Hamarivani.com

Pagla Masiha पगला मसीहा

साधुवाद उनको देते हम, जो हैं ऐसे चैनल वाले।उनको बेनकाब करते हैं, करते हैं जो धंधे काले॥    स्टिंग आपरेशन करके वे, बिना खौफ सब कुछ दिखलाते।    बड़े बने जो इज्जतवाले, उनका असली रूप बताते॥ऐसा होता रहा अगर जो, तो अपराधी नहीं बचेंगे।गुप्त कैमरे छिपा कर उनको, जहां छिप...
Pagla Masiha पगला मसीहा...
Tag :
  May 5, 2014, 11:29 am
गठबंधन की सरकारों में, होती जम कर सौदेबाजी।पद भी लें, रुपये भी ऐंठें, तभी साथ देते कुछ पाजी॥    इस पर भी उनके नखरों को, मजबूरन ही सहना होता।    गर सरकार बचानी हो तो, 'हां'में 'हां'करना ही होता॥दल बदलू कानून बना जो, उसकी देखें छीछालेदर।सुबह-शाम दल बदले जाते, कुछ होता न...
Pagla Masiha पगला मसीहा...
Tag :
  May 5, 2014, 11:26 am
 कहानी डॉ. रुक्म त्रिपाठी      सुबह-सुबह एक मनहूस खबर से सारा कस्बा सन्न रह गया। जिस वैद्य ने डायरिया के सैकड़ों रोगियों की जान बचायी, वह उसी की चपेट में कस्बे के बाहर सरकारी अस्पताल में पड़ा छटपटा रहा है।      चोटे वैद्य चंद्रप्रकाश दुबे, जिनकी बदौलत क...
Pagla Masiha पगला मसीहा...
Tag :
  December 30, 2013, 8:45 am
-डॉ. रुक्म त्रिपाठीमृग मरीचिका जल सदृश,लहर-लहर लहराय।हरिण भागता ही रहे,किंतु बूंद नहिं पाय।।पशु, पक्षी व्याकुल फिरें,नही जलाशय पास।चहुंदिशि सूखा ही दिखे,कैसे बुझेगी प्यास।।सिंह और मृग खोजते,मिल कर शीतल छांव।ऐसे संकट के समय,उनमें नहीं दुराव।।सूखी जीभ निकाल कर,लक-लक क...
Pagla Masiha पगला मसीहा...
Tag :
  May 19, 2013, 12:35 pm
जब जब निर्वाचन होते हैं, प्रत्याशी निरीह बन जाते।याचक बन कर वोट मांगते, फिर दर्शन दुर्लभ हो जाते॥पांच साल में एक बार वे, हाथ जोड़ कर बनें भिखारी।तब ऐसा वे ढोंग रचाते, जब मति मारी जाय हमारी॥सबसे बड़ी भूल यह होती, हम उनको पहचान न पाते।उनका हाव भाव लख कर के, महा मूर्ख  उल्लू ...
Pagla Masiha पगला मसीहा...
Tag :
  May 17, 2013, 11:15 am
पहले नहीं हुआ करती थी, जैसी राजनीति अब होती।घृणित आचरण के चलते वह, दिन-दिन निज मर्यादा खोती॥पहले सभ्य, शिष्ट होते थे, राजनीति वाले मतवाले।अब बहु बाहुबली घुस आए, जिनकी अपनी होती चालें॥जब भी निर्वाचन होते हैं, सब से अधिक टिकट वे पाते।भय से, छल से, निज दल  को हैं जो जय दिलवात...
Pagla Masiha पगला मसीहा...
Tag :
  April 24, 2013, 12:03 pm
(v)×¢˜æè- ÂÎ ÂÚU Áô ·¤Öè, ÕñÆU ÁæØ §·¤ ÕæÚU ÐçȤÚU ßãU ©Uâ ÂÚU ¿æãUÌæ, ×õM¤âè ¥çÏ·¤æÚUH            ×õM¤âè ¥çÏ·¤æÚU, âæÚU ãU×Ùð ØãU ÂæØæР           ÖêÜ ÁæØ çâhæ¢Ì , Á·¤Ç¸U Üð ÂÎ ·¤è ×æØæ H·¤ãñU L¤€× ·¤çßÚUæØ, ÖÜð ãUô ¿æãðU ⢘æèÐâÕ ÒÂÎÓ ×ð´ ãñ´U çÜŒÌ , Õß¿èü ãUô Øæ ×¢˜æèH                        (w)·é¤âèü ·¤è ×çãU×æ ¥ç×Ì, ÕÚUçÙ Ù Üæ»ð ÂæÚU Ðç·¤ÌÙð ÆUô·¤ÚU ¹æ ç»ÚðU, ç·¤ÌÙð ãUô´ ¥âßæÚU H            ç·¤ÌÙð ã...
