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Sourabh Yadav

झूठी बुलंदियों का धुँआ पार कर के आक़द नापना है मेरा तो छत से उतर के आइस पार मुंतज़िर हैं तेरी खुश-नसीबियाँलेकिन ये शर्त है कि नदी पार कर के आकुछ दूर मैं भी दोशे-हवा पर सफर करूँकुछ दूर तू भी खाक की सुरत बिखर के आमैं धूल में अटा हूँ मगर तुझको क्या हुआआईना देख जा ज़रा घर जा सँ...
Sourabh Yadav...
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  October 27, 2012, 2:59 pm
अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए।जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए।जिसकी ख़ुशबू से महक जाय पड़ोसी का भी घरफूल इस क़िस्म का हर सिम्त खिलाया जाए।आग बहती है यहाँ गंगा में झेलम में भी कोई बतलाए कहाँ जाके नहाया जाए।प्यार का ख़ून हुआ क्यों ये समझने के लिए हर अँधेरे को उजाले मे...
Sourabh Yadav...
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  September 13, 2012, 5:58 pm
अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए। जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए। जिसकी ख़ुशबू से महक जाय पड़ोसी का भी घर फूल इस क़िस्म का हर सिम्त खिलाया जाए। आग बहती है यहाँ गंगा में झेलम में भी कोई बतलाए कहाँ जाके नहाया जाए। प्यार का ख़ून हुआ क्यों ये समझने के लिए हर अँधेरे को उजाल...
Sourabh Yadav...
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  September 13, 2012, 5:58 pm
मेरा गीत चाँद है ना चाँदनीन किसी के प्यार की है रागिनीहंसी भी नही है माफ कीजियेखुशी भी नही है माफ कीजियेशब्द - चित्र हूँ मैं वर्तमान काआइना हूँ चोट के निशान कामै धधकते आज की जुबान हूँमरते लोकतन्त्र का बयान हूँकोइ न डराए हमे कुर्सी के गुमान सेऔर कोइ खेले नही कलम के स्वाभ...
Sourabh Yadav...
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  August 13, 2012, 3:13 pm
क्या खोया, क्या पाया जग मेंमिलते और बिछुड़ते पग  मेंमुझे किसी से नहीं शिकायतयद्यपि छला गया पग-पग मेंएक दृष्टि बीती पर डालें, यादों की पोटली टटोलें!पृथ्वी लाखों वर्ष पुरानीजीवन एक अनन्त कहानीपर तन की अपनी सीमाएँयद्यपि सौ शरदों की वाणीइतना काफ़ी है अंतिम दस्तक पर, खुद ...
Sourabh Yadav...
Tag :अटल बिहारी वाजपेयी
  February 24, 2012, 2:06 pm
हर गाम पे हुशियार बनारस की गली मेंफ़ितने भी हैं बेदार बनारस की गली मेंऐसा भी है बाज़ार बनारस की गली मेंबिक जाएँ ख़रीदार बनारस की गली मेंहुशियारी से रहना नहीं आता जिन्हें इस पारहो जाते हैं उस पार बनारस की गली मेंसड़कों पर दिखाओगे अगर अपनी रईसीलुट जाओगे सरकार, बनारस की ...
Sourabh Yadav...
Tag :najeer banarasi
  February 12, 2012, 10:14 pm
दुखों की स्याहियों के बीचअपनी ज़िंदगी ऐसीकि जैसे सोख़्ता हो।जनम से मृत्यु तक कीयह सड़क लंबीभरी है धूल से हीयहाँ हर साँस की दुलहिनबिंधी है शूल से हीअँधेरी खाइयों के बीचअपनी ज़िंदगी ऐसीकि ज्यों ख़त लापता हो।हमारा हर दिवस रोटीजिसे भूखे क्षणों नेखा लिया हैहमारी रात है...
Sourabh Yadav...
Tag :
  January 28, 2012, 4:39 pm
तुम्‍हारी फाइलों में गाँव का मौसम गुलाबीहैमगर ये आँकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी हैउधर जमहूरियत का ढोल पीटे जा रहे हैं वोइधर परदे के पीछे बर्बरीयत है, नवाबी हैलगी है होड़-सी देखो अमीरी औ' गरीबी मेंये गांधीवाद के ढाँचे की बुनियादी खराबी हैतुम्‍हारी मेज चाँदी की तुम्‍...
Sourabh Yadav...
Tag :hindi kavita
  January 8, 2012, 6:13 pm
काजू भुने पलेट में, विस्की गिलास मेंउतरा है रामराज विधायक निवास मेंपक्के समाजवादी हैं, तस्कर हों या डकैतइतना असर है ख़ादी के उजले लिबास मेंआजादी का वो जश्न मनायें तो किस तरहजो आ गए फुटपाथ पर घर की तलाश मेंपैसे से आप चाहें तो सरकार गिरा देंसंसद बदल गयी है यहाँ की नख़ास म...
Sourabh Yadav...
Tag :काजू भुने
  January 3, 2012, 2:00 pm
इसी चमन में ही हमारा भी इक ज़माना था यहीं कहीं कोई सादा सा आशियाना था नसीब अब तो नहीं शाख़ भी नशेमन की लदा हुआ कभी फूलों से आशियाना था तेरी क़सम अरे ओ जल्द रूठनेवाले गुरूर-ए-इश्क़ न था नाज़-ए-आशिक़ाना था तुम्हीं गुज़र गये दामन बचाकर वर्ना यहाँ वही शबाब वही दिल वही ज़माना ...
Sourabh Yadav...
