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सृजन और सरोकार

“क्रांति से हमारा अर्थ है – अंत में समाज की ऐसी व्यवस्था की स्थापना जिसमें किसी प्रकार के हड़कम्प का भय न हो, जिसमें मज़दूर वर्ग के प्रभुत्व को मान्यता दी जाए, और उसके फलस्वरूप विश्व संघ पूंजीवाद के बंधनों, दुखों तथा युद्धों की मुसीबतों से मानवता का उद्वार कर सके…” - भग...
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Tag :विचार-पोस्टर
  March 24, 2013, 6:49 pm
मैं पुरुष खल कामी००००००मैं पुरुष हूंएक लोहे का सरिया हैसुदर्शन चक्र सा यहबार-बार लौट आता है, इतराता हैयह भी मैं ही हूंआदि-अनादि से, हजारों सालों सेमैं ही हूं जो रहा परे सभी सवालों सेमैं सदा से हूंमैं अदा से हूंमैं ही दुहते हुए गाय के स्तनों कोरच रहा था अविकल ऋचाएंमैं ही...
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Tag :कविताएं
  January 2, 2013, 8:12 pm
महेन्द्र नेह के दो गीत ( उदयपुर से निकलने वाले पाक्षिक ‘महावीर समता संदेश’ से साभार )( एक )माफ़ियाये समयहमको नित्य धमकाताछोड़ दो यह रास्ताईमान वालाहम कहें वैसे चलोबदल दो सांचे पुरानेहम कहें जैसे ढलोमाफ़िया यह समयहमको नित्य हड़कातात्याग दो ये सत्य कीतोता रटन्तीहम कह...
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Tag :Uncategorized
  December 29, 2012, 6:52 pm
( कसाब की फांसी के बाद, अफ़ज़ल को भी जल्दी ही फांसी की मांग उठाए जाने की पृष्ठभूमि में यह आलेख पढ़ने को मिला. 13 दिसम्बर, संसद पर हमले की तारीख़ की आमद के मद्देनज़र अरुंधति रॉय के इस आलेख को गंभीरता से पढ़ा जाना और आम किया जाना और भी मौज़ूं हो उठता है. हिंदी में यह अभी नेट पर उ...
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Tag :यहां-वहां, जो अच्छा लगा
  December 12, 2012, 6:38 pm
( कसाब की फांसी के बाद, अफ़ज़ल को भी जल्दी ही फांसी की मांग उठाए जाने की पृष्ठभूमि में यह आलेख पढ़ने को मिला. 13 दिसम्बर, संसद पर हमले की तारीख़ की आमद के मद्देनज़र अरुंधति रॉय के इस आलेख को गंभीरता से पढ़ा जाना और आम किया जाना और भी मौज़ूं हो उठता है. हिंदी में यह अभी नेट पर उ...
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Tag :यहां-वहां, जो अच्छा लगा
  December 11, 2012, 5:11 pm
( कसाब की फांसी के बाद, अफ़ज़ल को भी जल्दी ही फांसी की मांग उठाए जाने की पृष्ठभूमि में यह आलेख पढ़ने को मिला. 13 दिसम्बर, संसद पर हमले की तारीख़ की आमद के मद्देनज़र अरुंधति रॉय के इस आलेख को गंभीरता से पढ़ा जाना और आम किया जाना और भी मौज़ूं हो उठता है. हिंदी में यह अभी नेट पर उ...
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Tag :यहां-वहां, जो अच्छा लगा
  December 10, 2012, 5:26 pm
( कसाब की फांसी के बाद, अफ़ज़ल को भी जल्दी ही फांसी की मांग उठाए जाने की पृष्ठभूमि में यह आलेख पढ़ने को मिला. 13 दिसम्बर, संसद पर हमले की तारीख़ की आमद के मद्देनज़र अरुंधति रॉय के इस आलेख को गंभीरता से पढ़ा जाना और आम किया जाना और भी मौज़ूं हो उठता है. हिंदी में यह अभी नेट पर उ...
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Tag :यहां-वहां, जो अच्छा लगा
  December 9, 2012, 5:29 pm
( कसाब की फांसी के बाद, अफ़ज़ल को भी जल्दी ही फांसी की मांग उठाए जाने की पृष्ठभूमि में यह आलेख पढ़ने को मिला. 13 दिसम्बर, संसद पर हमले की तारीख़ की आमद के मद्देनज़र अरुंधति रॉय के इस आलेख को गंभीरता से पढ़ा जाना और आम किया जाना और भी मौज़ूं हो उठता है. हिंदी में यह अभी नेट पर उ...
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Tag :यहां-वहां, जो अच्छा लगा
  December 8, 2012, 10:15 pm
वे मुसलमान थे० देवी प्रसाद मिश्रकहते हैं वे विपत्ति की तरह आएकहते हैं वे प्रदूषण की तरह फैलेवे व्याधि थेब्राह्मण कहते थे वे मलेच्छ थेवे मुसलमान थेउन्होंने अपने घोड़े सिन्धु में उतारेऔर पुकारते रहे हिन्दू! हिन्दू!! हिन्दू!!!बड़ी जाति को उन्होंने बड़ा नाम दियानदी का न...
