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प्रियंकाभिलाषी.. : View Blog Posts
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प्रियंकाभिलाषी..

..."कुछ तीस रोज़ बाकी हैं..मेरे वादे का शायद पहला फेज़ पूरा हो जाए..शायद आपकी हसरतें मुझ तक पहुँच जायें..इल्म हो जाए इन धमनियों को कि इस कैनवस पर कभी किसी और की कोई भी तस्वीर नहीं लग सकती..!!! रेत की स्याह लकीरों पे रोशन इक वजूद तेरा..ता-उम्र मुझपर रेशम-सा झरेगा..'आठ' बजे के दर्द का ...
प्रियंकाभिलाषी.....
Tag :कहानी..
  July 1, 2013, 12:58 am
..."मेरी घड़ी अब 'आठ' नहीं दिखाती..ख़त्म सिलसिला..न मैं अब खुराफ़ाती..!!"...--गंभीर कर जाते हैं कई सम्बन्ध-विच्छेद.....
प्रियंकाभिलाषी.....
Tag :बेज़ुबां ज़ख्म..
  June 29, 2013, 9:36 pm
..."इक तेरी खुशबू..दूजी सौंधी मिट्टी..तीजी रूमानी रूह..उस पर ज़ालिम यादें..!!"...---चौथी बारिश भिगोती दरख्त..आसमां..आँगन.....
प्रियंकाभिलाषी.....
Tag :बारिश..
  June 29, 2013, 6:30 pm
..."सुनो..तुम्हें पसंद है न..बारिश की बूँदें..रिसता प्यार..और..उसमें क़ैद दर्द..तेरे जाने के बाद..नहीं सुहाती बारिश..रश्क़ है बूंदों से..कुछ रोज़ हुए..बाहर निकलती नहीं..बारिश में..बुलायें यादें कितना..!!"......
प्रियंकाभिलाषी.....
Tag :बारिश..
  June 29, 2013, 6:27 pm
..."तुम्हारी हर शै..रूह में..यूँ बसी..लैपटॉप..मोबाइल..किताबें..कार..स्टीरियो..आई-पॉड..बिस्तर..चादर..सिलवटें..सहर..दोपहर..शब..तन्हाई..वीरानी..वहशत..फ़क़त..इस जहां..उस जहां..इक तू ही तू..!!"......
प्रियंकाभिलाषी.....
Tag :दास्तान-ए-दिल..
  June 29, 2013, 6:17 pm
..."सुनो..गर बेनक़ाब छूट गये..हसरतों के माने..वफ़ा के अफ़साने..उम्मीद के पैमाने..भूला दोगे..सिलवटों के फ़ाये..शब के पाये..रूह के साये..मेरे राज़दां..!!"...--यूँ ही कलम चल गयी..आंधी-सी बह गयी.....
प्रियंकाभिलाषी.....
Tag :बेबाक हरारत..
  June 28, 2013, 5:11 pm
..."आते नहीं अब मिस्ड कॉल्स..बंद हुआ किस्सा पुराना..रात्रि के दूसरे पहर..दफ़अतन..सेलफोन पर उंगलियाँ..तेज़ी से थरथराने लगीं..घंटी गयी..फ़ोन उठा..कट गया..फिर वही नंबर..आवाज़ सुनते ही..दिल की धड़कनें..प्लेन मानिंद भागने लगीं..कितने रोज़ बाद महसूस किया था..तुमने मुझे और मैंने तुम्ह...
प्रियंकाभिलाषी.....
Tag :रूमानियत..
  June 25, 2013, 6:56 pm
..."अच्छा किया जो चले गये..शर्मिन्दा होते हर तक़रीर..१..क्या टुकड़े-टुकड़े जोड़ता हूँ हर्फ़..ख़ुदको समझता बहुत अमीर..२..लानत है बेखुदी पर जो न पहचाने..अपनी औकात में लिपटी ताबीर..३..चल बाँट ले रस्ते अपने-अपने..रख लेना तू मेरी तकदीर..४..न आऊँगा लौट के फिर..पहन..कोई भी झूठी तस्वीर..५..र...