Pagla Masiha पगला मसीहा...
Tag :
  March 16, 2013, 11:43 am
चमड़ी चली  गयी , मगर दमड़ी नहीं गयी।ये बेशरम हैं, इनको मत दाद दीजिए ॥जो हुस्न पूजते हैं, होते हैं इंटेलिजेंट।ऐसों को अपने पास ही,  आबाद कीजिए॥नाजुक मिजाज वालों से होती बहुत गलती।दुतकारिए न इनको, मधुर प्यार दीजिए ॥गर हुस्न के गरूर से, उनके चढ़े तेवर।माथा झुका कर , कीमती उप...
Pagla Masiha पगला मसीहा...
Tag :
  March 13, 2013, 3:35 pm
निर्भय हो चाहे जो करता,ऐसा पाकिस्तान।लगता बहुत-बहुत भय खाता, अपना हिंदुस्तान॥भारत के सैनिक का सिर जब, काटा पाकिस्तानी।लगा हमारे आकाओं  को, नहीं  हुई   हैरानी ॥संजय या इंदिरा जी होतीं, नहीं इसे सह पातीं।दुश्मन की छाती पर चढ़ कर, अच्छा पाठ पढ़ातीं॥पता नहीं इससे भी अप्रिय...
Pagla Masiha पगला मसीहा...
Tag :
  January 31, 2013, 2:39 pm
                          चकल्लस                          आजादीपाकिस्तानी सरहद में घुस, हत्या किये हजार।भारत इसका बदला ना ले, और जताता प्यार ।।राजनीति में आ बैठे हैं कितने भ्रष्टाचारी।घूसखोर, हत्यारे दागी, अगणित व्यभिचारी।।मनमानी जब कमा रहे हैं, जमाखोर व्यापारी।अन्न सैक़ड़ों टन सड़ जा...
Pagla Masiha पगला मसीहा...
Tag :
  January 25, 2013, 5:27 pm
यदि प्रधानमंत्री बन जाते, अपने वीर सुभाष ।तो जनता की पूरन होती, मन चाही सब आश।।     इतना भ्रष्टाचार न होता, ना होता व्यभिचार।     न गरीब भूखा मर पाता, महंगाई से हार ।।पाकिस्तान शत्रु बन करके, लुक छिप कर जो  मारे।कब का सबक सिखा देते,  करके वारे न्यारे  ।।     दुर्घटना में नही...
Pagla Masiha पगला मसीहा...
Tag :
  January 23, 2013, 6:38 pm
                     कर दिया परायाचौथेपन में जीवनसाथी, यदि हठात् ही छोड़े साथ।ऐसा अंधकार छा जाता,राह न सूझे, हुए अनाथ॥सभी जानते , जब जाना हो, कोई संग न आता ।सब कुछ यहीं छूट जाता है, जैसा भी हो नाता ॥     सब सद्ग्रंथ यही कहते हैं, कुछ ऐसी करनी कर जाओ।     अंतकाल जब जाओ जग से, कष्ट न भोगो स...
Pagla Masiha पगला मसीहा...
Tag :
  January 21, 2013, 4:55 pm
साथी पहली बार जिसे पकड़ा था,वह था मेरा हाथ।और कहा था , सारा जीवन,रहना हमको साथ।।अगणित कष्ट झेल कर तुमने,हर क्षण साथ निभाया।मुझे कष्ट हो तुम सह लेती,ऐसा कभी  न पाया।रही प्रेरणा जीवन भर तुम,तभी आज लिख पाता।वरना पहले छंद काव्य से,नहीं रहा था नाता।।तुम वसंत बन कर आयीं,आंधी ब...
Pagla Masiha पगला मसीहा...
