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मेरी डायरी

छठी में एक कहानी पढ़ी थी। लालची कुत्ते की 'ग्रीडी डॉग'। पढ़ी अंग्रेजी में थी पर याद हिंदी में है। लालच के बहकावे में आकर कुत्ते ने अपनी परछाई से ही दूसरी रोटी पाने की कोशिश की। इस चक्कर में उसने अपने पास वाली रोटी भी गंवा दी थी। तब तब शायद लालच छोटा रहा होगा इसलिए कुत्ते क...
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  May 22, 2011, 9:13 pm
जिंदगीसे अभी तुम्हारी जंग शुरू भी नहीं हुई थी। अभी तो तुम अपने मां-बाप के कंधों पर खेल रही थी। अच्छी पढ़ाई कर रही थी। आने वाले दिनों में तुम एक ऐसे सफर पर जाने वाली थी जहां तुम्हें लोगों की जिंदगी बचानी थी। तुम्हारे पेशे में तो लोगों को बहादुर बनाया जाता है, ताकि वे मरते ...
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  February 3, 2011, 11:09 pm
शिवराज गूजरएक आठ साल की बच्ची पलक के बस में जिंदा जल जाने की खबर ने अंदर तक हिला कर रख दिया। खबर यूं थी कि -बच्ची ने पिता द्वारा सिगरेट के पैकेट के साथ छोड़ी गई माचिस के साथ बाल-सुलभ छेडख़ानी की। तीली जली, मजा आया और वो खेलने लगी। खेल-खेल में कब कपड़ों में आग लगी पता नहीं चला।...
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  January 29, 2011, 2:00 pm
रेलवेफाटक बंद था। लोग अपने वाहन रोक कर खड़े थे, पर शायद उसे ज्यादा जल्दी थी। फाटक के बगल से उसने स्कूटी चढ़ा दी पटरी पर। अभी वह पटरी के बीचों-बीच थी कि ट्रेन आ गई। मौत उसकी आंखें के आगे नाचने लगी। इस वक्त जो उसने सबसे अच्छा काम किया वो यह था कि स्कूटी का मोह छोड़ पटरी के बाह...
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  January 23, 2011, 12:55 am
'कहीं की ईंट, कहीं का रोड़ा, भानुमति ने कुनबा जोड़ा'भानुमति का यह टोटका काफी पुराना है पर आज भी अचूक है। लोग धड़ल्ले से इसका उपयोग कर रहे हैं। उसने इसका पेटेंट करवा लिया होता तो आज उसकी पीडियों के वारे न्यारे होते. खैर गलती हो गयी उसका क्या रोना. आज रीमिक्स का दौर है. भाइयों ...
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  January 16, 2011, 7:16 pm
हर रोजकाम पर जाते वक्तकरता है खुद सेएक वादाआज लौट आऊंगाघर जल्दीकुछ वक्त बिताऊंगाबच्चों के साथबीवी के साथकुछ दुख-कुछ सुखकी बातें करूंगामां-बाबूजी के साथपरपलटता है जबहो चुकी होती है रातसो चुके होते हैं बच्चेमां-बाबूजी के खर्राटे बता देते हैं गहरी नींद में हैंश्रीमत...
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Tag :रचना संसार
  August 29, 2010, 2:00 pm
अजी सुनते होघर में घुसा ही था कि श्रीमती जी बोलींमुन्ना चलने लग गया है.हाँ, फिर ?फिर क्या ?दाखिला नहीं कराना है स्कूल मेंमैं चौंका,यह नन्ही जानखुली नहीं अभी ढंग से जबानक्या पढेगा ?अजी अभी पढाना किसको है.यह तो रिहर्सल है, स्कूल जाने कीऔर फिर यहाँ यह रोता भी हैवहाँ मेडमें ह...
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Tag :रचना संसार
  August 6, 2010, 1:30 am
1हां ! भईअब क्यों आएगा तूंगांव।कौन है अब तेरा यहां। तेरी लुगाई और तेरे बच्चेले गया तू शहरयह झिड़की सुननी पड़ती हैहर उस बेटे कोजो आ गया है शहररोजी-रोटी कमाने।आया था जब वो शहरअकेला थासो भाग जाता था गांवसप्ताह-महीन में।अब यह नहीं हो पाताइतनी जल्दीक्योंकि-अब बढ़ गई है जिम...
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Tag :रचना संसार
  July 31, 2010, 9:23 pm
मंदरो-मंदरो बरसे मेह मन हरसावे मिनखां रोजीव-जनावर राजी होग्यारूप निखरग्यो रूंखां रोकरषां का खिलग्या मुखड़ादेख मुळकता खेतां नेबैठ मेड़ पै गावे हाळीड़ाछोड़ माळ में बेलां नेहरख्यो-हरख्यो दीखे कांकड़ओढ्यां चादर हरियाळीढांढा छोड़ खेलरया ग्वाळ्याछोड़ आपणी फरवाळीशि...