प्रियंकाभिलाषी.....
Tag :बेज़ुबां ज़ख्म..
  June 21, 2013, 11:51 pm
..."चलती-गिरती ज़िन्दगी की राहें..उठो ख़ुद..नहीं आएँगी कोई बाँहें..!!...Photo Courtesy - http://www.flickr.com/photos/ulfbodin/with/8014700704/...
प्रियंकाभिलाषी.....
Tag :ज़िन्दगी..
  June 20, 2013, 6:34 pm
..."देखो..धुला-धुला आकाश सारा..जाने ह्रदय-उपवन किसने सँवारा..खिले जब-तब अंतर्मन दर्पण..सृष्टि करे विवेचन तुम्हारा..!!"......
प्रियंकाभिलाषी.....
Tag :बारिश..
  June 18, 2013, 8:01 pm
..."तेरा स्पर्श अब भी अंतर्मन को वैसे ही सहलाता है..!!"...---तीसरी बारिश.....
प्रियंकाभिलाषी.....
Tag :बारिश..
  June 18, 2013, 7:51 pm
१५ जुलाई २१०३ को भारतवर्ष के एक पुत्र का कूच.. १८५० में जन्म और २०१३ में विदाई.. बहुत रंग बिखेरे थे तुमने, अब कौन सुनाएगा..आप-बीती शब्दों की बेल कौन लगाएगा..एक स्मृति..'तार' की स्मृति में जो शीघ्र ही स्मृति बन जायेगा.."तार-तार हुआ जाता है..स्नेह का तार..आये बचा ले कोई इसे..बन तारणह...
प्रियंकाभिलाषी.....
Tag :स्मृति..
  June 15, 2013, 5:34 pm
..."शीर्ष से उठ थाम अभिराम-चेतन..प्रस्फुटित होती हैं अनेक आकांक्षाएँ..!!! जानते हो न..ह्रदय की मलमल शाख का अविभाजित मूल्य..तुम अतुल्य हो, अमूल्य हो..!!मेरे जीवन की अनमोल धरोहर हो..!!"......
प्रियंकाभिलाषी.....
Tag :ज़िन्दगी..
  June 14, 2013, 12:23 am
..."क्या सब कुछ स्कोर पर डिपैंड करता है..मेरी सक्सेस से ही सब अस्सैस करते हैं..मेरी वैल्यूज़, एथिक्स की कोई वैल्यू नहीं..मेरा कंसर्न नज़र नहीं होता कभी..बर्बाद ही सही..इतनी बेगैरत भी नहीं..!!"...--ऐवें ही.....
प्रियंकाभिलाषी.....
Tag :ज़िन्दगी..
  June 11, 2013, 6:22 pm
..."बेदख़ल..ज़ुल्फों को कर दूँ..या..घटाओं को..सिलवटों को..या..करवटों को..साहिलों को..या..सैलाबों को..मुमकिन नहीं..रेगिस्तां में शफ़क़..!!!"......
प्रियंकाभिलाषी.....
Tag :ज़िन्दगी..
  June 11, 2013, 6:00 pm
..."मेरी ज़िन्दगी के पहले रंग..मेरी आशिकी के..पहले रसरंग..मेरे अरमानों के..पहले जलतरंग..मेरी खुशबू के..पहले हुड़डंग..चल लूटें..हर पतंग..!!"...---प्यारे दोस्त मुझमें तुम..तुममें मैं.....
प्रियंकाभिलाषी.....
Tag :दोस्ती..
  June 10, 2013, 6:36 pm
..."मेरे रहगुज़र में करीब..मेरी ज़िन्दगी के हबीब..जा लौट जा..संग-सी चाहत..और..फ़रियाद..मुमकिन नहीं..!!"......
प्रियंकाभिलाषी.....
Tag :ज़िन्दगी..
  June 9, 2013, 4:59 pm
..."राजधानी की यात्रा..पहला पड़ाव हमारे प्रेम का..याद है न..??कल फिर से जा रही हूँ..स्मृतियों को मिटाने..चिपकी हैं जाने कबसे..मीलों दौड़ती सडकों की रोड़ी पर..सुगंध छुड़ाने..फैली है जो..हर वृक्ष की छाल में..रंग बिसराने..रमे हैं जो..नीले आकाश पर..भूल आऊँगी..बहा आऊँगी..अंतर्मन की नीव..श...