Tag :
  January 16, 2013, 8:04 pm
 वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार डॉ. रुक्म त्रिपाठी के उद्गार-राजेश त्रिपाठीकोलकाता : पिछले दिनों यहां भारतीय भाषा परिषद के सभागार में हिंदी पत्रकारिता के 186 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में स्थानीय हिंदी दैनिक ‘छपते छपते’ के तत्वावधान में ‘हिंदी पत्रकारिता की 186 वर्ष की या...
Pagla Masiha पगला मसीहा...
Tag :
  June 29, 2012, 11:33 am
डा. रुक्म त्रिपाठीकुहू कुहू कर कोकिला,गाती फिरती आज।कृपया स्वागत कीजिए,आये श्री ऋतुराज ॥गुन गुन करता बाग में,गाता है मृदु छंद ।अली कली मुख चूम कर,चूस रहा मकरंद ॥विरही भामिन भावती,दूर बसे जा कंत।जाने अब कब मिलन हो,बीत न जाय बसंत ॥कामदेव-रति से लगें,आनंदित दो म...
Pagla Masiha पगला मसीहा...
Tag :
  February 10, 2011, 12:23 pm
डा. रुक्म त्रिपाठीप्रसंग पचास के अर्धदशक का है। वैष्णव देवी कटरा स्थित विश्वायतन योगाश्रम से स्वामी कार्तिकेय के शिष्य स्वामी हरि भक्त चैतन्य तथा धीरेंद्र ब्रह्मचारी योग का प्रचार करने कलकत्ता आये थे। उन्होंने रेड रोड के बगल में स्थित मोहम्मडन स्पोर्टिंग क्लब के ...
Pagla Masiha पगला मसीहा...
Tag :
  January 24, 2011, 10:18 pm
वरना ये महाशय उन्हें कचडे के ढेर में फिकवा कर दम लेते-डॉ.रुक्म त्रिपाठीएक पत्रकार और कहानीकार, जिन्हें आप सहज ही पहचान जायेंगे वे आयु में सत्तर पार कर चुके हैं किंतु अपने को नये लेखकों का ‘गॉडफादर’ मानते हैं और उन्हें मंच देने के लिए पुरानी पीढ़ी के रचनाकारों की अपेक्...
Pagla Masiha पगला मसीहा...
Tag :
  June 20, 2010, 12:24 pm
सुमुखि, सुलोचनि कामनी,भूल साज शृंगार।रह-रह करवट बदलती,व्याकुल बारंबार।।नहीं सुनाई दे रही,अब कोयल की कूक।लगता वह मूर्च्छित पड़ी,लग जाने से लूक।।धूल बवंडर बन उठे,सूखे कूप-तड़ाग।जलविहीन सरिता दिखे,बिन सिंदूरी मांग।।पथ-डगरें सुनसान सब,सन्नाटा है व्याप।शनः-शनः है बढ़ र...
Pagla Masiha पगला मसीहा...
Tag :
  May 13, 2010, 10:12 am
मृग मरीचिका जल सदृश,लहर लहर लहराय।हिरण भागता ही फिरे,एक बूंद नहिं पाया।।पशु पक्षी व्याकुल फिरें,नहीं जलाशय पास।चहुं दिशि जब सूखा दिखे,कैसे बुझेगी प्यास ।।आकुल, व्याकुल सिंह, मृग,भूल शत्रुवत भाव।शीतलता की चाह हित,खोज रहे मिल ठांव।।सूखी जीभ निकाल कर,लक-लक करता श्वान।न...
Pagla Masiha पगला मसीहा...
Tag :
  May 13, 2010, 10:10 am
कहानीडॉ. रुक्म त्रिपाठीजगेसर काका को शहर में देख कर मैं चौंक उठा। सोचा, फौज से छुट्टी मिलने पर गांव जा रहे होंगे। उनके पांव छूते हुए कहा-‘पांव लागूं काका।’काका ने मुड़ कर देखा, ‘अरे नंदन बेटवा! तुम यहां?’‘हां, काका। गांव में मिडिल तक स्कूल है। आगे की पढ़ाई के लिए मामा ने ...
Pagla Masiha पगला मसीहा...
Tag :
  May 7, 2010, 10:41 am

...
Pagla Masiha पगला मसीहा...
Tag :
  January 1, 1970, 5:30 am
[ Prev Page ] [ Next Page ]

Share:
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3666) कुल पोस्ट (165970)