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Tag :रचना संसार
  July 8, 2010, 8:44 pm
आज मदर्स डे है। यानी मां का दिन। मां, जिसने हमारे अस्तित्व में आने की प्रक्रिया की पहली अवस्था से लेकर आज के दिन तक हर पल हमारे लिए और सिर्फ हमारे लिए जीवन जिया है। परिवार के लोगों की हर जरूरत का ध्यान रखने में भी उसकी नजर कहीं न कहीं से हमारी ही ओर निहारती रही। तीन बच्चों ...
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Tag :रचना संसार
  May 9, 2010, 8:52 pm
गंदे कपड़ेजूठे बरतनबूढ़ी सास के आगे पटकसहेली के साथ फिल्म देखने निकलीमिसेज शर्मापरदे परबहू के सास पर अत्याचार देखफूट-फूट कर रोईसहेली के कंधे पर सिर रखकरसिसकते हुए बोली-कुछ बहुएं भी ना!-शिवराज गूजर...
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  April 16, 2010, 10:02 pm
बेटे की शादी के बाद उसमें बड़ा बदलाव आयादहेज के विरोध मेंउसने बड़ा आंदोलन चलायासोई हुई उसकी आत्माअचानक! जाग गई थीबेटी जो उसकी शादी के लायक हो गई थी।शिवराज गूजर...
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Tag :रचना संसार
  April 2, 2010, 8:30 pm
दोपहर का वक्त था। रोज की तरह चिड़कली छोटी बहन पंखी के साथ मिलकर अपनी गुडिय़ा का ब्याह रचाने में मशगूल थी। पास ही बैठी नाथी देवी रस्सी बटने के साथ-साथ शादी के सभी आयोजनों में शरीक थीं। विदाई की बेला थी। दहेज का सामान रखा जा रहा था। अन्य सामानों के साथ जब चिड़कली ने केरोसिन ...
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  January 17, 2010, 7:59 pm
आज बहुत ठंड थी। धूप खाने छत पर चला आया। दोनों बेटे और बेटी पतंग उड़ाने में मस्त थे। मैं पहुंचा तो हल्की सी मुस्कराहट के साथ देखा और फिर से नजरें टिका दीं आसमान पर। अभी ठीक से बैठा भी नहीं था कि वो काटा के शोर ने बरबस ही ध्यान खींच लिया। किसी की पतंग कट गई थी शायद। हवा में लह...
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  January 13, 2010, 8:35 pm
उसने कहामैं जा रही हूंहमेशा-हमेशा के लिएतुमसे दूरबस, जो बचे हैं पलवो गुजार लोहंसी-खुशीमेरे संगक्या-खोयाक्या-पायाइसका हिसाबलगा लेनाकलअभी तो हूं मैं तुम्हारेऔर तुम मेरे साथसुनो,जब मैं चली जाऊंगीतुम उदास मत होनारोना भी मतन घंटों बैठ करडूबते सूरज को निहारने मेंअपना व...
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Tag :रचना संसार
  December 31, 2009, 7:01 pm
यह कैसी मस्ती है, जिसमें घरवालों की भावनाओं का, अपने शरीर को होने वाली क्षति का कोई स्थान नहीं है।मैं पुलिया के नीचे घुसने के लिए मोड़ पर मुड़ा ही था कि सामने से स्कूटी पर तेज गति से आ रही दो युवतियां मेरी बाइक से भिड़ते-भिड़ते बचीं। मेरा जी धक से रह गया। मेरी हड़बड़ाहट प...
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  December 29, 2009, 7:52 pm
यह विचार हमें योगेन्द्र पिन्टू ने जयपुर से भेजे हैं ...
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  December 16, 2009, 9:19 pm
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  November 26, 2009, 5:52 pm
सोचता हूँ क्यों न तुम्हारा नामखुसबू रख दूं, ताकि तुम्हें पुकार सकूं बेहिचक कहीं भी, कभी भीसबके बीच में.मैं कहूँगा खुसबू आ रही है.सब कहेंगे हाँ, आ रही है.मेरा मतलब तुमसे होगा और उनका मतलब...............
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  November 6, 2009, 6:05 pm
कई दिनों से कुछ नहीं लिख पाया इसलिए अपनी एक पुराणी लघुकथा पोस्ट कर रहा हूँ. कई साथी इसे पढ़ चुके होंगे, लेकिन यह उन्हें भी नया सा अनुभव देगी, क्योंकि यह रोज मर्रा की जिंदगी से जुडी हुयी है.गोद मैं बच्चा लिए व हाथ मैं झोला लटकाए एक ग्रामीण महिला बस मैं चडी, सीट खाली नही देख एक ...
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  May 17, 2009, 7:36 pm
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