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Tag :कविताएं-अन्य कवियों की
  November 25, 2012, 9:57 am
‘जनता पागल हो गई है’ – एक पुनर्पाठ( इस नाटक की पीडीएफ़ फाइल इस लिंक से डाउनलोड की जा सकती है– ‘जनता पागल हो गई है’ लेखक-शिवराम janta pagal ho gayi hai.pdf 1.4 MB )जयपुर के एक बाग में नाटक ‘जनता पागल हो गई है’ का प्रदर्शनशिवराम का नुक्कड़ नाटक ‘जनता पागल हो गई है’ आपातकाल से पहले ही 1974 में लिखा ग...
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Tag :आलेख
  November 3, 2012, 7:23 pm
आलेख ‘पूंजीवाद एक प्रेत कथा’ का अंतिम हिस्सा. यहां पहला, दूसरा, तीसरा, चौथा, पांचवा, छठा, सातवां, आठवां, नौवां, दसवां, ग्यारहवां, बारहवां, तेरहवां, चौदहवां.( मूलतः ‘आउटलुक’ में प्रकाशित अरुंधति रॉय के इस आलेख का भारतभूषण द्वारा किया गया अनुवाद ‘समयांतर’ के मई-२०१२ अंक में ...
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Tag :यहां-वहां, जो अच्छा लगा
  October 24, 2012, 11:10 am
आलेख ‘पूंजीवाद एक प्रेत कथा’ का चौदहवां हिस्सा. यहां पहला, दूसरा, तीसरा, चौथा, पांचवा, छठा, सातवां, आठवां, नौवां, दसवां, ग्यारहवां, बारहवां, तेरहवां.( मूलतः ‘आउटलुक’ में प्रकाशित अरुंधति रॉय के इस आलेख का भारतभूषण द्वारा किया गया अनुवाद ‘समयांतर’ के मई-२०१२ अंक में प्रकाश...
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Tag :यहां-वहां, जो अच्छा लगा
  October 20, 2012, 9:32 pm
आलेख ‘पूंजीवाद एक प्रेत कथा’ का तेरहवां हिस्सा. यहां पहला, दूसरा, तीसरा, चौथा, पांचवा, छठा, सातवां, आठवां, नौवां, दसवां, ग्यारहवां, बारहवां.( मूलतः ‘आउटलुक’ में प्रकाशित अरुंधति रॉय के इस आलेख का भारतभूषण द्वारा किया गया अनुवाद ‘समयांतर’ के मई-२०१२ अंक में प्रकाशित हुआ था...
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Tag :यहां-वहां, जो अच्छा लगा
  October 18, 2012, 8:13 pm
आलेख ‘पूंजीवाद एक प्रेत कथा’ का बारहवां हिस्सा. यहां पहला, दूसरा, तीसरा, चौथा, पांचवा, छठा, सातवां, आठवां, नौवां, दसवां, ग्यारहवां.( मूलतः ‘आउटलुक’ में प्रकाशित अरुंधति रॉय के इस आलेख का भारतभूषण द्वारा किया गया अनुवाद ‘समयांतर’ के मई-२०१२ अंक में प्रकाशित हुआ था. इसे यहा...
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Tag :यहां-वहां, जो अच्छा लगा
  October 13, 2012, 8:09 pm
द्वितीय शिवराम स्मृति दिवस समारोहव्यापक जन-आंदोलन का माहौल बनाना होगाकोटा, 2 अक्टूबर 2012. सुप्रसिद्ध कवि, नाट्य लेखक, निर्देशक, समीक्षक एवं विचारक शिवराम के द्वितीय स्मृति दिवस पर ‘विकल्प’ जन सांस्कृतिक मंच, श्रमजीवी विचार मंच एवं अभिव्यक्ति नाट्य एवं कला मंच द्वारा 3...
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Tag :विभिन्न गतिविधियां
  October 8, 2012, 6:02 pm
आलेख ‘पूंजीवाद एक प्रेत कथा’ का ग्यारहवां हिस्सा. यहां पहला, दूसरा, तीसरा, चौथा, पांचवा, छठा, सातवां, आठवां, नौवां, दसवां.( मूलतः ‘आउटलुक’ में प्रकाशित अरुंधति रॉय के इस आलेख का भारतभूषण द्वारा किया गया अनुवाद ‘समयांतर’ के मई-२०१२ अंक में प्रकाशित हुआ था. इसे यहां के पाठक...
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Tag :यहां-वहां, जो अच्छा लगा
  October 6, 2012, 6:14 pm
आलेख ‘पूंजीवाद एक प्रेत कथा’ का दसवां हिस्सा. यहां पहला, दूसरा, तीसरा, चौथा, पांचवा, छठा, सातवां, आठवां, नौवां.( मूलतः ‘आउटलुक’ में प्रकाशित अरुंधति रॉय के इस आलेख का भारतभूषण द्वारा किया गया अनुवाद ‘समयांतर’ के मई-२०१२ अंक में प्रकाशित हुआ था. इसे यहां के पाठकों के लिए छो...
