साहित्य शिल्पी

27 जुलाई 2015 की शाम अवुल पकिर जैनुलाबदीन अब्दुल कलाम अथवा डॉक्टर ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम (15 अक्टूबर 1931 - 27 जुलाई 2015) जिन्हें मिसाइल मैन और जनता के राष्ट्रपति के नाम से जाना जाता था, भारतीय प्रबंधन संस्थान में 'रहने योग्य ग्रह'पर एक व्याख्यान दे रहे थे जब उन्हें जोरदार कार्डि...
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Tag :भारत रत्न
  July 29, 2015, 12:00 am
हवा से हवा की मुलाकात होगी। खिलेगी फ़िज़ा और बरसात होगी।। रचनाकार परिचय:- नाम- कुमार सचिन पिता- श्री अरूणेश गुप्ता माता- श्री मति पूनम देवी जन्म- 03/03\1997 पता- अंकवारा, नरायनपुर, फैजाबाद, उत्तर प्रदेश 224201 मिले गर अधर जो हमारे तुम्हारे, खुदा की बड़ी ये करामात होगी।। नहीं अब च...
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Tag :गजल
  July 28, 2015, 12:00 am
वसीम गुस्से में सामने पड़ी शराब की बोतल को काफ़ी देर से घूर रहा है. उसका जी चाह रहा है कि शराब की बोतल को दाँतों से कूच के थूक दे और फिर शीशे के टुकड़ों को अपने पैरों तले कुचल के मिट्टी में मिला दे. फिर वसीम की नज़र सामने आलमारी में रखी ढ़ेर सारी बोलतों पर जाती है. अब उसका जी चाह रह...
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Tag :क़ैस जौनपुरी
  July 27, 2015, 12:00 am
श्रीकान्त मिश्र 'कान्त'एक जिंदादिल इंसान है..और सम्प्रति कैसर के रोग से लडते हुए अस्पताल मे भर्ती है...इनकी रचनाए साप्ताहिक प्रस्तुति की जा रही है। सजनी रजनी तम चुनर ओढ़ अभिकम्पित शुभ्र ज्योत्सना से होली आहट सुन जाग रही चुपके चुपके से भाग रही रचनाकार परिचय:- श्रीकान...
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Tag :श्रीकान्त मिश्र 'कान्त'
  July 26, 2015, 12:00 am
मैंनें भगवान को देखा है। रचनाकार परिचय:- राजाभाई कौशिक आयुर्वेद मंदिर सालासर ,चुरू राजस्थान फोन ----9414214338 पाने की चाह मे मंदिर की चौखट और शिर के बीच तपी हुई जल तृप्त फूटती धरती गलते बीज में से निकलते अंकुर की सफेदी में मैंनें भगवान को देखा है। प्रणाम की बन्द हथेलियों...
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Tag :राजाभाई कौशिक
  July 25, 2015, 12:00 am
आँखों में जो सपने न सजाए होते सरेराह अपने, यूँ न पराये होते रचनाकार परिचय:- सुशील कुमार : संक्षिप्त परिचय जन्म - 1978, झारखण्ड के हजारीबाग में | शिक्षा - समाज सेवा में स्नातकोत्तर । वर्षों से सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्यरत | लम्बे समय तक एच.आई.वी. / एड्स जागरूकता ...
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Tag :सुशील कुमार हजारीबाग
  July 24, 2015, 12:00 am
पुस्तक समीक्षा उत्तर आधुनिकता, साहित्य और मीडिया पर एक उपयोगी पुस्तक यों तो उत्तर आधुनिक विमर्श पर केंद्रित अनेक पुस्तकें बाजार में उपलब्ध हैं जो विद्वत्तापूर्ण सामग्री से लबरेज हैं, किंतु उनकी एक बड़ी सीमा यह है कि प्रायः विद्वत्ता के बोझ के कारण विषय की संप्रेषणी...
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Tag :पुस्तक समीक्षा
  July 23, 2015, 12:00 am
ख़ुशी की बात होठों पर ग़मों की रात होठों पर , चले आओ कि होने दो सनम बरसात होठों पर | रचनाकार परिचय:- अनन्त आलोक साहित्यलोक , बायरी , ददाहू , सिमौर हिमाचल प्रदेश 173022 Mob: 09418740772 Email: anantalok1@gmail.com बड़ा जालिम जमाना है फँसा देगा सवालों में , मैं आने दे नहीं सकता तुम्हारी बात ...
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Tag :ग़ज़ल
  July 22, 2015, 12:00 am
पति-पत्नी दोनों नौकरी करते हैं। आज के जमाने में एक कमाने वाले से चार अादमियों का गुज़ारा भला कैसे चले? झुलसा देने वाली गर्मी पड़ रही है। बेडरूम में व ड्राइंग रूम में ए.सी. लगवाया। अगली गर्मी में बच्चों के कमरे में भी लग गया। फिर दो साल अच्छे गुजरे। इस साल दोनों का प्रमोशन ह...
