साहित्य शिल्पी

उसका भला-सा नाम है ‘संतराम’, पहले लोगों के मुँह से वह सन्तू, सन्तुवा या सन्तूरे पुकारा जाता था।धीरे-धीरे सन्तू, सन्तुवा या सन्तूरे कब लुप्त हो गया और ‘कबरीके’ का सम्बोधन उसके लिये कब शुरू हो गया, उसे ठीक से याद नहीं।‘कबरी’ उसकी स्वर्गवासी ‘माँ’ को पुकारा जाता था जो शायद...
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Tag :कहानी
  October 4, 2013, 4:49 pm
विरासत में 'काशीनाथ सिंह' की कहानी 'तीन काल कथा'    यह वाकया दुद्धी तहसील के एक परिवार का है। पिछले रोज चार दिनों से गायब मर्द पिनपिनाया हुआ घर आता है और दरवाजे से आवाज देता है।  पूरा पढने के लिये यहाँ क्लिक करें।----------भाषा सेतु में 'वरवर राव' की कविता 'मूल्य'  हमारी आक...
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Tag :अंक-24
  October 9, 2012, 9:04 am
दामन वफ़ाओं का कभी दागदार न होताअगर हमें उस पर इतना ऐतबार न होता-----जज़्बातों को मेरे यूँ हवा ना दे तूगर ये उड़ जायेंगे तो नींद चली जाएगी तेरी----- जब भी कुछ कहने चला हूँ उससेएक ख़ामोशी सी ओढ़ ली मैंने----- गुमनामियों के घने अंधेरों से बाहर आऊं कैसेरौशनी की किरण नश्तर सी चुभी ह...
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Tag :मंजरी शुक्ला
  October 9, 2012, 8:51 am
कागभुशुण्डि जी, कोलिला शर्मा से बतिया रहे थे।‘बताईये कलकता को कोलकाता कर दिया, मद्रास को चेन्नई कर दिया, बम्बई को मुम्बई कर दिया, बेंगलोर को बेंगलुरु कर दिया लेकिन कभी डलहौजी या बख्तियारपुर के नाशम भी बदलेंगे?’ काक नें कहा। ‘ये नाम क्यों बदलने चाहिये?’ मृदुभाषिणी को...
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Tag :लघुकथा
  October 9, 2012, 8:12 am
जादुई यथार्थ का उपन्यासमान लीजिए कोई व्यक्ति धुत्त होकर पंद्रह साल तक कोमा में चला जाये और उसे उस अवस्था में उसे खूब लंबा सपना आये। सपना भी इतना अजीबोगरीब कि वह  क़त्ल के झूठे इल्जाम में सजा भुगतने के लिए जेल चला जाये। एक मजेदार दृश्य में मौत नायक को लेने के लिए आती है...
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Tag :मैने पढी किताब
  October 9, 2012, 8:00 am
राजगृह के कोषाध्यक्ष की पुत्री भद्रा बचपन से ही प्रतिभाशाली थी। उसने माता-पिता की इच्छा के विरुद्ध प्रेम विवाह कर लिया। विवाह के बाद उसे पता चला कि युवक दुर्व्यसनी और अपराधी किस्म का है। एक दिन उस युवक ने भद्रा के तमाम आभूषण कब्जे में ले लिए और उसकी हत्या का प्रयास क...
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Tag :बुद्ध
  October 9, 2012, 7:48 am
विदेशी चैनलों के युग में जैसे भारतीय संस्कृति गायब है, वैसे ही पिछले कई दिनों से राधेलाल गायब है। भारतीय जनता बुद्धू बक्से की नशेड़ी है, मैं राधेलाल का नशेडी हो गया हूँ। जानता हूँ कि राधेलाल से मिलकर मुझे कोई सार्थक उपलiब्ध नहीं होगी, घंटों इधर उधर की हाँक कर वह मेरा समय ...
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Tag :
  October 9, 2012, 7:35 am
बातों - बातों में जो सिहरती  हैहाँ वो लड़की  किसी पे मरती हैहाथ में  खुशबू भरा खत लेकरअब  हवा  चलती औ ठहरती हैबजने  लगती है धूप आँगन कीजब भी  वो सीढ़ियाँ उतरती हैइश्क  करना  तो बस इबादत हैबात  ये  सबको क्यूँ अखरती हैसबकी रातों को नींद मिल जायेरब से ऐसी  द...
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Tag :
  October 9, 2012, 7:22 am
जहां मेरी याद बैठी है उस कमरे में मेरी याद बैठी हैजहां शाम के वक्‍त खिड़की सेहल्‍दी जैसा पीला प्रकाश भर जाता हैतुम्‍हारी देह को और कान्तिवान करता हुआरसोई के दरवाज़े के ठीक सामने कीउसी खिड़की मेंतुम्‍हारे केशों में वेणी बनने को आतुरमोगरे के फूल महकते हैंसोफे पर ब...
