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Blog: यथार्थ

Blogger: रेखा श्रीवास्तव
                      नीता की एक सहेली वर्षों तक उसके  साथ काम करती आ रही थी।  उन्होंने  एक दूसरे के साथ करीब २४ साल काम किया है।  उनकी मानसिकता से परिचित तो अच्छी तरह थी ।  उन्होंने अपनी बेटी की शादी अंतर्जातीय की और बेटे की खुद खोज कर ... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   1:20pm 25 Dec 2019 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
                           बचपन कब हम जीते हैं ? कभी सोचा है हमने , नहीं अपना बचपन तो याद ही नहीं रहता और अपने बच्चों का बचपन तो आज की पीढ़ी में हो या हम लोगों की पीढ़ी में - संयुक्त परिवार की जिम्मेदारीयों में माँ और बच्चे का उतना ही संपर्क रह... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   11:40am 20 Nov 2018 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
                   नितिन को निधि की बहुत चिंता हो रही थी कि प्रसव के बाद कैसे सभाँल पायेगी वह दो दो बच्चों को ? उसका दिमाग चारों तरफ दौड़ रहा था कि आखिर किसको बुलायें ?  माँ बीमार रहती है , बहनों के अपने परिवार हैं और बच्चे पढ़ने वाले हैं । संयुक्त परिवार में बचपन जि... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   1:43pm 2 Aug 2017 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
                          रमेश बार के बाहर साहब का इन्तजार कर रहा था और बार बार घडी भी देख रहा था।  सुनीता ने कहा था कि  जल्दी आ जाना आठ बजे तक चाँद निकल आएगा तो पूजा तो तभी करेगी न जब वो वहां पहुँच जाएगा। रोज की बात होती तो चाहे जब पहुँच जा... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   8:10am 19 Oct 2016 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
                            जीवन में एक बच्चे का होना बहुत जरूरी है लेकिन अगर इसके  हम पीछे झांक कर देखें तो सिर्फ एक बच्चे का होना और न होना किसी की जिंदगी को बदल कर रख देता है।  ये हमारी अपरिपक्वता की निशानी ही कही जायेगी। जीवन में स... Read more
clicks 220 View   Vote 0 Like   2:19pm 5 Nov 2015 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
                   अजय की इच्छा है कि इस जन्मदिन पर कुछ अलग तरह से उनको जन्मदिन की शुभकामनाएं मिलें और उसको संचित कर रखा जा सके लेकिन यह जिन पलों को मैं यहाँ अंकित करने जा रही हूँ वह सिर्फ अजय के लिए नहीं मेरे लिए भी बहुत ही आत्मिक और अभिभूत  करने व... Read more
clicks 229 View   Vote 0 Like   9:39am 29 Oct 2015 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
                    मेरी काम वाली छुट्टी पर गयी तो एक दूसरी को अपनी जगह काम करने के लिए रखवा गयी। वह उसकी कोई रिश्तेदार थी. एक दिन सुबह आकर वह मुझसे बोली - 'दीदी आपके सामने वाले बड़े अच्छे बाबूजी है , मैं रोज गाय को सब्जी के छिलके और रोटी खिलाते हुए दे... Read more
clicks 281 View   Vote 0 Like   7:33am 6 May 2015 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
                             ये कहानी कुछ समय पुरानी है , लेकिन सच है और पता नहीं क्यों मुझे लगता है कि साल में एक बार पितृ पक्ष में इसको जरूर पब्लिश करूँ। पंडित जी श्राद्ध करवा रहे थे कि जजमान के बड़े भाई का नौकर आया और बोला,  "पंडित जी, ... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   3:24pm 24 Feb 2015 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
           जीवन में बेटे अपना फर्ज निभाते है और अपने माता-पिता या फिर अपने पालने वाले की देखभाल करते हैं और हमारे सामाजिक मूल्यों के अंतर्गत यही न्यायसंगत माना जाता है. लेकिन बदलते हुए परिवेश और सामाजिक वातावरण में बेटे इस कार्य को न भी करें तो कोई अचरज की ब... Read more
clicks 248 View   Vote 0 Like   12:23pm 20 Jan 2015 #
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                                      इसे ही हम समाज कहते हैं , जो अच्छा हो तो भी उसमें कुछ बुराई खोजने की आदत , कुछ गलतफहमियां पैदा करने की बात , कुछ कहावतों का सहारा लेकर उनको सत्य सिद्ध करने की आदत या फिर चिता की आग में हाथ स... Read more
clicks 255 View   Vote 0 Like   10:54am 1 Oct 2014 #
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                                     कहते है न कि कुछ चीजें इंसान अपनी मेहनत और प्रयास से हासिल कर लेता है लेकिन कुछ वह चाह कर भी नहीं पा सकता है। मुझे २३ साल पहले तो पापा के निधन की खबर तक नहीं मिली क्योंकि उस समय फ़ोन इतने कॉम... Read more
clicks 255 View   Vote 0 Like   7:46am 22 Sep 2014 #
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                                 जीवन के कितने रंग देखे ? हर बार चमकते हुए रंग , खिलखिलाते हुए पल कम ही नजर आये। ऊपर से पोते गए रंग और खोखली ओढ़ी गयी हंसी तो बहुत दिखाई  अंदर झांक कर देखने वाले भी तो कम ही मिलते और उनके दर्द को समझने ... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   11:36am 4 Sep 2014 #