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Tag :लघुकथा
  July 21, 2015, 12:00 am
मेरे ही शाने पे चढ़-चढ़ के हमनवा तो चले  इसी बहाने सही, चेहरे वो दिखा तो चले  मेरे ही घर में अंधेरों ने जान दी है पर  मेरे ही दर से उजालों का क़ाफ़िला तो चले  तुम्हारी चाह में हम ख़ाक हुए हैं लेकिन  हमारी ख़ाक से रस्म-ओ-रहे-वफा तो चले  तभी तो जान के रखते हैं हरा ज़ख्मों को  हमारे ...
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Tag :विश्वदीप "जीस्त"
  July 20, 2015, 12:00 am
श्रीकान्त मिश्र 'कान्त'एक जिंदादिल इंसान है..और सम्प्रति कैसर के रोग से लडते हुए अस्पताल मे भर्ती है...इनकी रचनाए साप्ताहिक प्रस्तुति की जा रही है। दिल की कलम से लिखती हूँ रोज़ एक पाती नेह की और तुम्हें बुलाती हूँ रचनाकार परिचय:- श्रीकान्त मिश्र 'कान्त'का जन्म 10 अक्तूब...
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Tag :श्रीकान्त मिश्र 'कान्त'
  July 19, 2015, 12:00 am
आँसू की क्या दूं परिभाषा इसकी नहीं है कोइ भाषा रचनाकार परिचय:- भारती दास प्लाट नम्बर :३६ ,सहकार कोलोनी , सेक्टर -२५ ,गांधीनगर , गुजरात -३८२०२४ mob:+919824553022 गम में, दुःख में, सुख में सब में आहत होती ये जब –तब में याद आये गर बीते कल की तो बस झट से आखें छलकी किसी से जब कुछ कह नही ...
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Tag :भारती दास
  July 18, 2015, 12:00 am
भारत है वीरों की धरती, अगणित हुए नरेश। मीरा, तुलसी, सूर, कबीरा, योगी और दरवेश। एक हमारी राष्ट्र की भाषा, एक रहेगा देश। कागा! ले जा यह संदेश, घर-घर दे जा यह संदेश।। सोच की धरती भले अलग हों, राष्ट्र की धारा एक। जैसे गंगा में मिल नदियाँ, हो जातीं हैं नेक। रीति-नीति का भेद मिटाना, न...
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Tag :श्यामल सुमन
  July 17, 2015, 12:00 am
फतेहपुर की हमारी कालोनी के बीच में एक बड़ा सा पार्क था जिसके चारों ओर घर बने हुए थे| शाम के ४ बजे दूरदर्शन पर बच्चों का कार्यक्रम देखकर हम सभी छोटे बच्चे पार्क में इकठ्ठा हो जाते थे और फिर ६-७ बजे तक पार्क में पूरी धमा-चौकड़ी होती थी| अजीब अजीब तरह के खेल इजाद कर रखे थे हमने ...
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Tag :राहुल यादव
  July 16, 2015, 12:00 am
आज फिर मुझको सताने को तेरी याद आयी, तुझसे महरूम दीवाने को तेरी याद आयी, रचनाकार परिचय:- नाम -- अनुराग सिंह "ऋषी"व्यवसाय -- शोध छात्र (Plant Pathology) जन्म -- 12 अगस्त 1990 पता -- लखनऊ उ,प्र. वर्तमान -- इलाहाबाद (छात्रावास) रूचि -- कविताएँ,गज़लें लिखना, शोध करना प्रकाशित रचनाएँ -- ज़िक्र , रोत...
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Tag :गज़ल
  July 15, 2015, 12:00 am
’और, क्या चल रहा है?’ पूछने के बाद मैंने दुसरा प्रश्न कर दिया ’आंटी कहां है?’ सुना है बीमार रहती है?’ सुषमा ने जवाब देने के बजाए अपनी बेटी से कहा ’जा, अंकल के लिए पीने का पानी ला’ फिर वह इधर-उधर की बातें करने लगी मेरी इन बातों मे कम ही रूचि थी मैं तो आंटी से मिलकर, उनका हाल-चाल ...
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Tag :भारत दोसी
  July 14, 2015, 12:00 am
माँ जब थी तो भरा रहता था घर का कोना कोना चाची ताई बहनो संग कम पड़ता था बिछोना रचनाकार परिचय:- सुजाता शुक्ला एम आई जी -1, सेक्टर -3, शंकर नगर ,रायपुर,(छत्तीसगढ़ ) ई मेल – shukla.sujata7093@gmail.com परिचय := एम एस सी...