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Tag :प्रेमचंद गाँधी
  October 9, 2012, 7:09 am
2008 को दस मई की सुबह। राजधानी एक्सप्रैस आबू रोड पर रुकी। हम अपने सामान समेत गाड़ी से उतरने के लिए तैयार खड़े थे। डिब्बे का दरवाज़ा खुलते ही आबू पर्वत की हवाएँ दस्तक देने लगीं। यह तो हमें बाद में पता चला कि गई रात पानी गिरा था। थोड़ी देर बाद हमारी टैक्सी तेज़ रफ़्तार के साथ...
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Tag :यात्रा वृतांत
  October 9, 2012, 6:45 am
हमारी आकांक्षाएँ ही नहींकभी-कभार हमारे भय भी वक़्त होते हैं ।द्वेष अंधेरा नहीं हैतारों भरी रातइच्छित स्थान परवह प्रेम भाव से पिघल करफिर से जम करहमारा पाठ हमें ही बता सकते हैं ।कर सकते हैं आकाश को विभाजित ।विजय के लिए यज्ञ करने सेमानव-मूल्यों के लिए लड़ी जाने वाली लड़...
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Tag :भाषा सेतु
  October 9, 2012, 6:24 am
हमारी आकांक्षाएँ ही नहींकभी-कभार हमारे भय भी वक़्त होते हैं ।द्वेष अंधेरा नहीं हैतारों भरी रातइच्छित स्थान परवह प्रेम भाव से पिघल करफिर से जम करहमारा पाठ हमें ही बता सकते हैं ।कर सकते हैं आकाश को विभाजित ।विजय के लिए यज्ञ करने सेमानव-मूल्यों के लिए लड़ी जाने वाली लड़...
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Tag :भाषा सेतु
  October 9, 2012, 6:24 am
अकालयह वाकया दुद्धी तहसील के एक परिवार का है। पिछले रोज चार दिनों से गायब मर्द पिनपिनाया हुआ घर आता है और दरवाजे से आवाज देता है। अन्दर से पैर घसीटती हुई उसकी औरत निकलती है। मर्द अपनी धोती की मुरींसे दस रुपये का एक मुड़ा-तुड़ा नोट निकालता है और औरत के हाथ पर रखकर बोलता ह...
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Tag :कहानी
  October 9, 2012, 5:54 am
अकालयह वाकया दुद्धी तहसील के एक परिवार का है। पिछले रोज चार दिनों से गायब मर्द पिनपिनाया हुआ घर आता है और दरवाजे से आवाज देता है। अन्दर से पैर घसीटती हुई उसकी औरत निकलती है। मर्द अपनी धोती की मुरींसे दस रुपये का एक मुड़ा-तुड़ा नोट निकालता है और औरत के हाथ पर रखकर बोलता ह...
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Tag :काशीनाथ सिंह
  October 9, 2012, 5:54 am
  विरासत में ‘रामधारी सिंह दिनकर’ की कविता ‘हिमालय’ तू मौन त्याग, कर सिंहनाद; रे तपी आज तप का न कालनवयुग-शंखध्वनि जगा रही; तू जाग, जाग, मेरे विशाल।  पूरा पढने के लिये यहाँ क्लिक करें।----------देस-परदेस में ‘कार्ल मार्क्स’ की कविता ‘जेनी के लिये’ सबोधित करता हूँ गीत क्यों ...
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Tag :वर्ष छ:
  September 25, 2012, 9:15 am
आवारा जगमगाती जागती, सड़कों पे आवारा फिरूँग़ैर की बस्ती है, कब तक दर-ब-दर मारा फिरूँऐ ग़म-ए-दिल क्या करूँ, ऐ वहशत-ए-दिल क्या करूँझिलमिलाते कुमकुमों की, राह में ज़ंजीर सीरात के हाथों में, दिन की मोहिनी तस्वीर सीमेरे सीने पर मगर, चलती हुई शमशीर सीऐ ग़म-ए-दिल क्या करूँ, ऐ वहश...
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Tag :
  September 25, 2012, 8:47 am
कल हिंदी दिवस पर कई हिंदी सेवियों से मुलाकात हुई। 2012 में हिंदी सेवी होना आसान काम नहीं है। जोहानिसबर्ग दक्षिण अफ्रीका तक जाना पड़ेगा हिंदी योद्धाओं को विश्व हिंदी सम्मेलन में हिंदी बचाने को। हिंदी के हक के लिए जोहानिसबर्ग तक जाना पड़ता है घर परिवार को यहां छोड़कर, (दा...