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Tag :यहां-वहां, जो अच्छा लगा
  October 3, 2012, 7:52 pm
आलेख ‘पूंजीवाद एक प्रेत कथा’ का नौवां हिस्सा. यहां पहला, दूसरा, तीसरा, चौथा, पांचवा, छठा, सातवां, आठवां.( मूलतः ‘आउटलुक’ में प्रकाशित अरुंधति रॉय के इस आलेख का भारतभूषण द्वारा किया गया अनुवाद ‘समयांतर’ के मई-२०१२ अंक में प्रकाशित हुआ था. इसे यहां के पाठकों के लिए छोटे-छोट...
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Tag :यहां-वहां, जो अच्छा लगा
  September 29, 2012, 10:38 pm
आलेख ‘पूंजीवाद एक प्रेत कथा’ का आठवां हिस्सा. यहां पहला, दूसरा, तीसरा, चौथा, पांचवा, छठा, सातवां.( मूलतः ‘आउटलुक’ में प्रकाशित अरुंधति रॉय के इस आलेख का भारतभूषण द्वारा किया गया अनुवाद ‘समयांतर’ के मई-२०१२ अंक में प्रकाशित हुआ था. इसे यहां के पाठकों के लिए छोटे-छोटे टुकड़...
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Tag :यहां-वहां, जो अच्छा लगा
  September 27, 2012, 8:43 pm
आलेख ‘पूंजीवाद एक प्रेत कथा’ का सातवां हिस्सा. यहां पहला, दूसरा, तीसरा, चौथा, पांचवा, छठा.( मूलतः ‘आउटलुक’ में प्रकाशित अरुंधति रॉय के इस आलेख का भारतभूषण द्वारा किया गया अनुवाद ‘समयांतर’ के मई-२०१२ अंक में प्रकाशित हुआ था. इसे यहां के पाठकों के लिए छोटे-छोटे टुकड़ो में प...
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Tag :यहां-वहां, जो अच्छा लगा
  September 22, 2012, 5:52 pm
आलेख ‘पूंजीवाद एक प्रेत कथा’ का छठा हिस्सा. यहां पहला, दूसरा, तीसरा, चौथा, पांचवा.( मूलतः ‘आउटलुक’ में प्रकाशित अरुंधति रॉय के इस आलेख का भारतभूषण द्वारा किया गया अनुवाद ‘समयांतर’ के मई-२०१२ अंक में प्रकाशित हुआ था. इसे यहां के पाठकों के लिए छोटे-छोटे टुकड़ो में प्रस्तु...
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Tag :यहां-वहां, जो अच्छा लगा
  September 19, 2012, 7:37 pm
आलेख ‘पूंजीवाद एक प्रेत कथा’ का पांचवा हिस्सा. यहां पहला, दूसरा, तीसरा, चौथा.( मूलतः ‘आउटलुक’ में प्रकाशित अरुंधति रॉय के इस आलेख का भारतभूषण द्वारा किया गया अनुवाद ‘समयांतर’ के मई-२०१२ अंक में प्रकाशित हुआ था. इसे यहां के पाठकों के लिए छोटे-छोटे टुकड़ो में प्रस्तुत किय...
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Tag :यहां-वहां, जो अच्छा लगा
  September 15, 2012, 10:33 pm
आलेख ‘पूंजीवाद एक प्रेत कथा’ का चौथा हिस्सा. यहां पहला, दूसरा, तीसरा.( मूलतः ‘आउटलुक’ में प्रकाशित अरुंधति रॉय के इस आलेख का भारतभूषण द्वारा किया गया अनुवाद ‘समयांतर’ के मई-२०१२ अंक में प्रकाशित हुआ था. इसे यहां के पाठकों के लिए छोटे-छोटे टुकड़ो में प्रस्तुत किया जा रहा...
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Tag :यहां-वहां, जो अच्छा लगा
  September 12, 2012, 6:57 pm
आलेख ‘पूंजीवाद एक प्रेत कथा’ का तीसरा हिस्सा. यहां पहला, दूसरा.( मूलतः ‘आउटलुक’ में प्रकाशित अरुंधति रॉय के इस आलेख का भारतभूषण द्वारा किया गया अनुवाद ‘समयांतर’ के मई-२०१२ अंक में प्रकाशित हुआ था. इसे यहां के पाठकों के लिए छोटे-छोटे टुकड़ो में प्रस्तुत किया जा रहा है ता...
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Tag :यहां-वहां, जो अच्छा लगा
  September 8, 2012, 9:24 pm
आलेख ‘पूंजीवाद एक प्रेत कथा’ का दूसरा हिस्सा. यहां पहला.( मूलतः ‘आउटलुक’ में प्रकाशित अरुंधति रॉय के इस आलेख का भारतभूषण द्वारा किया गया अनुवाद ‘समयांतर’ के मई-२०१२ अंक में प्रकाशित हुआ था. इसे यहां के पाठकों के लिए छोटे-छोटे टुकड़ो में प्रस्तुत किया जा रहा है ताकि यह स...
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Tag :यहां-वहां, जो अच्छा लगा
  September 1, 2012, 7:29 pm
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