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Tag :सुजाता शुक्ला
  July 13, 2015, 12:00 am
श्रीकान्त मिश्र 'कान्त'एक जिंदादिल इंसान है..और सम्प्रति कैसर के रोग से लडते हुए अस्पताल मे भर्ती है...इनकी रचनाए साप्ताहिक प्रस्तुति की जा रही है। नाच रे मन बावरे मधुमास आया-- चहुँ दिशि चहुँ ओर है आनन्द छाया-- रचनाकार परिचय:- श्रीकान्त मिश्र 'कान्त'का जन्म 10 अक्तूबर 1959 ...
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Tag :श्रीकान्त मिश्र 'कान्त'
  July 12, 2015, 12:00 am
मेरा शहर खाँस रहा है सुगबुगाता हुआ काँप रहा है रचनाकार परिचय:- नाम - दीप्ति शर्मा जन्म तिथि - 20 फरवरी जन्म स्थान - आगरा प्रारम्भिक शिक्षा - पिथौरागढ़ 6 क्लास तक .. फिर 2 साल भीमताल .. और अब आगरा में हूँ हाल ही में बी टेक ख़तम हुआ है वर्ष 2012 में . पिता जी - सरकारी नौकरी में हैं जल न...
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Tag :दीप्ति शर्मा
  July 11, 2015, 10:08 am
चींटी बैठी हाथीजी पर , हाथीजी घबड़ाये | बोलेइतना वजन तुम्हारा , हमसे सहा न जाए | रचनाकार परिचय:- श्री प्रभुदयाल श्रीवास्तव का जन्म- 4 अगस्त 1944 को धरमपुरा दमोह (म.प्र.) में हुआ। वैद्युत यांत्रिकी में पत्रोपाधि प्राप्त प्रभुदयाल जी विगत दो दशकों से अधिक समय से कहा...
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Tag :बाल कविता
  July 10, 2015, 12:00 am
किस ने देखा राम हृदय की घनीभूत पीड़ा को कह भी जो न सके किसी से उस गहरी पीड़ा को क्या ये सब सेवाके बदले मिला राम के मन को आदर्शों पर चल कर ही तो पाया इस जीवन को रचनाकार परिचय:- 9 अप्रैल, 1956 को जन्मे डॉ. वेद 'व्यथित' (डॉ. वेदप्रकाश शर्मा) हिन्दी में एम.ए., पी.एच.डी. हैं और वर्त...
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Tag :डॉ. वेद व्यथित
  July 9, 2015, 10:24 am
बरसात तेरी रौनक सबको अच्छी लगती हैं भीगकर तुझमें दुनिया पूरी बच्ची लगती हैं रचनाकार परिचय:- नाम- उगमसिंह राजपुरोहित 'दिलीप'जन्मतिथि- 25/07/1991 शिक्षा- एम.ए, नेट लोक प्रशासन सम्प्रति- प्राध्यापक प्रकाशन- भारतवर्ष की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में विभिन्न विधाओं की रचनाओं...
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Tag :गज़ल
  July 8, 2015, 12:00 am
चलो मै कायर ही सही, आप की तरह लायर तो नही। रचनाकार परिचय:- लेखक, कवि, व्यंगकार, कहानीकार, फिलहाल एक टीवी न्यूज ऐजेंसी से जुड़े हुए है। वादों पर अपनी रहता हूं अड़ा भाव यूरिया का कुछ ऐसे बढ़ा, न देखी है धूप न ही छांव को, कंधे पर फावड़ा हरपल साथ हो। मेहनत में मेरे नही थी को...
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Tag :रवि श्रीवास्तव
  July 7, 2015, 12:00 am
‘नारी की झांई पड़त, अंधा होत भुजंग कबिरा तिन की कौन गति, जो नित नारी को संग ’ रचनाकार परिचय:- नाम : सुशील कुमार 'मानव'आजीविका :अनुवादक साहित्यिक कार्य: कविता,कहानी, गजल लिखना आयु 32 वर्ष, निवास: इलाहाबाद शिक्षा : हिंदी, समाज शास्त्र, और जैव-रसायन से परास्नातक मोबाइ...
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Tag :सुशील कुमार मानव
  July 6, 2015, 12:00 am
श्रीकान्त मिश्र 'कान्त'एक जिंदादिल इंसान है..और सम्प्रति कैसर के रोग से लडते हुए अस्पताल मे भर्ती है...इनकी रचनाए साप्ताहिक प्रस्तुति की जा रही है। मौन सतत् सन्नाटा चहुँदिश क्यों चुप बैठा मन कठिन तमस भी कट जायेगा गीत गुनगुना मन रचनाकार परिचय:- श्रीकान्त मिश्र 'कान्त...
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Tag :श्रीकान्त मिश्र 'कान्त'
  July 5, 2015, 12:00 am
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