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Tag :व्यंग्य
  September 25, 2012, 8:37 am
तुमने कहा..-------तुमने कहाकि तुमसूरज के पास रहते हुए भीनहीं भूलेझोपड़ी का अंधेरा,तुमने कहाकि तुमआसमान से बातें करते हुए भीदुलराते रहेधरती की गोद से झांकतेनन्हें बिरवे को/ औरतुमने ही कहाकि तुमहवा के साथ बहते हुए भीकरते रहेअकेले दिये केथरथराते अस्तित्व की रक्षा।वैसे, म...
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Tag :कविता
  September 25, 2012, 8:24 am
आज दो दिन हो गए थे उसको गाँव आए! करीब दस साल बाद वो गाँव आया था! इन दस सालों में उसके मम्मी-पापा तो कई बार गाँव आए, पर शैक्षिक-विवशताओं के कारण वो नही आ पाया! पर अब, जब वो गाँव पर था, तो घूम-घूमकर उन सब चीजों को देख रहा था, जिनके साथ उसके बचपन के कई वर्षों की यादें जुड़ी थीं! बहुत स...
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Tag :कहानी
  September 25, 2012, 8:15 am
१पूज्य गणेशकरते हैं कल्याणदेव महान२शिवजी पुत्रसभी को लगे प्यारेदेव हैं भोले३प्रथम पूज्यमूषक की सवारीपूज्य गणेश४गणेश पूजाहर्ष का उत्सव हैलड्डू है भोग५तारणहारबप्पा मोरया गीतउत्सव रीत...
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Tag :गणेश चतुर्थी
  September 25, 2012, 8:03 am
पतन       भोपाल जाने के लिए बस जल्दी पकड़ी और  आगे की सीट पर सामान रखा था कि  किसी के जोर जोर से  रोने की आवाज आई, मैंने देखा  एक भद्र महिला छाती पीट -पीट  कर जोर जोर से रो रही थी ." मेरा बच्चा मर गया ...हाय क्या करू........ कफ़न के लिए भी पैसे नहीं है ..मदद करो बाबूजी , कोई ...
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Tag :लघुकथा
  September 25, 2012, 7:39 am
1977 के अक्टूबर माह की बात है. एक मित्र से यशपाल का‘झूठा सच’ प्राप्त हुआ.  विभाजन की त्रासदी ने मेरे अंदर हलचल मचा दी.  उस उपन्यास के पात्र आज भी मेरे अंदर जीवित हैं. यद्यपि उसके बाद मैंने भीष्म साहनी का ‘तमस’ भी पढ़ा, उसपर निर्मित धारावाहिक भी देखा और द्रोणवीर कोहली का ‘...
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Tag :वाघा
  September 25, 2012, 7:03 am
विरासत में 'अरुण प्रकाश' की कहानी 'भासा'बस पूरी तरह रुकी भी नहीं थी कि राजेश स्टॉप पर कूद पड़ा। उत्तेजना के मारे। वह जल्दी से जल्दी अपने कमरे में पहुंचना चाहता था। पूरा पढने के लियेयहाँ क्लिक करें।----------देस परदेस में ‘नाज़िम हिक़मत’ की ‘दिल का दर्द’अगर मेरे दिल का आधा हिस...
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  June 24, 2012, 10:05 pm
विरासत में अमरकांत की कहानी डिप्टी कलेक्टरशकलदीप बाबू कहीं एक घंटे बाद वापस लौटे। घर में प्रवेश करने के पूर्व उन्होंने ओसारे के कमरे में झाँका, कोई भी मुवक्किल नहीं था और मुहर्रिर साहब भी गायब थे। पूरा पढने के लिये यहाँ क्लिक करें।----------देस परदेस में ‘अन्तोन चेखव’ की ‘...
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  June 10, 2012, 10:30 pm
पुलिस का दारोगा ओचुमेलोव नया ओवरकोट पहने, बगल में एक बण्डल दबाये बाजार के चौक से गुजर रहा था। उसके पीछे-पीछे लाल बालोंवाला पुलिस का एक सिपाही हाथ में एक टोकरी लिये लपका चला आ रहा था। टोकरी जब्त की गई झड़गरियों से ऊपर तक भरी हुई थी। चारों ओर खामोशी।...चौक में एक भी आदमी नही...
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Tag :देस-परदेस
  June 10, 2012, 9:59 pm
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  गूगल के द्वारा अपनी रीडर सेवा बंद करने के कारण हमारीवाणी की सभी कोडिंग दुबारा की गई है। हमारीवाणी "क्...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
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