Tag :hindi kavita
  December 9, 2011, 12:55 pm
ये लफ्ज़ आईने हैं मत इन्हें उछाल के चल अदब की राह मिली है तो देखभाल के चल कहे जो तुझसे उसे सुन, अमल भी कर उस पर ग़ज़ल की बात है उसको न ऐसे टाल के चल सभी के काम में आएंगे वक्त पड़ने पर तू अपने सारे तजुर्बे ग़ज़ल में ढाल के चल मिली है ज़िन्दगी तुझको इसी ही मकसद से संभाल खुद क...
Sourabh Yadav...
Tag :कुँअर बेचैन
  November 14, 2011, 3:52 pm
किताबें झाँकती है बंद अलमारी के शीशों से बड़ी हसरत से तकती है महीनों अब मुलाक़ातें नही होती जो शामें उनकी सोहबत में कटा करती थी अब अक्सर गुज़र जाती है कम्प्यूटर के परदे पर बड़ी बैचेन रहती है किताबें उन्हें अब नींद में चलने की आदत हो गई है जो ग़ज़लें वो सुनाती थी कि जिन...
Sourabh Yadav...
Tag :गुलज़ार
  November 10, 2011, 11:42 am
अंगड़ाई पर अंगड़ाई लेती है रात जुदाई की तुम क्या समझो तुम क्या जानो बात मेरी तन्हाई की कौन सियाही घोल रहा था वक़्त के बहते दरिया में मैंने आँख झुकी देखी है आज किसी हरजाई की वस्ल की रात न जाने क्यूँ इसरार था उनको जाने पर वक़्त से पहले डूब गए तारों ने बड़ी दानाई की उड़ते...
Sourabh Yadav...
Tag :qateel shifai
  November 9, 2011, 5:21 pm
हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी शर्त थी लेकिन कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं मेरी कोशिश ह...
Sourabh Yadav...
Tag :सौरभ यादव
  November 8, 2011, 3:41 pm
क्या सच है, क्या शिव, क्या सुंदर? शव का अर्चन, शिव का वर्जन, कहूँ विसंगति या रूपांतर?          वैभव दूना, अंतर सूना, कहूँ प्रगति या प्रस्थलांतर? ...
Sourabh Yadav...
Tag :सौरभ यादव
  November 8, 2011, 3:33 pm
अरुण यह मधुमय देश हमारा। जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा।। सरल तामरस गर्भ विभा पर, नाच रही तरुशिखा मनोहर। छिटका जीवन हरियाली पर, मंगल कुंकुम सारा।। लघु सुरधनु से पंख पसारे, शीतल मलय समीर सहारे। उड़ते खग जिस ओर मुँह किए, समझ नीड़ निज प्यारा।। बरसाती आँखों के ब...
Sourabh Yadav...
Tag :sahitya
  November 2, 2011, 10:40 pm
मुझ से चाँद कहा करता है-- चोट कड़ी है काल प्रबल की, उसकी मुस्कानों से हल्की, राजमहल कितने सपनों का पल में नित्य ढहा करता है| मुझ से चाँद कहा करता है-- तू तो है लघु मानव केवल, पृथ्वी-तल का वासी निर्बल, तारों का असमर्थ अश्रु भी नभ से नित्य बहा करता है। मुझ से चाँद कहा करता है-- तू अ...
Sourabh Yadav...
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  November 1, 2011, 4:55 pm
रात यों कहने लगा मुझसे गगन का चाँद, आदमी भी क्या अनोखा जीव होता है! उलझनें अपनी बनाकर आप ही फँसता, और फिर बेचैन हो जगता, न सोता है। जानता है तू कि मैं कितना पुराना हूँ? मैं चुका हूँ देख मनु को जनमते-मरते; और लाखों बार तुझ-से पागलों को भी चाँदनी में बैठ स्वप्नों पर सही करते...
Sourabh Yadav...
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  September 17, 2011, 6:24 pm
जला अस्थियां बारी-बारी चिटकाई जिनमें चिंगारी, जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर लिए बिना गर्दन का मोल। कलम, आज उनकी जय बोल जो अगणित लघु दीप हमारे तूफानों में एक किनारे, जल-जलाकर बुझ गए किसी दिन मांगा नहीं स्नेह मुंह खोल। कलम, आज उनकी जय बोल पीकर जिनकी लाल शिखाएं उगल रही सौ लपट दिश...
Sourabh Yadav...
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  September 17, 2011, 6:17 pm
समय की शिला पर मधुर चित्र कितनेकिसी ने बनाए, किसी ने मिटाए। किसी ने लिखी आँसुओं से कहानीकिसी ने पढ़ा  किन्तु दो बूंद पानीइसी में गए बीत दिन ज़िन्दगी केगई घुल जवानी, गई मिट निशानी।विकल सिन्धु के साध के मेघ कितनेधरा ने उठाए, गगन ने गिराए। शलभ ने शिखा को सदा ध्येय माना,किस...
Sourabh Yadav...
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  September 17, 2011, 6:14 pm
जो फैलाने चले हैं मुल्क़ में दहशत धमाकों से वही छुपते फिरा करते हैं इक मुद्दत धमाकों से न ख़बरों में उछाल आया, न बाज़ारों में सूनापन न बिगड़ी मुल्क़ के माहौल की सेहत धमाकों से वही हल्ला, वही चीखें, वही ग़ुस्सा, वही नफ़रत हमें अब हो गई इस शोर की आदत, धमाकों से ये दहशतग़र्द अब इस बात स...
Sourabh Yadav...
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  September 11, 2011, 5:42 pm
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