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My lyrics ( अंधड़ से संग्रहित काव्य )

पहनकर नकाब हसीनों ने, कुछ पर्दानशीनों ने,गिन-गिनकर सितम ढाये, बेरहम महजबीनों ने ! लम्हा यूं भारी गुजरा, उनके वादों की बौछारों से, हफ़्तों को दिनों ने झेला, सालों को महीनों ने !निष्कपटता,नेकनीयती की नक्काशी के साँचों में, जौहरी को जमके परखा,सब खोटे-खरे नगीनों ने !खुदकुशी क...
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  May 28, 2012, 9:06 am
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