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आवारा बादल

हमने भी खून बहाया कुछ तुमने भी बलिदान दिया तब जाकर मिली हमें फिरंगियों से आज़ादी,भगत सिंह ने फंदा चूमा तो असफाकउल्ला भी शहीद हुए हुएक्या हिंदु मुस्लिम करते हो कुछ इंसानियत के काम करो, पाकिस्तान को मारो गोली अब हिंदुस्तान की बात करोपडोसी अगर बदमाश है तो  मिलक...
आवारा बादल...
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  September 26, 2017, 4:50 pm
ध्यान, साधना, सत्संग से कोसों दूरकंक्रीट के जंगल मेंसांसारिक वासनाओं और अहंकार तलेआध्यात्म रहित वनवासभोग रहा हूँ इन दिनों,मैं फिर से लौट कर आऊँगा जानता हूँ की तुम मुझे माफ करोगे और सहर्ष स्वीकार भी करोगे। ...
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  June 29, 2016, 8:23 pm
लिखने के लिए बाज़ुओं में ताक़त चाहिए और जिगर भी,वर्ना कलम तो हरेक के पास है।खाली जा सकता है वार तलवार का और बंदूक की गोली भी दे सकती है धोखा पर बहुत गहरा है वार कलम का सीधे जिगर पर वार करती है कलम ,बंदूक थामी है तुमने तो जरूर तुम्हारे बाजुओं में ताक़त होगी और जि...
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  June 15, 2016, 6:45 pm
आज एक पुरानी रचना फिर से.......एक मुल्क के सीने परजब तलवार चल रही थीतब आसमाँ रो रहा थाऔर ज़मी चीख रही थी,चीर कर सीने कोखून की एक लकीर उभर आई थीउसे ही कुछ लोगों नेसरहद मान लिया,उस लकीर के एक तरफजिस्मऔर दूसरी तरफरूह थी,पर कुछ इंसानजिन्होंने जिस्म से रूह कोजुदा किया थावो होठो म...
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  August 14, 2015, 4:48 pm
ऐ मेरे खुदा माँ के बालों की सफेदी मुझे अच्छी नहीं लगतीउसके चेहरे की झुर्रियाँ मिटा देउसका हर ग़म दे दे मुझे उसके चेहरे पे मुस्कुराहट सजा दे,उसी की दुआओं का असर है कि गिर गिर के सम्हल जाता हूँ हर बारजानता हूँ हर वक़्त मेरी फिक्र रहती है उसे,ऐ मेरे ख़ुदा अपनी हर तकलीफ ...
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  May 10, 2015, 6:37 pm
हाँ मजदूर हूँ मैं हाँ हाँ मजदूर हूँ मैं,ढाओ सितम जितना सामर्थ्य हैं तुममे झुका सको जो मेरी पीठ इतना सामर्थ्य नहीं तुममे,हाँ मैं मजदूर हूँ हाँ हाँ मजदूर हूँ मैं  तुम देखो मेरे पसीने की हर बूंद है तुम्हारी तिजोरी मे,वक़्त नहीं शायद तुम्हारे पास मेरे लिए ...
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  May 4, 2015, 10:06 pm
बरसती हुई आग में अपने वज़न से ज्यादा भार पीठ पर लादकर मुस्कुराता है वो,अपने हाथों के छाले घरवालों से छुपाता है वो,बच्चों के साथ हँसता है खिलखिलाता है वो,वो मौजूद है हर तरफहमारे इस तरफ हमारे उस तरफ,लेकिन क्या उसका हक़ अदा करते हैं हम??...
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  May 1, 2015, 8:05 pm
क्या सोचा है कभी उन हाथों के बारे में जिन हाथों ने बोए थे बीज, उगाई थी फसल,क्या सोचा है कभी उनके बारे में जिन्होने बहाया था पसीना और बनाए थे वो झरोखेजहाँ से आती है पुरसुकून हवा और धूप,कभी फुर्सत मिले तो झरोखा खोल कर देखनाइसे बनाने वाला कहीं खुले आसमान तले सोत...
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  November 15, 2014, 9:19 pm
आज फिर से हम दीपावली मनाएंगे जिनके घरों में चूल्हे भी नहीं जलेउन्हें शर्मशार करते हुए घी के दीप जलाएँगे,धमाकों की आवाज मेंछुप जाएंगा रुदन उनका   और वो भूखे पेट निहारेंगे रोशनी से जगमगाते शहर को,आज फिर से हम भूखे नंगों के बीच नए कपडे पहन कर ...
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  October 23, 2014, 9:43 pm
पूज्य बापू, सादर प्रणाम, आपको गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामना, हमें पूर्ण विश्वास है कि आप कुशलता से होंगे। हम सब भी यहाँ मजे में हैं। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देश और समाज की स्थिति से आपको अवगत करवाने के लिए मैंने ये ख़त लिखना अपना कर्तव्यसमझा। कुछ बा...
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  January 25, 2014, 8:48 pm
मैं एक आम आदमीअब भी नहीं पहुंची हैपरिवर्तन की लहरमेरे जीवन मे,सुबह के इंतज़ार मेगुजरती है हर रातहर सुबह फिर से ले आती हैअनगिनत चिंताओं की सौगात,डरा सहमा सागुजारता हूँ दिन किसी तरहछुपता हूँ मकान मालिक सेऔर सुनता हूँ ताने बीवी के,हर सुबह निकलता हूँ घर सेबच्चों की फीस और...