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                    लिखना तो बहुत कुछ चाहती हूँ लेकिन समय हर जगह देर करवा देता है।  ये चरित्र जो मेरे जीवन में बस स्टॉप से जुड़े बहुत महत्वपूर्ण और नारी संघर्ष की एक बानगी है।  हो सकता है कि हमारे कुछ मित्रों को ये काल्पनिक लगे लेकिन जिसने जीवन का जो पहलू नहीं ... Read more
clicks 267 View   Vote 0 Like   11:46am 21 Aug 2014 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
                                      जन्म से लेकर आज तक कितने प्रमाण पत्र मिलते हैं और हर बात को साबित करने के यही एक मात्र साधन होता है।  जन्म प्रमाण पत्र , विवाह प्रमाण पत्र , शिक्षा के प्रमाण पत्र , निवास प्रमाण पत्र , जा... Read more
clicks 216 View   Vote 0 Like   11:08am 20 Aug 2014 #
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                                   हम बहुत आगे जा रहे हैं और इसमें कोई शक भी नहीं है लेकिन क्या हम अपनी मानसिकता से भी उतने ही आगे बढ़  पा रहे हैं या नहीं। कभी कभी ऐसी घटनाएँ सामने आती हैं कि सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि  आज भ... Read more
clicks 256 View   Vote 0 Like   10:48am 18 Aug 2014 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
                     हम अगर चाहें कि किसी चीज की हद बना दें तो उसको तोड़ने वाले बहुत  मिल जाते हैं।  एक हकीकत कही  थी मैंने  विडम्बना( http://kriwija.blogspot.in/2014/07/blog-post.html ) लेकिन उसके आगे की हदें आज देखी तो लगा कि कोई हद नहीं इंसान के खून को सफेद होने की।    ... Read more
clicks 271 View   Vote 0 Like   8:17am 17 Jul 2014 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
                        बरसों की सफर ने इतने  लोगों से मिलाया और अलग कर दिया।  कुछ चहरे आज भी याद है और कुछ ऐसे लोग थे कि वे जीवन भर याद रहेंगे।  अपनी जीवन शैली , जीवटता और संघर्ष के माद्दे को लेकर।  एक थी नीरू शर्मा - वो मेरी बस से नहीं जात... Read more
clicks 261 View   Vote 0 Like   9:50am 14 Jul 2014 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
                                        ये कहानी बनी तो बस स्टॉप से नहीं लेकिन  इसके बारे में सब कुछ बस स्टॉप से ही सुनाने वाले मिलते रहे क्योंकि रजनी को तो मैंने वर्षों बाद जाना।  वो एक सीधी सादी महिला थी। उनके बारे... Read more
clicks 258 View   Vote 0 Like   9:57am 11 Jul 2014 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
आई आई टी सैक बस स्टॉप                                                एक मध्यम वर्गीय इंसान के लिए बस स्टॉप एक  ऐसी जगह है , जहाँ से सब चल देते है गंतव्य को और फिर वापस अपने घर को।  हाँ आने और जाने के ये  बस स्टॉप अलग अलग होते हैं और जान... Read more
clicks 250 View   Vote 0 Like   10:58am 9 Jul 2014 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
                                             जीवन कर्मभूमि है और इस पर कर्म सभी करते हैं - फिर चाहे वे धर्म और नीति संगत हों या फिर असंगत।  सब अपने घर परिवार के लिए ही कमाते हैं भले ही उनका तरीका कोई भी हो लेकिन वह त... Read more
clicks 246 View   Vote 0 Like   9:02am 5 Jul 2014 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
                                    आज अम्मा की तृतीय पुण्यतिथि है लेकिन लगता है कि कल तक तो अम्मा हमारे साथ थी।  वह नहीं हैं तो क्या कुछ बातें ऐसी हैं जो हमें उनकी याद उस अवसर पर जरूर ही दिला जाती है।           ... Read more
clicks 248 View   Vote 0 Like   10:13am 2 Jan 2014 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
            २२ वर्ष  बाबूजी को गए हुए ,  लेकिन वे अपने स्वभाव और सिद्धांतों से हमारे साथ आज भी हैं।  आत्मनिर्भर , कर्मठ और स्पष्टवादी  होने के कारण वे अपनी अलग छवि रखते थे।  कानपूर के उर्सला हॉर्समैन हॉस्पिटल में फार्मासिस्ट के पद पर जीवन भर काम किया... Read more
clicks 316 View   Vote 0 Like   9:54am 20 Oct 2013 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
                      आज घर में  बाबू जी का श्राद्ध  है ,  कल शाम ही  जेठ जी ने  कह दिया था कि  सुबह जल्दी आ  जाना।  सुनीता  सुमित तो आदेश का पालन करने में अपना धर्म समझते आ रहे हैं।   जब तक अम्मा थी कुछ ठीक था लेकिन उनके जाते ही - दो ... Read more
clicks 275 View   Vote 0 Like   8:07am 6 Oct 2013 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
मेरी एक सहेली वर्षों तक मेरे साथ काम करती आ रही थी।  हम एक दूसरे के साथ करीब २४ साल काम किया है।  उनकी मानसिकता से  मैं परिचित तो अच्छी तरह हूँ।  उन्होंने अपनी बेटी की शादी अंतर्जातीय की और बेटे की खुद खोज कर सजातीय।  फिर शुरू हुआ उनके परिवार में शादी का सिलसिला।... Read more
clicks 295 View   Vote 0 Like   1:21pm 30 Sep 2013 #
Blogger: रेखा श्रीवास्तव
                          गुरु हमें वह सब देता है जिसकी हमें जरूरत होती है . मानव तो जीवन में दिशाहीन सा जीता रहता है कुछ  भौतिकता को ही जीवन का सत्य मान कर  आगे बढ़ जाते हैं .  वह गुरु जो मानव को  देता एक ऐसी दृष्टि   देता  है , जिससे वह... Read more
clicks 298 View   Vote 0 Like   11:09am 22 Jul 2013 #
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