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पद्मावलि

कहाँ जाने खो गयी हैं आँधियाँ क्यों नपुंसक हो गयी हैं आंधियाँ हवाएँ पश्चिम से कुछ ऐसे चलीं युवा मन मे सो गयी हैं आंधियाँ मुट्ठियाँ सब बुद्धिजीवी हो गयीं और तनहा हो गयी हैं आँधियाँ आज घर मे शान्ति है धोका न खा अभी कल ही तो गयी हैं आंधियाँ शक्ति, साहस, और लड़ने [...]...
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Tag :पद्मसिंह
  May 2, 2012, 6:59 pm
हे वीणा शोभायनी, हे विद्या की खान मेरी भव बाधा करो, बाँह धरो अब आन माँ तुमसे क्या छुपा है तू कब थी अनजान तुम्हीं सँवारो काज सब, तुम्हीं बचाओ मान आन बान सब छाँणि के आया मै नादान पत राखो वागेश्वरी, शत शत तुम्हें प्रणाम   ………….. वसन्त पंचमी के पावन पर्व पर माँ [...]...
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Tag :पद्मसिंह
  January 28, 2012, 10:19 am
कई बार मज़ाक मे लिखी गयी दो चार पंक्तियाँ   अपना कुनबा  गढ़ लेती है… ऐसा ही हुआ इस जूता पचीसी के पीछे… फेसबुक पर मज़ाक मे लिखी गयी कुछ पंक्तियों पर रजनीकान्त जी ने टिप्पणी की कि इसे जूता बत्तीसी तक तो पहुँचाते… बस बैठे बैठे बत्तीसी तो नहीं पचीसी अपने आप उतर आई… अब [...]...
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Tag :कविता
  January 24, 2012, 7:15 pm
सविनय अर्ज़ है - रहिमन जूता राखिए, बिन जूता सब सून बिन जूता होने लगे, भ्रष्टाचारी दून जूता मारा तान के, लेगई पवन उड़ाय जूते की इज्ज़त बची, प्रभु जी सदा सहाय साईं इतना दीजिये, दो जूते ले आँय मारूँ भ्रष्टाचारियन, जी की जलन मिटाँय जूता लेके फिर रही, जनता चारिहुं ओर जित देखा तित [...]...
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Tag :पद्मसिंह
  January 24, 2012, 8:56 am
कई महीने हो गए ब्लॉग पर कुछ लिखे हुए…. लिखते रहने के अतिरिक्त कुछ करने की सोच कर भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना और बाबा के साथ हो लिया…. हर अनशन, हर मोर्चे, और हर जुलूस मे कभी झंडे लिए तो कभी मोमबत्ती जलाए गले फाड़ता रहा…भारत माता की जय, वंदे मातरम, इंकलाब ज़िन्दाबाद…. लोगों ने [...]...
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Tag :कविता
  December 22, 2011, 6:43 am
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