाने को,टूट कर सिमटने के भ्रम में जीने को,याफिर उस कष्ट को जीने का साहस जुटाने को। क्या फ़र्क पड़ता है !बहुत गहरे अर्थ रखता है ।फ़र्क पड़ने ... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   1:52am 8 Nov 2019 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
जब पलटती हूँ अतीत के पन्नों कोकुछ लम्हे, कुछ बातें,जेहन में बसी हैं आज भी ,कुछ तस्वीरें चस्पा हैं मित्रों की ।एक उदासी भीचुरा लेती थी हँसी सबकी, नजरें तो लगी होती है चेहरे पर  उदासी का सबब जानने कोबात कुछ और थी ऐसे  मित्रों की ।ऐसे ही इस दिनसारे मुस्कुराते हुए चे... Read more
clicks 49 View   Vote 0 Like   3:53pm 24 Aug 2019 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
औरत की इज्जतएक चाय की प्याली हो गयीजिसेजिसने पिया - तोअकेले नहीं दोस्तों के संगक्या ये अबलत बन चुकी है। जो इंसान के जमीर मेंशामिल नहीं है  -औरत की इज्जत करना। और समाज उसेकितनी जलालत भरीनजर से देखती है,घुट घुट कर जीने के लिएमजबूर होती है,क्योंकिउस पीड़ा का अहसास  इस सम... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   8:44am 21 Jul 2019 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
रिश्ते हैंएक पौधपलते है जोदिल की माटी में,प्यार का पानी दें,हवा तो दिल देता हैफिर देखो कैसे ?हरे भरे होकर वेजीवन महका देंगे।अकेले और सिर्फअपनों की खातिरअपने सुख की खातिरजीना बहुत आसान है ,सोच बदलोऔरों के लिए भीजीकर देखो तो सहीबहुत  कुछ  सिखा देंगे . .।पानी किसी भी पौ... Read more
clicks 251 View   Vote 0 Like   9:24am 20 Jul 2019 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
जब जब बढ़े अधर्म धरा पर,धैर्य धर संयत तो रहना होगा,मन से स्मरण  कर शक्ति का,              मन की दुर्बलताओं को हरना होगा।             तुम्हें आह्वान शक्ति का करना होगा ।वो शक्ति स्वरूपा दुर्गा हो ,काली हो या विकराली हो,चामुण्डा शक्ति बगलामुखी,            ... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   9:31am 18 Jun 2019 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
जन्मी कल थी,उतर गोद से माँ की,नन्हें नन्हें कदमों सेअभी अभी चलना सीखा ।अँगुली माँ की छोड़अभी तक न चलना आया था ।सुनती शोर दूर तोदौड़ छिप जातीमाँ के आँचल में ,अभी नहीं आया था,आँगन पार करना भी ,हाथ पकड़ कर बाबा का,करती थी पार गली में ।नहीं जानती कौन है अपनाकौन पराया मानुष में ।उन... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   10:28am 14 Jun 2019 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
आंधियांचलरहींथीकशमकशकी,हमखड़ेखड़ेतयनकरसकेमंजिलें।एकएककरगुजरगएसबअपने ,हमइन्तजारमेंदेखतेरहेकाफिले। अपने  से कोईसपनाभी  नमिलासका।चलते चलते ख़त्म हो गए  ये सिलसिले। इन्तजार कहाँ तक करें कुछ भी पाने का?बीच में ही ले उड़े मेरे सपनों को दिल जले।आज भी आँखें  खो... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   5:39pm 30 Jan 2019 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
शक्तिऔरअधिकारकाजबहोनेलगेदुरूपयोग ,तबहीहोनेलगताहैपरिणतवियोगमेंसंयोग ,हरदममुस्कराती आँखेंजबआंसुओंसेभरजातीहैं।दारुणदुःखकीपीड़ाभीवेमूकबनसहजातीहैमूक, त्रसितऔ'उत्पीड़ितझर-झरबहतेअश्रुकणनमुखरितहो, नहोरुदितयंत्रणाकीपीड़ासहेहरक्षणअबऐसासम्भवनहोगाकभी तो ... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   5:37pm 30 Jan 2019 #
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