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  January 18, 2014, 7:51 pm
मैं एक आम आदमीअब भी नहीं पहुंची हैपरिवर्तन की लहरमेरे जीवन मे,सुबह के इंतज़ार मेगुजरती है हर रातहर सुबह फिर से ले आती हैअनगिनत चिंताओं की सौगात,डरा सहमा सागुजारता हूँ दिन किसी तरहछुपता हूँ मकान मालिक सेऔर सुनता हूँ ताने बीवी के,हर सुबह निकलता हूँ घर सेबच्चों की फीस और...
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  January 17, 2014, 4:41 pm
प्रेम क्या है?धोखा, फरेब या वफ़ा है,या किसी कि रगों में बहतानशा है,ये महज़ एक खुबसूरत लफ्ज़ हैया भावनाओ सेखिलवाड़ करने का अचूक अस्त्र है,त्याग है बलिदान हैया बहेलिये का जाल है,नहीं नहीं ये तो शायद ईश्वर का वरदान है। ...
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  January 16, 2014, 9:00 pm
पीने लगा हूँ अब शराब मैंना गम है अब ना दर्द का एहसास है,  जीने लगा हूँ अब जब से पीने लगा हूँ मैं ना उनकी याद आती हैं अब ना ख्वाबों मे सताती है वो,जब से पीने लगा हूँ मैं जी भर के जीने लगा हूँ मैं। ...
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  January 11, 2014, 6:07 pm
मेरी ऊँगली और अंगूठा व्याकुल हैंअपनी नयी प्रियतमा से मिलने कोक्योंकि आज ही मैंनेनयी कलम खरीदी है ।    ...
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  January 3, 2014, 9:09 pm
हे नारी  तुम सच कहना क्या समझी है तुमने एक पुरुष की व्यथाएक निर्धारित मानसिकता से परे उसका कोमल मन,सच कहना क्या देखा है तुमने   पसीने से लथपथ थककर चूर हँसते मुस्कुराते हुए रिश्तों की भारी पोटली पीठ पर लादे पुरुष,सच कहना क्या देखा है तुमनेतप...
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  October 29, 2013, 8:51 pm
साभार गूगल नदियों का रुख मोड़ करपहाड़ों को भेद कर बिजली बनाएँगे बस्तियों को उजाड़ कर इमारतें बनाएँगे खेतों की जगह कारखाने बनाएँगे इन पहाड़ों, नदियों, खेतों, बस्तियों और समूची प्रकृति को रौंद करप्रगति के पथ परबढ़ना है,क्या ये संभव है?? ...
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  January 15, 2013, 5:58 pm
एक दामिनी के मरने पर इतने मर्द पैदा हुए कि हिल गया हिंदुस्तान कहाँ थे ये मर्द अब तक।  ...
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  January 7, 2013, 10:07 pm
उनके पसीने कि कमाईहम खाते हैंवो बहाते हैं हम पी जाते हैं वो दो वक़्त की रोटी को तरस जाते हैं और हम पिज्जा बर्गर खाते हैं। ...
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  January 7, 2013, 1:39 pm
हथौड़ी और छेनी की टंकार है संगीत उनके लिएऔर हम हाथों मे जाम लिए गज़ल सुनते हैं। ...
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  January 6, 2013, 7:50 pm
हथौड़ी और छेनी की टंकारहै संगीत उनके लिएऔर हम हाथों मे जाम लिए गज़ल सुनते हैं। ...
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  January 5, 2013, 8:45 pm
आए साल का स्वागत कुछ क्षणिकाओं से ......... (1)साँप अब डसना छोड़ दो नया साल आ रहा है। (2)सुन लो दुनिया वालों हिंदुस्तान मे और रक्त नहीं बहेगा अब के बरस। (3)सावधान कसाब के आका और नहीं सहेंगे  अब के बरस। (4)फिज़ा मे बारूद नहीं फूलों की महक होगी इस साल। (5)ना हिन्दू हैं हम ना मुसलमान ...
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  December 27, 2012, 2:29 pm
क्षणिकाएँ .......(1)ज़िन्दगी ने दिए थे जो ज़ख्म उन्हें सहलाता रहा पीता रहा दर्द और जीता रहा शुक्रिया उनका जिन्होंने मरहम की और उनका भी शुक्रिया जिन्होंने मेरे ज़ख्मों को कुरेदा।(2)ऐ मेरे खुदा हर ख़ता के लिए माफ़ करना मुझे मैं होशो हवाश में न था जब मैंने ख़ता की।(3)हुश्न वा...
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  December 23, 2012, 5:20 pm
मिनाक्षी के लिए कुछ पंक्तियाँ...... कभी तुम पुर्णिमा के चाँद सी लगती हो  और मैं तुम्हारी शीतल चाँदनी मे बैठ प्यार भरे गीत गुनगुनाता हूँ,और कभी तुम  सर्द सुबह मे सूर्य की पहली किरण बन जाती होऔर मैं तुम्हारी सुनहरी किरणों के सौन्दर्य से मदहोश हो जाता हूँ,सदियों तक इसी तरह अप...
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  November 6, 2012, 12:57 am
देखता हूँ अन्यायऔर सहता हूँ जुल्मगूंगा नहीं हूँफिर भी चुप रहता हूँ,हर तरफ कोहराम हैचौराहे पर बिक रहा ईमान हैअंधा नहीं हूँफिर भी आँखें बंद रखता हूँ,दर्द से चीख रहे हैंपरिंदे, पर्वत, पेड़-पौधेसुन रहा हूँ चित्कारफिर भी बहरा बना रहता हूँ।नफरत के सौदागरकत्ल करने पर आमाद ह...
आवारा बादल...
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  October 28, 2012, 4:39 pm
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