प्रियंकाभिलाषी.....
Tag :रूमानियत..
  May 29, 2013, 10:09 pm
..."ऐसी ख़ता हर शाम मेरे साथ हुई..कतरी ख़ुशी फ़क़त मेरे नाम हुई..!!"......
प्रियंकाभिलाषी.....
Tag :बस यूँ ही..
  May 28, 2013, 10:39 pm
..."रिश्तों का बोझ यूँ भी उठाते थे हम..तेरे मिलने के बाद जीने लगे थे..!! तुम्हें जाना था चले जाते..क्यूँ नापे फ़क़त जिस्म के रेशे.. रेज़ा-रेज़ा छिल गयी रूह और तुम्हें मुझसे बाबस्ता ना रहा.. क्यूँ इतने करीब लाये कि साँसें भूल गयीं चलने, बिन तेरे..!!!किसी सज़ा से डरता नहीं..तेरी ख़ाम...
प्रियंकाभिलाषी.....
Tag :कहानी..
  May 21, 2013, 11:25 pm
..."दफ़अतन तुम्हारे ज़ेहन से कैसे उतर गयी..गिर बाँहों से गर्द हो गयी.. क्या गुनाह हुआ..कहाँ छूटी तपिश.. तड़पती रातें..फफकती साँसें..बेआबरू रूह..!!!एक रत्ती मिट्टी..एक गज़ सूत.. ज़िंदा जिस्म..बेबस हसरत..अदद अश्क..बोझिल आँखें.."...---तेरे बिन थक गयीं हैं आहें.....
प्रियंकाभिलाषी.....
Tag :कहानी..
  May 21, 2013, 12:08 am
..."तेरी याद का इक गमला रखा था जो मेज़ पर साथ बीते पलों के बीज वाला..फलने-फूलने लगा है..जब भी वहशत का तूफां आता है, नर्म साँसों की टहनी रूह की वादियों में कर देती है बौछार..!!! सिलवटों का असर उतर आया है गुलों की रंगत में..उँगलियों के पोर से सहलाती हूँ जब पत्तियाँ, कसती गिरफ़्त बढ़ा...
प्रियंकाभिलाषी.....
Tag :कहानी..
  May 20, 2013, 12:02 am
..."कुछ तीस दिन गुज़र गए..ना जाने कितनी सदियाँ बीत गयीं..तुम नहीं आये..!!! किस ज़ुर्म की सज़ा पा रही हूँ..नहीं जानती.. रेज़ा-रेज़ा राख़ में तब्दील होती रूह की तकदीर..!!!"...---दुनिया गले लगाती रही, इक तुम ही दूरियां बढ़ाते रहे.....
प्रियंकाभिलाषी.....
Tag :कहानी..
  May 17, 2013, 2:47 pm
..."टपकती..छनती..साँसों की तार से..मोहब्बत की चाशनी..पकाया बहुत देर..जिस्म की आँच पर..रूह की तासीर बदल गयी..तेरी इक छुअन से..लज्ज़त ज़ुबां पर..रेज़ा-रेज़ा लुफ़्त..सलीका-ए-तपिश..लब पे पैबंद दरिया..अहह..रूहानी सफ़र..इक..तेरा कूचा..!!!"......
प्रियंकाभिलाषी.....
Tag :बेबाक हरारत..
  May 13, 2013, 1:20 am
..."माँ के लिए भी सिर्फ एक दिन.?? ऐसा लगता है..या तो संसार विचित्र है या मुझ जैसे थोड़े और लोग भी..!! बड़ा अद्भुत है परम-कृपालु मार्केटिंग वालों का जंजाल और उससे भी अधिक सुंदर है आजकल लोगों का बदलता हुआ मानसिक परिवेश..!!"...---सो-कॉल्ड मदर्स डे पर.....
प्रियंकाभिलाषी.....
Tag :माँ..
  May 12, 2013, 6:26 pm
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