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बाल-मन

बंदर ने देखा ये सपना -राजीव राय   बंदर ने देखा ये सपना  लैपटॉप है उसका अपना।  वो गूगल में खोज रहा था  राम नाम है कैसे जपना।  बेटा बोला पापा छोड़ो  फेसबूक में खाता खोलो  सारा जंगल होगा अपना।  तभी बंदरिया डंडा लाई  लैपटॉप की करी पिटाई  बोली ये दुष्मन है अपना।  सब पेड़ों ...
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Tag :Baalgeet
  December 28, 2013, 5:45 pm
- डॉ0 मधुसूदन साहा -  अपनी भाषा हिन्‍दी है हर माथे की बिन्‍दी है। जरा बोलकर देखो तु कितनी सरस सुहानी है, मां की लोरी-सी कोमल रोचक नई कहानी है, राधा के पग की पायल, कान्‍हा की कालिन्‍दी है। इसे राष्‍ट्र ने मान दिया संविधान में अपनाकर, अब दायित्‍व निभाना है इसका पूरा स...
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Tag :डॉ0 मधुसूदन साहा
  September 13, 2013, 8:52 pm
पप्पू का पत्र धनसिंह मेहता ‘अनजान’ पापा तुम लड़ना सीमा पर, बाकी चिन्ता मत करना। देश बड़ा है जान है छोटी, जाँ की चिन्ता मत करना।। नजरें तुम सीमा पर रखना, दुश्मन छिपा शिखर पर है। तुम विचलित बिलकुल मत होना, देश तुम्हीं पर निर्भर है। मम्मी कहतीं- लिख पापा को, माँ की चिन्ता म...
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Tag :धनसिंह मेहता अनजान
  February 19, 2013, 1:13 pm
मेरे गाँव से -धन सिंह मेहता ‘अनजान’ राजा तेरे राजमहल का, रस्‍ता मेरे गाँव से। है छोटा पदचिन्‍ह तुम्‍हारा राजा मेरे गाँव से।। पीठ हमारी, कोड़ा तेरा, राह हमारी रोड़ा तेरा। चना हमारा, घोड़ा तेरा, खाता मेरे गाँव से।। बाग हमारे, फूल तुम्‍हारे, पाँव हमारे, शूल तुम्‍हारे। नद...
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Tag :
  February 12, 2013, 8:10 pm
प्रिय पाठक, ब्‍लॉग पर पधारने का शुक्रिया। आपको हम अवगत कराना चाहते हैं कि तकनीकी कारणों से 'बालमन' ब्‍लॉग नए डो‍मेनपर शिफ्ट हो गया है। यदि 5 सेकेण्‍ड में परिवर्तित पते वाला पृष्‍ठ स्‍वत:नहीं खुलता है, तो कृपया यहां परक्लिक करें। आशा है इस कष्‍ट को आप अन्‍यथा नहीं लेंगे ...
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Tag :
  February 9, 2013, 9:05 pm
मेरा सपना कितना अच्‍छा -रजनीकांत शुक्‍ल- मेरा सपना कितना अच्‍छा, हे ईश्‍वर हो जाए सच्‍चा। बिना पढ़े ही इम्‍तहान में, आएं नंबर सबसे ज्‍यादा। रोज के मेरे खेलकूद में, कोई नहीं पहुंचाए बाधा। सभी कहीं मुझे प्‍यारा बच्‍चा। मेरा सपना कितना अच्‍छा। मेरी कभी किसी गलती पर, म...
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Tag :Rajnikant Shukla
  January 6, 2013, 12:29 pm
आंनद विश्‍वास की बाल कहानी चिड़िया फुर्र...अभी दो चार दिनों से देवम के घर के बरामदे में चिड़ियों की आवाजाही कुछ ज्यादा ही हो गई थी। चिड़ियाँ तिनके ले कर आती, उन्हें  ऊपर रखतीं और फिर चली जातीं दुबारा, तिनके लेने के लिये।लगातार ऐसा ही होता, कुछ तिनके नीचे गिर जाते तो फर्श ग...
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Tag :Anand Vishwas
  December 6, 2012, 11:16 am
 स्‍कूल की वैन डॉ. रामनिवास मानव वैन स्‍कूल की जब भी आती, बच्‍चों में हलचल मच जाती। भाग-दौड़ करते हैं बच्‍चे, देरी से डरते हैं बच्‍चे।  लगे रमन को बस्‍ता भारी, बस में चढ़ने की लाचारी। भूला नवल टिफिन ही लाना, जूतों की पॉलिश करवाना।  मोनू की ढ़ीली है टाई, कैसे काम चलेगा भाई।...
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Tag :Balkavita
  October 31, 2012, 6:44 am
चाह हमारी... प्रभात गुप्‍त छोटी एक पहाड़ी होती, झरना एक वहां पर होता उसी पहाड़ी के ढ़लान पर काश हमारा घर भी होता।  बगिया होती जहां मनोहर खिलते जिसमें सुंदर फूल बड़ा मजा आता जो होता वहीं कहीं अपना स्‍कूल।झरनों के शीतल पानी में घंटो खूब नहाया करते नदी पहाड़ों झोपडि़यों ...
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Tag :.बालगीत
  October 19, 2012, 6:02 am
 आया राखी का त्‍यौहार डॉ0 देशबंधु शाहजहाँपुरी खुशियों का लेकर उपहार आया राखी का त्‍यौहार। जूही ने गेंदा, गुलाब के, तिलक लगा आशीष दिया। तब तक खुश्‍बू बिखराना तुम, जब तक चली न जाए बहार। होठों पर मुस्‍कान बिछाकर, बहनें बाँध रहीं राखी। नहीं चाहिए उनको कुछ भी, केवल माँगें...
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Tag :.बालगीत
  August 2, 2012, 7:51 am
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Tag :.बालगीत
  June 9, 2012, 6:20 am
 उनका मौसमदेवेन्‍द्र कुमारगर्मी को पानी से धोएँबारिश को हम खूब सुखाएँजाड़े को फिर सेंक धूप सेअपनी दादी को खिलवाएँ।कैसा भी मौसम हो जाएउनको सदा शिकायत रहतीइससे तो अच्‍छा यह होगाउनका मौसम नया बनाएँ।काम दिखता है, दाँत नहीं है,पैरों से भी चल न पातींबैठी-बैठी रटती रहतींन...
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Tag :Devendra Kumar
  May 20, 2012, 7:42 am
 क्‍यों पसंद हैं हरदम तुमको फूलों के ही साये ? अश्‍वनी कुमार पाठक क्‍यों पसंद हैं हरदम तुमको फूलों के ही साये ? किस अलबेले चित्रकार से, तुमने पंख रंगाये ? क्‍यों कहते हैं बच्‍चे तुमको, तितली, तितली रानी? क्‍यों लगती तुम उनको इतनी, प्‍यारी और सुहानी? तुम्‍हें देखकर मुन्‍...
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Tag :Balkavita
  April 24, 2012, 5:46 pm
बातें हैं रंगीन देवेन्‍द्र कुमार बाबा के हैं बाल सफेद पर उनकी बातें रंगीन। सुबह टहलने रोज निकलते अपने काम सभी खुद करते छत पर उनकी कसरत का तो मजेदार होता है सीन। हरदम कुछ-कुछ करते रहते दादी से बिन बात झगड़ते नकली दाँत दिखाकर पूँछे मुँह में दाँत बचे क्‍यों तीन। रोज कह...
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Tag :Devendra Kumar
  April 11, 2012, 9:19 pm
 हालत मेरी खस्‍ता है-सूर्य कुमार पाण्‍डेयटीचर जी, ओ टीचर जी,हालत मेरी खस्‍ता है।के जी टू में पढ़ती हूँ,टू केजी का बस्‍ता है।चलूँ सड़क पर रिक्‍शा वाला,मुझे देख कर हँसता है।एक सवारी और लाद लो,ताने मुझपर कसता है।बोझ किताबों का कम करिए,बड़ी दूर का रस्‍ता है।नन्‍हें फूलों प...
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Tag :Bal Ghazal
  March 25, 2012, 10:39 am
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Tag :Krishneshvar Deengar
  March 5, 2012, 7:49 am
मूस जी मुसटन्‍डा-कृष्‍णेश्‍वर डींगर  मूस ही मुस्‍टंडा, लिये हाथ में डंडा।  बिल्‍ली बोली म्‍याऊँ, किस चूहे को खाऊँ।  मूस ही मुस्‍टंडा, गिरा हाथ से डंडा।  बिल्‍ली जी के आगे, पूँछ दबाकर भागे।  मूस ही मुस्‍टंडा, रह गया बाहर डंडा।  घुस गये जाकर बिल में, चूहों की महफिल में।...
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Tag :Krishneshvar Deengar
  February 29, 2012, 6:37 am
 गिरगिटान के भाई। -कृष्‍णेश्‍वर डींगर कभी पहनते कुर्ता टोपी, कभी सूट नेक टाई। रंग बदलने में मोटू जी, गिरगिटान के भाई। कभी हमारी टीम पकड़ कर, बैट्स मैन बन जाते। कभी हमारे ही विरोध में, बॉलर बन कर आते। कोई उनको कहता मोटू, कोई कहता बबलू। कोई उनको कहता गोलू, मैं कहता दल-बद...
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Tag :Krishneshvar Deengar
  February 23, 2012, 7:24 am
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Tag :प्रत्‍यूष गुलेरी
  February 11, 2012, 5:59 pm
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Tag :Bal Ghazal
  January 27, 2012, 7:25 am
जाड़े आये -गिरिजा कुलश्रेष्‍ठ दिन सहमे-सिकुडे से लगते,रातें बडी लडैया...जाड़े आये भैया।खींच-खींच सूरज की चादर,रजनी पाँव पसारे।काना फूँसी करें उघारे,थर्..थर्..चन्दा-तारे।धूप बेचारी ...हारी,करती जल्दी गोल बिछैया...जाड़े आये भैया।लदे फदे कपडों में निकलें,चुन्नू-मुन्नू भा...
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Tag :.बालगीत
  January 8, 2012, 6:55 am
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Tag :.बालगीत
  December 18, 2011, 8:20 am
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Tag :.बालगीत
  December 7, 2011, 6:45 am
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Tag :.बालगीत
  November 30, 2011, 8:42 pm
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Tag :Balkavita
  November 24, 2011, 7:28 am
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